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Rajasthan: जोधपुर के बाद अजमेर में स्कूल बंदी के खिलाफ आंदोलन, उर्दू विद्यालयों को हिंदी में मर्ज कर रही सरकार
Wed, 22 Jan 2025 06:17 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 22 Jan 2025 06:17 PM IST
सार
राजस्थान में भजनलाल सरकार ने जीरो एडमिशन और कम स्डूटेंड वाले कई स्कूलों को बंद या आसपास के स्कूल में मर्ज करने का फैसला लिया था। इसके विरोध में प्रदेश के कई जिलों में आंदोलन शुरू हो गया है।
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अजमेर उर्दू स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के निकट मुस्लिम बाहुल्य इलाके अंदरकोट में स्थित साल 1941 से संचालित उर्दू माध्यम के विद्यालयों को नियम विरुद्ध हिंदी माध्यम विद्यालय में मर्ज करने कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग ने अपना विरोध जताया है। वहीं, जोधपुर में बालिकाओं ने पुलिस की जीप पर चढ़कर प्रदर्शन किया था।
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बता दें कि सरकार से अपने इस फैसले को निरस्त करने की मांग की गई है और कहा कि उर्दू पढ़ने वाले बच्चों को हिंदी मीडियम में पढ़ाया जाएगा तो उनको परेशानी का सामना करना पड़ेगा। आने वाले कुछ महीनो में बोर्ड के एग्जाम हैं। ऐसे में उनके भविष्य पर भी संकट मंडरा सकता है, जिन बच्चों ने उर्दू में बीएड की है, उन बच्चों की नौकरी पर भी संकट पैदा हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह रलावता ने जिला कलेक्टर लोकबंधु को सोमवार को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्होंने बताया कि अजमेर जिले में दरगाह के पास स्थित अंदरकोट क्षेत्र जो कि पूर्णतः अल्पसंख्यक आबादी का क्षेत्र है। यहां पर साल 1941 से संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़बाव उर्दू माध्यम व बालिका शिक्षा हेतु राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय अंदरकोट उर्दू माध्यम मौजूद है।
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इसमें लगभग 300 छात्र-छात्राएं वर्तमान में अल्पभाषाई उर्दू माध्यम में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 17 जनवरी को निदेशक, माध्यमिक शिक्षा बीकानेर के आदेश द्वारा इन उर्दू माध्यम अल्पभाषायी विद्यालयों को हिंदी माध्यम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़बाव में समायोजित कर खत्म कर दिया गया है, जो कि सर्वदा अनुचित व नियम विरुद्ध है। इस कारण अभिभावकों और क्षेत्रवासियों में गहरा रोष है।
ज्ञापन में कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह रलावता ने मांग की थी कि उक्त उर्दू माध्यम अल्पभाषायी विद्यालयों का अस्तित्व कायम रखते हुए इनको समायोजित करने की कार्रवाई को निरस्त किया जाए। ज्ञापन देने वालों में गजेंद्र सिंह रलावता, एसएम अकबर सहित कई लोग शामिल रहे। वहीं, आजादी से पहले की इस स्कूल में पांच शिक्षक हैं, जिसमें उर्दू की एक व बाकी हिंदी माध्यम के शिक्षक हैं।
विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाली शिक्षक शबाना ने कहा कि जिन बच्चों ने बचपन से उर्दू में शिक्षा हासिल की है, अब उनको हिंदी में पढ़ाई जाएगा, यह असंभव है। मुस्लिम बाहुल्य इलाके में स्थित इस स्कूल में अल्पसंख्यक बच्चों की संख्या अधिक है। ऐसे में इन बच्चों को हिंदी मीडियम में पढ़ना मुश्किल होगा।
वहीं, स्थानीय क्षेत्रवासियों ने भी उर्दू विद्यालय को हिंदी माध्यम में किए जाने को लेकर विरोध जताया है और कहा कि अगर सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो वह इसका विरोध करेंगे। उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान सरकार ने अजमेर जिले के दो उर्दू विद्यालयों को हिंदी माध्यम में मर्ज किए जाने का आदेश जारी किया है।