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MP News: 'तिरंगा हमारा जीवन बदल सकता है' आईएएस पी नरहरि ने साझा की बचपन की चुनौतियां, बोले-हमेशा रहता था यह डर
Sat, 13 Aug 2022 08:47 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sat, 13 Aug 2022 08:47 PM IST
सार
न्याय और समानता सिर्फ लोकतांत्रिक तरीकों से ही प्राप्त की जा सकती है। इसलिए मैंने लाल झंडे को खारिज करते हुए तिरंगे को गले लगा लिया और बेहतर जीवन बनाने के लिए चल पड़ा। रक्तपात और डराने वाली ताकतों से किनारा कर मैंने एक बेहतर भविष्य के लिए अपना गांव 30 साल पहले ही छोड़ा था।
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आईएएस पी नरहरि
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर सचिव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पी नरहरि ने अपने छात्र जीवन को याद कर लोकतंत्र के महत्व को समझाया है। उन्होंने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट कर अपने छात्र जीवन की कठिनाइयों और उस समय से माहौल के बारे में बताया। उन्होंने कहा, भारतीय तिरंगा झंडा ही हमारे जीवन को बदल सकता है। यह हमें एक विकसित लोकतंत्र और विश्व गुरु बनने की ओर भी ले जा सकता है। आइए जानते हैं अपनी पोस्ट में उन्होंने क्या कहा?
मैं 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। उस समय मुझे आधी रात को रेलवे स्टेशन पर उतरकर अपने गांव जाना होता था। इसके लिए मुझे लगभग 2 किमी पैदल चलना पड़ता था। रात के अंधेरे और कच्चे पर रास्ते पर चलने में मुझे डर लगता था, क्योंकि रास्ते में मुझे नक्सली मिला करते थे। रात का समय होने के कारण वह मुझसे पूछताछ भी करते थे।
जब मैं छोटा था तब तेलंगाना और मेरे पैतृक जिले करीमनगर में नक्सली गतिविधियां चरम पर थीं। रात के समय अज्ञात व्यक्तियों के दरवाजे खटखटाने का डर हमेशा बना रहता था। उनके रहते क्षेत्र में कभी भी सुरक्षा का महौल नहीं रहा। मैं उनकी विचारधारा के बिल्कुल खिलाफ था, जिसने सीमित परिस्थितियों में तत्काल न्याय देने का प्रयास किया।
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न्याय और समानता सिर्फ लोकतांत्रिक तरीकों से ही प्राप्त की जा सकती है। इसलिए मैंने लाल झंडे को खारिज करते हुए तिरंगे को गले लगा लिया और बेहतर कानूनी जीवन बनाने के लिए चल पड़ा। रक्तपात और डराने वाली ताकतों से किनारा कर मैंने एक बेहतर भविष्य की आशा में अपना गांव 30 साल पहले ही छोड़ा था। क्योंकि मैं हमेशा लोकतंत्र में विश्वास करता था। लोकतंत्र और शिक्षा ही दलितों के जीवन में न्याय ला सकता है। शिक्षा सभी वर्गों के लोगों के लिए अपार अवसर पैदा कर सकती है।
आज भारत 75 वर्ष की आयु में हमारे संविधान में निहित उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 100 वर्ष पूरे होने पर हमें इन उद्देश्यों को परिणामों के साथ प्राप्त करना होगा। आने वाले 25 साल में तिरंगा गरीब और अमीर के बीच के अंतर को मिटा देगा। जो लोग इस लोकतंत्र का फल नहीं देख पाए, उनके लिए अधिक अवसर प्रवाहित होंगे। सत्ता का डंडा उन लोगों को सौंप दिया जाएगा जो मानते हैं कि वह बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
तिरंगा हमें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और लोकतांत्रिक रूप से एक जीवंत राष्ट्र बनाने के लिए प्रेरित करेगा। आइए इस विशेष त्योहार को खुशियों के साथ मनाएं। आइए उस गणतंत्र को संजोएं, जिसमें हम पैदा हुए हैं। आइए अपने राष्ट्र को आने वाली पीढ़ियों के रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाएं। आइए उन युवाओं पर विश्वास करें जिनके पास गहरी आकांक्षाएं और योग्य विचार हैं। प्रत्येक बालिका को जिम्मेदारी लेने और जीवन के सभी क्षेत्रों में हमारा नेतृत्व करने के लिए पंख विकसित करने दें। भारतीय तिरंगा झंडा ही हमारे जीवन को बदल सकता है और हमें एक विकसित सदी के लोकतंत्र और विश्व गुरु की ओर ले जा सकता है।
जैसा कि सचिव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पी नरहरि ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा।
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मैं 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। उस समय मुझे आधी रात को रेलवे स्टेशन पर उतरकर अपने गांव जाना होता था। इसके लिए मुझे लगभग 2 किमी पैदल चलना पड़ता था। रात के अंधेरे और कच्चे पर रास्ते पर चलने में मुझे डर लगता था, क्योंकि रास्ते में मुझे नक्सली मिला करते थे। रात का समय होने के कारण वह मुझसे पूछताछ भी करते थे।
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जब मैं छोटा था तब तेलंगाना और मेरे पैतृक जिले करीमनगर में नक्सली गतिविधियां चरम पर थीं। रात के समय अज्ञात व्यक्तियों के दरवाजे खटखटाने का डर हमेशा बना रहता था। उनके रहते क्षेत्र में कभी भी सुरक्षा का महौल नहीं रहा। मैं उनकी विचारधारा के बिल्कुल खिलाफ था, जिसने सीमित परिस्थितियों में तत्काल न्याय देने का प्रयास किया।
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न्याय और समानता सिर्फ लोकतांत्रिक तरीकों से ही प्राप्त की जा सकती है। इसलिए मैंने लाल झंडे को खारिज करते हुए तिरंगे को गले लगा लिया और बेहतर कानूनी जीवन बनाने के लिए चल पड़ा। रक्तपात और डराने वाली ताकतों से किनारा कर मैंने एक बेहतर भविष्य की आशा में अपना गांव 30 साल पहले ही छोड़ा था। क्योंकि मैं हमेशा लोकतंत्र में विश्वास करता था। लोकतंत्र और शिक्षा ही दलितों के जीवन में न्याय ला सकता है। शिक्षा सभी वर्गों के लोगों के लिए अपार अवसर पैदा कर सकती है।
आज भारत 75 वर्ष की आयु में हमारे संविधान में निहित उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 100 वर्ष पूरे होने पर हमें इन उद्देश्यों को परिणामों के साथ प्राप्त करना होगा। आने वाले 25 साल में तिरंगा गरीब और अमीर के बीच के अंतर को मिटा देगा। जो लोग इस लोकतंत्र का फल नहीं देख पाए, उनके लिए अधिक अवसर प्रवाहित होंगे। सत्ता का डंडा उन लोगों को सौंप दिया जाएगा जो मानते हैं कि वह बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
तिरंगा हमें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और लोकतांत्रिक रूप से एक जीवंत राष्ट्र बनाने के लिए प्रेरित करेगा। आइए इस विशेष त्योहार को खुशियों के साथ मनाएं। आइए उस गणतंत्र को संजोएं, जिसमें हम पैदा हुए हैं। आइए अपने राष्ट्र को आने वाली पीढ़ियों के रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाएं। आइए उन युवाओं पर विश्वास करें जिनके पास गहरी आकांक्षाएं और योग्य विचार हैं। प्रत्येक बालिका को जिम्मेदारी लेने और जीवन के सभी क्षेत्रों में हमारा नेतृत्व करने के लिए पंख विकसित करने दें। भारतीय तिरंगा झंडा ही हमारे जीवन को बदल सकता है और हमें एक विकसित सदी के लोकतंत्र और विश्व गुरु की ओर ले जा सकता है।
जैसा कि सचिव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पी नरहरि ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा।
