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राजस्थान: ग्राम विकास अधिकारी पर पत्नी-बेटों को मजदूर बताकर गबन का आरोप
Tue, 13 Oct 2026 02:48 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Tue, 13 Oct 2026 02:48 PM IST
सार
अलवर जिले की कठूमर पंचायत समिति की सोंखर ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी हितेश शर्मा पर पत्नी, तीन बेटों और एक रिश्तेदार को विकास कार्यों में मजदूर दिखाकर 95,202 रुपये का भुगतान कराने का आरोप है। रिकॉर्ड के अनुसार, पांच विकास कार्यों में परिजनों के खातों में राशि भेजी गई।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले की कठूमर पंचायत समिति स्थित सोंखर ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। यहां तैनात ग्राम विकास अधिकारी हितेश शर्मा पर अपनी पत्नी, तीन बेटों और एक रिश्तेदार को विकास कार्यों में मजदूर दर्शाकर 95,202 रुपये का भुगतान उठाने के आरोप लगे हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, जहां आम मजदूरों की दैनिक मजदूरी 200 रुपये दर्ज है, वहीं अधिकारी के परिजनों को 600 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया गया।
मस्टररोल में फर्जीवाड़ा और अधिक भुगतान
वर्ष 2020-21 से 2025 के दौरान सोंखर ग्राम पंचायत में स्वीकृत नौ विकास कार्यों में से पांच कार्यों में यह गड़बड़ी की गई। ग्राम विकास अधिकारी ने मस्टररोल में परिजनों के नाम दर्ज करके यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित करवाई। मस्टररोल के आंकड़ों के अनुसार, साधारण श्रमिकों की तुलना में अधिकारी के परिजनों को तीन गुना अधिक मजदूरी दी गई। इस मामले ने पंचायत समिति स्तर पर मस्टररोल के सत्यापन और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि बिना पात्रता जांच के ही यह भुगतान स्वीकृत कर दिया गया।
परिजनों के खातों में भेजी गई राशि
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ग्राम विकास अधिकारी के बेटे मोहित के खाते में 20,018 रुपये, रोहित के खाते में 20,819 रुपये और सोहित के खाते में 9,724 रुपये भेजे गए। इसके अलावा पत्नी सुमन के खाते में 21,750 रुपये तथा रिश्तेदार यशवंत तिवारी के खाते में 22,891 रुपये स्थानांतरित हुए। जानकारी के मुताबिक, इनमें से एक बेटा पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, जबकि रिश्तेदार बैंक में नौकरी करता है।
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नालियों पर जाली लगाने के लिए 14वें वित्त आयोग से स्वीकृत 1.29 लाख रुपये के बजट में से मोहित और रोहित को 7,200-7,200 रुपये तथा सुमन को 2,640 रुपये दिए गए। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक बोरिंग पर टंकी निर्माण और ग्रेवल सड़क पर मोरम डालने के कार्य में भी यशवंत तिवारी को 2,873 रुपये का भुगतान किया गया।
प्रशासनिक जांच और अधिकारी का बचाव
मामला उजागर होने के बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यक्ष चौधरी ने स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी सरकारी योजनाओं का पैसा अपने परिजनों के खातों में स्थानांतरित नहीं कर सकता। उन्होंने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
दूसरी ओर, आरोपी ग्राम विकास अधिकारी हितेश शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि श्रमिकों की उपलब्धता न होने के कारण परिजनों को काम पर लगाना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि पूरी राशि सरकारी खाते में वापस जमा करवा दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों की ओर से एक पत्र तैयार कराकर अधिकारियों को सौंपा है, जिसमें आगे जांच न करने की बात कही गई है।
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मस्टररोल में फर्जीवाड़ा और अधिक भुगतान
वर्ष 2020-21 से 2025 के दौरान सोंखर ग्राम पंचायत में स्वीकृत नौ विकास कार्यों में से पांच कार्यों में यह गड़बड़ी की गई। ग्राम विकास अधिकारी ने मस्टररोल में परिजनों के नाम दर्ज करके यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित करवाई। मस्टररोल के आंकड़ों के अनुसार, साधारण श्रमिकों की तुलना में अधिकारी के परिजनों को तीन गुना अधिक मजदूरी दी गई। इस मामले ने पंचायत समिति स्तर पर मस्टररोल के सत्यापन और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि बिना पात्रता जांच के ही यह भुगतान स्वीकृत कर दिया गया।
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परिजनों के खातों में भेजी गई राशि
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ग्राम विकास अधिकारी के बेटे मोहित के खाते में 20,018 रुपये, रोहित के खाते में 20,819 रुपये और सोहित के खाते में 9,724 रुपये भेजे गए। इसके अलावा पत्नी सुमन के खाते में 21,750 रुपये तथा रिश्तेदार यशवंत तिवारी के खाते में 22,891 रुपये स्थानांतरित हुए। जानकारी के मुताबिक, इनमें से एक बेटा पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, जबकि रिश्तेदार बैंक में नौकरी करता है।
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नालियों पर जाली लगाने के लिए 14वें वित्त आयोग से स्वीकृत 1.29 लाख रुपये के बजट में से मोहित और रोहित को 7,200-7,200 रुपये तथा सुमन को 2,640 रुपये दिए गए। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक बोरिंग पर टंकी निर्माण और ग्रेवल सड़क पर मोरम डालने के कार्य में भी यशवंत तिवारी को 2,873 रुपये का भुगतान किया गया।
प्रशासनिक जांच और अधिकारी का बचाव
मामला उजागर होने के बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यक्ष चौधरी ने स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी सरकारी योजनाओं का पैसा अपने परिजनों के खातों में स्थानांतरित नहीं कर सकता। उन्होंने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
दूसरी ओर, आरोपी ग्राम विकास अधिकारी हितेश शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि श्रमिकों की उपलब्धता न होने के कारण परिजनों को काम पर लगाना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि पूरी राशि सरकारी खाते में वापस जमा करवा दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों की ओर से एक पत्र तैयार कराकर अधिकारियों को सौंपा है, जिसमें आगे जांच न करने की बात कही गई है।