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RJ LS Polls: अलवर लोकसभा सीट में गायब होते विकास के मुद्दे, बीजेपी-कांग्रेस अपने-अपने में मस्त

Thu, 11 Apr 2024 08:26 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 11 Apr 2024 08:26 PM IST
सार

Rajasthan Lok Sabha Poll: अलवर लोकसभा चुनाव का मुकाबला रोचक होता जा रहा है। यहां का चुनाव मोदी, राहुल और स्थानीय व बाहरी व्यक्ति के बीच में है। दोनों ही उम्मीदवारों के बीच विकास के मुद्दे गायब हो चुके हैं।

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Rajasthan Lok Sabha Poll Development issue disappearing in Sonbhadra Lok Sabha seat
कांग्रेस के नेता और बीजेपी के नेता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलवर लोकसभा सीट से कांग्रेस के ललित यादव कांग्रेस के परंपरागत वोट मेव, मीना और एससी को अपना मानकर चल रहे हैं। वहीं, ललित यादव स्थानीय और बाहरी का नारा बुलंद करके यादव वोटों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के भूपेंद्र यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं।

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भाजपा के कार्यकर्ता कहते हैं कि अलवर से दिल्ली तक एक ही सरकार की एकरूपता रहेगी तो अलवर के विकास को गति मिलेगी। भूपेंद्र यादव जीतने पर केंद्र में मंत्री बनेंगे, जिससे अलवर का पूर्ण विकास होगा। भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवार एक ही जाति के होने के कारण यादवों पर ही अपना फोकस ज्यादा केंद्रित कर रहे हैं। भाजपा का भी मानना है कि ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत, जाट, गुर्जर भाजपा का परंपरागत वोट है। इन वोटो में कांग्रेसी उम्मीदवार सेंध नहीं लगा पाएगा। हालांकि, भाजपा के उम्मीदवार भूपेंद्र यादव अपनी जीत को अपने पक्ष में सुनिश्चित मान रहे हैं। लेकिन फिर भी वह संभल-संभल कर पैर रख रहे हैं।
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अपनी जीत का अंतर बढ़ाने के लिए भूपेंद्र यादव व बीजेपी के जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता कांग्रेस पार्टी के नेताओं को दल बदल करवा रहे हैं। कांग्रेस के जिला प्रमुख बालवीर छीलर जो जाट नेता हैं, जाट मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उन्हें कांग्रेस से भाजपा में लेकर आए हैं। यह अलग बात है कि जिला प्रमुख बालवीर छिलर की अपनी जाति में कोई पहचान नहीं है। वहीं, भूपेंद्र यादव ने पूर्व सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉक्टर करण सिंह यादव को भी बीजेपी ज्वॉइन करवाई है तथा कभी बीजेपी के बड़े चेहरे रहे हरिराम यादव जो काफी समय से कांग्रेस में थे, उनको भी अपने पुराने घर भाजपा में वापसी करवाई है। हरिराम यादव पूर्व मुख्यमंत्री भैरू सिंह शेखावत के निकटवर्ती लोगों में रहे थे तथा भाजपा के सिंबल पर दो बार विधायक का चुनाव भी लड़ कर अपना भाग्य आजमा चुके हैं।
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हरिराम यादव वह बड़े किरदार हैं, जो भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उनकी कैबिनेट में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। इसी तरह भंवर जितेंद्र सिंह की माता युवरानी महेंद्र कुमारी के निकटवर्ती रहे भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष फतेह सिंह यादव की भी अपने पुराने घर भाजपा में वापसी हुई है। व्यापार महासंघ के अध्यक्ष रमेश जुनेजा जो अलवर को संभाग का दर्जा दिलाने के लिए काफी समय से संघर्षरत थे, वह भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ गए हैं।

इस तरह बीजेपी के उम्मीदवार भूपेंद्र यादव व बीजेपी के जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता कांग्रेस खेमे में सेंध लगा बीजेपी की जीत के मतों का अधिक अंतर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आये नेताओं की भंवर जितेन्द्र सिंह से भी नाराजगी एक कारण रही है। जो लोग कांग्रेस में काम करना चाहते हैं, उनका कहना है कि जितेन्द्र सिंह के कारण यहां कोई काम नहीं कर सकता है, उन्हें जी हुजूर संस्कृति के लोग पसंद हैं। कांग्रेस के जो निष्ठावान लोग हैं, वह भी सक्रिय दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे में ललित यादव अपने जहाज को कैसे पार लगाएंगे।

ललित यादव गुर्जर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए अपने को सचिन पायलट का ही समर्थित उमीदवार बता रहे हैं तथा सचिन पायलट का दौरा भी करा चुके हैं। बीजेपी व कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों के सामने भीतरी घात का खतरा है। लेकिन ज्यादा खतरा कांग्रेस उमीदवार के सामने हैं।वीडियो जारी कराने वाले ही कांग्रेसी इसके चुनाव सर्वे सर्वा बने हुए हैं, जिन लोगों ने ऐसा वीडियो जारी करवाकर ललित यादव की उम्मीदवारी पर प्रश्न चिन्ह लगवाया, वही मुख्य बने हुए हैं। यही नहीं भंवर जितेन्द्र सिंह पर भी उन्होंने कीचड़ उछाला था, वह ललित के पक्षधर कैसे हो सकते हैं? अंदर खाने यह दर्द ललित को भी है पर चुनाव है, करे क्या?


बीजेपी के उमीदवार से उसकी अपनी जाति के नेता भी नाराज हैं। लेकिन मोदी, अमित शाह के कारण वह अपनी नाराजगी करना तो दूर नाराजगी के भाव भी चेहरे पर नहीं आने दे रहे हैं। अलवर लोकसभा चुनाव में विकास के मुद्दे गायब हैं। यह चुनाव एक ही जाति के दो लोगों के बीच है। मतदाताओं का रुझान मोदी के कारण बीजेपी की ओर है, इसलिए यहां मोदी की जीत सुनिश्चित है। यहां यह भी बात मजेदार है कि ललित यादव के चुनाव की बागडोर ऐसे कांग्रेसी नेताओं के पास है, जिनके पास कांग्रेस को छह चुनाव हराने का अनुभव है। कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने एक भी चुनाव नहीं जीता।

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