Ajmer: कर्नाटक हार के बाद राजस्थान पर फोकस, अजमेर से शुरुआत कर प्रदेश के हर जिले में होगी मोदी की सभा
नडीए की सरकार के नौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सभा का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी ऐसा पहली बार प्रयोग करने जा रही है, जब किसी चुनावी राज्य के हर जिले में नरेंद्र मोदी सभा करेंगे।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिलों में सभाओं की शुरुआत 31 मई को अजमेर जिले से करेंगे। एनडीए की सरकार के नौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सभा हो रही है। भाजपा मंथन कर रही है प्रधानमंत्री की सभा हर जिले में हो, इसके लिए जिम्मेवारों से कार्य शुरू करने को बोल दिया गया है।
कर्नाटक चुनाव में हार के बाद अब बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजस्थान पर पूरा फोकस कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी की सभाएं हर जिले में करवाने पर मंथन चल रहा है।
इसे लेकर केन्द्रीय नेतृत्व ने हर जिले से सूचनाएं मंगवाना भी शुरू कर दिया है। संभवत: पार्टी देश में ऐसा पहली बार प्रयोग करने जा रही है, जब किसी चुनावी राज्य के हर जिले में नरेंद्र मोदी सभा करेंगे। साफ होने लगा है कि बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर ही लड़ने जा रही है। इसके पीछे प्रदेश भाजपा में जारी गुटबाजी को भी माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की सभा की शुरुआत अजमेर से होने के पीछे प्रमुख कारण अजमेर बीजेपी का गढ़ माना जाता है। ऐसे में पीएम की सभा के लिए सबसे पहले अजमेर जिले को चुना गया है। पिछले विधानसभा चुनावों में अजमेर जिले की आठ में से पांच सीटें बीजेपी ने जीती थीं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी की सभाओं को लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ जिले के राजनीतिक समीकरणों की भी जानकारी भी मांगी गई है, जिनके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं...
- किस जिले में पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने कितनी सीटें जीतीं, उम्मीदवार का जीत-हार का अंतर क्या रहा।
- बीजेपी की हार के प्रमुख कारण क्या रहे थे।
- इसके साथ ही जिले के जातीय समीकरण क्या कहते हैं।
- जिले की विधानसभा सीटों पर जिताऊ उम्मीदवार कौन-कौन है।
सात सीटों में नहीं खुला था खाता
दरसल पिछले चुनाव में 33 में से सात जिले ऐसे थे, जिसमें भाजपा का खाता भी नहीं खुला था, इन सात जिलों में बीजेपी ने एक भी सीट नहीं जीती थी। इनमें से चार जिले पूर्वी राजस्थान के हैं। माना जाता है कि यहां सचिन पालयट के प्रभाव के चलते बीजेपी पिछड़ी थी। वहीं, कांग्रेस को यहां से अप्रत्याशित बढ़त मिली थी। इसके अलावा शेखावटी अंचल में भी बीजेपी फिसड्डी साबित हुई थी। मेवाड़ व पश्चिमी राजस्थान का एक-एक जिला ऐसा है, जहां बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था।
सात जिले, जहां बीजेपी ने नहीं जीती सीट
- जैसलमेर
- सीकर
- प्रतापगढ़
- दौसा
- भरतपुर
- करौली
- सवाईमाधोपुर
चुनाव की बागडोर पीएम के पास
पांच जिले जहां भाजपा 70 से 80% तक सीट हार गई थी वो हैं जयपुर, जोधपुर, नागौर, अलवर, और चूरू
आलाकमान का पूरा फोकस सिर्फ जीत पर है। प्रधानमंत्री ही चुनाव की बागडोर सम्भालने वाले हैं, जिसकी शुरुआत अजमेर से होने जा रही है।