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Jaisalmer: भारत-पाकिस्तान सीमा के पास मिली एंटी पर्सनल लैंड माइन को किया गया नष्ट, दो महीने पहले मिली थी

Fri, 13 Oct 2023 04:20 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: उदित दीक्षित Updated Fri, 13 Oct 2023 04:20 PM IST
सार

Jaisalmer News: भारत-पाकिस्तान सीमा के पास सरहदी गांव केरला में 2 महीने पहले चरवाहे को मिले लैंड माइन को सेना के बम निरोधक दस्ते ने नष्ट कर दिया है। तेज धमाके के साथ लैंड फट तो जमीन में दो फीट गहरा गड्ढा हो गया। 

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Anti personnel land mine destroyed in Jaisalmer found two months ago near India Pakistan border
तेज धमाके के साथ फटा लैंड माइन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजसथान के जैसलमेर जिले से लगती भारत-पाकिस्तान सीमा के पास दो महीने पहले मिली एंटी पर्सनल लैंड माइन को नष्ट कर दिया गया है। सरहदी केरला गांव में सेना के बम निरोधक दस्ते ने लैंड माइन को नष्ट करने की कार्रवाई की। इस दौरान सेना के अधिकारी और झिनझिनयाली थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही। सुरक्षा के लिहाज से ग्रामीणों को लैंड माइन नष्ट करने वाली जगह से 1 किमी दूर ही रोक दिया था।  

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झिनझिनयाली पुलिस थाना प्रभारी हड़वंत सिंह ने बताया कि केरला गांव में 2 महीने पहले एक चरवाहे को खेत में एंटी पर्सनल लैंड माइन मिली थी। जिसे गुरुवार को जंगल में सुरक्षित स्थान पर सेना के बम निरोधक दस्ते ने धमाके के साथ नष्ट किया। इससे पहले बम निरोधक दस्ते ने एंटी पर्सनल लैंड माइन को सुनसान जगह में रेत के कट्टों के बीच रखा। पुलिस ने गांव वालों को और उनके पशुओं को लैंड माइन वाली जगह के पास नहीं आने की हिदायत दी थी। गुरुवार देर शाम बम निरोधक दस्ते ने प्रक्रिया अनुसार बम को नष्ट करने का काम किया। लैंड माइन के फटते ही तेज धमाके के साथ जमीन में 2 फीट गहरा गड्ढा हो गया। 
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बता दें कि भारत-पाक सरहद के पास सरहदी गांव केरला में 2 महीने पहले एक चरवाहे को लैंड माइन मिली थी। बताया गया था कि सेना के युद्धाभ्यास के दौरान ये किसी तरह जमीन में ही दबी रह गई। बाद में आंधी के चलने से रेत उड़ी और वह जमीन से बाहर आ गई होगी। दो महीने तक लैंड माइन को पुलिस की निगरानी में रखा गया था।  
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क्या है एंटी पर्सनल माइंस? 
एंटी-पर्सनल माइन का इस्तेमाल इंसानों के खिलाफ किया जाता है, जबकि एंटी-टैंक माइन का इस्तेमाल भारी गाड़ियों के लिए किया जाता है। ये माइंस घुसपैठियों और दुश्मन की पैदल सेना के लिए जमीन में दबाई जातीं हैं। जैसे ही दुश्मन देश का सैनिकों का पैर इस पर रखता है ये माइन तेज धमाके के साथ फट जाता है।  

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