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डूंगरपुर नगर परिषद: 7 चुनाव से BJP का कब्जा, क्या इस बार सभापति बनाने का कांग्रेस का सपना होगा पूरा?
Fri, 28 Aug 2026 11:30 AM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 11:30 AM IST
सार
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की घोषणा के बाद डूंगरपुर नगर परिषद में सियासी मुकाबला तेज हो गया है। डूंगरपुर नगर परिषद के 40 वार्डों के लिए 9 सितंबर को मतदान होगा, जहां कुल 37,788 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
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डूंगरपुर नगर परिषद कार्यालय।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही डूंगरपुर में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। देश के स्वच्छ शहरों में शुमार डूंगरपुर नगर परिषद में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। नगर परिषद के लिए 9 सितंबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 11 सितंबर को सागवाड़ा नगर पालिका के लिए वोट डाले जाएंगे। डूंगरपुर नगर परिषद में सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। चुनावी मैदान में भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी (बाप) के उतरने से इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस भाजपा के गढ़ में सेंध लगाकर अपना सभापति बना पाएगी या भाजपा एक बार फिर अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी?
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37,788 मतदाता तय करेंगे नगर परिषद की नई तस्वीर
डूंगरपुर नगर परिषद में कुल 40 वार्ड हैं और इस बार 37,788 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 19,103 पुरुष और 18,685 महिला मतदाता शामिल हैं। वर्तमान में नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड है। वार्डवार राजनीतिक स्थिति की बात करें तो भाजपा के पास सबसे ज्यादा 27 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 6 पार्षद हैं। वहीं अन्य के खाते में 7 पार्षद हैं। इस तरह कुल 40 वार्डों में भाजपा की स्थिति फिलहाल मजबूत नजर आती है।
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40 वार्डों में 24 सामान्य, 16 आरक्षित वर्गों के लिए
नगर परिषद के वार्डों में आरक्षण की स्थिति भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाली है। कुल 40 वार्डों में 3 वार्ड अनुसूचित जाति (एससी), 5 वार्ड अनुसूचित जनजाति (एसटी), 8 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और 24 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इनमें 14 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीति उसी हिसाब से तैयार करनी शुरू कर दी है।
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7 चुनाव से लगातार BJP का कब्जा
डूंगरपुर नगर परिषद का राजनीतिक इतिहास भाजपा के पक्ष में रहा है। बीते सात चुनावों में भाजपा लगातार जीत हासिल कर अपना बोर्ड बनाती रही है, जिसे पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड माना जा रहा है। पिछले चुनाव में बीटीपी के पांच प्रत्याशियों ने निर्दलीय के रूप में जीत दर्ज की थी। इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा था।
इस बार परिस्थितियां कुछ अलग हैं। भारत आदिवासी पार्टी (बाप) के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस ने भरत नागदा को सभापति पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित कर चुनावी रणनीति साफ कर दी है। वहीं भाजपा की ओर से के.के. गुप्ता और बाप की ओर से दिग्विजय सिंह प्रमुख दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं।
परिसीमन और आरक्षण पर भी उठ रहे सवाल
नए परिसीमन के बाद डूंगरपुर में वार्डों की राजनीतिक गणित भी बदल गई है। कांग्रेस और बाप की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ वार्डों का विभाजन भाजपा नेताओं के कहने पर किया गया है। वहीं, लॉटरी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एससी और एसटी आबादी से जुड़े आरक्षण को लेकर भी राजनीतिक दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ ऐसे वार्ड भी इन वर्गों के लिए आरक्षित किए गए हैं, जहां संबंधित वर्ग की आबादी नहीं है। आरक्षण की इस स्थिति ने भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों को अपनी चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की गणित में बदलाव करने के लिए मजबूर किया है।
पिछले पांच चुनावों में भी भाजपा का बोर्ड
डूंगरपुर नगर परिषद में पिछले पांच चुनावों से भाजपा का बोर्ड रहा है। हालांकि इस बार बाप के मैदान में आने और कांग्रेस की ओर से सभापति पद के लिए प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद भाजपा के सामने भी अपनी पुरानी स्थिति बरकरार रखने की चुनौती होगी। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के मजबूत संगठन और पिछले चुनावों के आंकड़ों को बदलने की है। वहीं बाप की मौजूदगी से आदिवासी बहुल क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
सड़क, सीवरेज और सफाई व्यवस्था बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा
चुनाव में राजनीतिक समीकरणों के साथ-साथ स्थानीय समस्याएं भी बड़ा मुद्दा बन सकती हैं। नगर परिषद क्षेत्र में सीवरेज का काम चल रहा है, जिसके चलते भीतरी शहर के मुख्य मार्गों और गलियों की सड़कें खस्ताहाल हैं। इससे स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देश के स्वच्छ शहरों में शामिल डूंगरपुर में पिछले पांच वर्षों के दौरान सफाई व्यवस्था के डगमगाने का मुद्दा भी चुनाव में उठ सकता है। इसके अलावा सड़क, बिजली और सफाई से जुड़ी समस्याओं के साथ कई मोहल्लों में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
ऐसे में इस बार डूंगरपुर नगर परिषद का चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि स्थानीय विकास, सड़क, सफाई, सीवरेज और पानी जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। भाजपा जहां सात चुनावों की जीत का सिलसिला बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस सत्ता में वापसी और अपना सभापति बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। बाप की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है।