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Alwar News : डेढ़ महीने में आबादी वाले क्षेत्र में घुसे तीन पैंथर, वन विभाग और प्रशासन के लिए चुनौती की स्थिति
Tue, 31 Dec 2024 05:03 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 31 Dec 2024 05:03 PM IST
सार
बीते 45 दिनों में लगभग तीन पैंथर शहर और आसपास के आबादी वाले इलाके में देखे गए हैं। पैंथरों का इस तरह आबादी वाले क्षेत्रों में आना वन विभाग और प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
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पकड़ा गया पैंथर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अलवर और आसपास के इलाके इन दिनों पैंथरों की बढ़ती गतिविधियों से सहमे हुए नजर आ रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने में तीन पैंथर आबादी वाले क्षेत्रों में दिखाई दिए, जिनमें से दो को सरिस्का की वन विभाग टीम ने रेस्क्यू कर लिया, जबकि तीसरा पैंथर अब भी राजऋषि कॉलेज परिसर में वन विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
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अब भी पकड़ से बाहर है तीसरा पैंथर
आर.आर. कॉलेज में देखा गया यह पैंथर पिछले डेढ़ महीने से वन विभाग की पकड़ से दूर है। पैंथर को पकड़ने के लिए तीन पिंजरे लगाए गए हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है।
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सुबह की घटना ने बढ़ाई चिंता
आज सुबह भी अलवर के सुगना बाई धर्मशाला के पास एक अन्य पैंथर दिखाई दिया, जिसे देखकर स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत अपने घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद कर लिए और वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने पर वन विभाग और सरिस्का की टीम मौके पर पहुंची और पैंथर को ट्रेंक्यूलाइज करने का प्रयास किया लेकिन पैंथर काफी देर तक इधर-उधर भागता रहा और बाद में एक गहरे नाले में छिप गया। कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने उसे ट्रेंक्यूलाइज करके पकड़ लिया।
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कहीं ये कॉलेज वाला पैंथर तो नहीं?
सरिस्का के सीसीएफ संग्राम सिंह ने कहा कि पकड़ा गया पैंथर मेल है और कॉलेज में देखा गया पैंथर भी मेल बताया गया है। हालांकि यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ दिनों तक कॉलेज क्षेत्र में नजर रखनी होगी। अगर कॉलेज में पैंथर नहीं दिखाई देता है तो हो सकता है कि यह वही पैंथर हो।
क्या है आबादी में आने की वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरिस्का के बफर जोन में टाइगरों की संख्या बढ़ने से पैंथरों के लिए जंगल में जगह कम हो गई है और टाइगरों के क्षेत्रीय झगड़ों के कारण पैंथर अब जंगल छोड़कर शहरी क्षेत्रों में आने को मजबूर हो रहे हैं।
पकड़े गए पैंथर को राजगढ़ क्षेत्र के घने जंगलों में छोड़ने की योजना बनाई जा रही है ताकि वह आबादी में दोबारा न आए। हालांकि इसके लिए सरिस्का के फील्ड डायरेक्टर की अनुमति आवश्यक होगी।
पैंथरों की बढ़ती गतिविधियों ने न केवल वन विभाग बल्कि आम जनता को भी चिंतित कर दिया है। सरिस्का के पास स्थित शहरों और गांवों में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने वन विभाग से ठोस कदम उठाने की मांग की है। वन विभाग और प्रशासन के सामने अब इन पैंथरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और इनकी गतिविधियों पर भी नजर रखने की बड़ी चुनौती है।