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Alwar News: बाजरे की खरीद MSP पर करने की मांग, मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
Mon, 11 Sep 2023 04:35 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 11 Sep 2023 04:35 PM IST
सार
अलवर जिले में बाजरे की खरीद MSP पर करने की मांग हो रही है। किसानों ने मांग पूरी नहीं होने पर 48 घंटे बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इसको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने कलेक्टर को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा है।
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किसानों का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अलवर में बाजरे की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने मिनी सचिवालय में पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संयुक्त किसान मोर्चा अलवर के पदाधिकारियों ने बताया कि एक बीघा खेत में बाजरे की फसल बुवाई से लेकर कटाई तक लगभग पांच हजार रुपये का खर्चा आता है। जबकि सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य न्यूनतम 2500 रुपये में एक क्विंटल बाजरा है।
एक बीघा खेत में आठ क्विंटल बाजरा उत्पन्न होता है। ऐसे में अगर एमएसपी से कम रेट पर बाजरे की खरीद मंडी में होती है, तो यह केंद्र सरकार के आदेश की अवमानना ही नहीं, किसान की मेहनत का शोषण है। इसलिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने सरकारी आदेश की पालना सुनिश्चित करवाए। क्योंकि बाजरे की फसल लगभग तैयार है और 10 दिन में बिकने के लिए शुरू हो जाएगी। सरकारी आदेश अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में आते हैं। बहुत से किसानों के पास बाजरा स्टोरेज के संसाधन नहीं हैं। मंडी में व्यापारी मन चाहे दामों पर खरीदारी करता है। उस समय होने वाले नुकसान की भरपाई की जाए।
48 घंटे बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी
साथ ही मांग की गई है कि सरकार बयान जारी करे कि एमएसपी की खरीद प्रथम किसान के मंडी में पहुंचते ही लागू मानी जाए। सरकारी आदेश की पालन सख्ती से लागू की जाए। अगर सख्ती से पालना नहीं की गई, तो 48 घंटे बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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एक बीघा खेत में आठ क्विंटल बाजरा उत्पन्न होता है। ऐसे में अगर एमएसपी से कम रेट पर बाजरे की खरीद मंडी में होती है, तो यह केंद्र सरकार के आदेश की अवमानना ही नहीं, किसान की मेहनत का शोषण है। इसलिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने सरकारी आदेश की पालना सुनिश्चित करवाए। क्योंकि बाजरे की फसल लगभग तैयार है और 10 दिन में बिकने के लिए शुरू हो जाएगी। सरकारी आदेश अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में आते हैं। बहुत से किसानों के पास बाजरा स्टोरेज के संसाधन नहीं हैं। मंडी में व्यापारी मन चाहे दामों पर खरीदारी करता है। उस समय होने वाले नुकसान की भरपाई की जाए।
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48 घंटे बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी
साथ ही मांग की गई है कि सरकार बयान जारी करे कि एमएसपी की खरीद प्रथम किसान के मंडी में पहुंचते ही लागू मानी जाए। सरकारी आदेश की पालन सख्ती से लागू की जाए। अगर सख्ती से पालना नहीं की गई, तो 48 घंटे बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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