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Ajmer News: रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज की सतह धंसने पर कोर्ट सख्त, आवागमन पर रोक लगाने के निर्देश
Thu, 10 Jul 2025 03:16 PM IST
अजमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jul 2025 03:16 PM IST
सार
हाल की बारिश में रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज की जमीन धंस गई, जिससे उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठे। मामले में कोर्ट ने ब्रिज पर आवागमन को तत्काल रोके जाने के निर्देश दिए हैं।
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बारिश में धंसे रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज पर कोर्ट सख्त
विस्तार
शहर के रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में हुई बारिश के बाद ब्रिज की सतह धंस गई, जिससे उसकी मजबूती और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो गईं। इस मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ब्रिज पर आवागमन को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए हैं।
कोर्ट ने अजमेर कलेक्टर लोकबंधु को निर्देशित किया है कि वे ब्रिज पर आमजन और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोकें और सुरक्षा सुनिश्चित करें। मामले की अगली सुनवाई अब 11 जुलाई को होगी। एलिवेटेड रोड पर आवागमन बंद होने से कचहरी रोड, आगरा गेट-फव्वारा से रेलवे स्टेशन और मार्टिंडल ब्रिज पर ट्रैफिक बढ़ गया है। गौरतलब है कि ब्रिज में तकनीकी खामियों को लेकर जितेश धनवानी और मुकेश पुरी की ओर से जनहित याचिका पेश की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक पाराशर ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए बताया कि ब्रिज की जर्जर स्थिति के बावजूद वहां आवागमन जारी है, जो आमजन की जान के लिए खतरा बन सकता है। सिविल न्यायाधीश पश्चिम कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मनमोहन चंदेल ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्मार्ट सिटी के सीईओ और एसीईओ नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया लेकिन कोर्ट ने स्थिति को गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया और साफ कहा कि जनसुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आदेश का पालन नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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गौरतलब है कि रामसेतु ब्रिज पर पहले भी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल की बारिश के बाद जमीन धंसने की घटना ने इन शंकाओं को और पुख्ता कर दिया है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह ब्रिज इतने कम समय में क्षतिग्रस्त हो जाना भ्रष्टाचार और लापरवाही का संकेत माना जा रहा है।
शहरवासियों ने भी प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं और कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला आमजन की सुरक्षा के लिए राहतकारी है। अब सभी की निगाहें 11 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर यह तय होगा कि ब्रिज की मरम्मत की जाएगी या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ेगी।
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कोर्ट ने अजमेर कलेक्टर लोकबंधु को निर्देशित किया है कि वे ब्रिज पर आमजन और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोकें और सुरक्षा सुनिश्चित करें। मामले की अगली सुनवाई अब 11 जुलाई को होगी। एलिवेटेड रोड पर आवागमन बंद होने से कचहरी रोड, आगरा गेट-फव्वारा से रेलवे स्टेशन और मार्टिंडल ब्रिज पर ट्रैफिक बढ़ गया है। गौरतलब है कि ब्रिज में तकनीकी खामियों को लेकर जितेश धनवानी और मुकेश पुरी की ओर से जनहित याचिका पेश की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक पाराशर ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए बताया कि ब्रिज की जर्जर स्थिति के बावजूद वहां आवागमन जारी है, जो आमजन की जान के लिए खतरा बन सकता है। सिविल न्यायाधीश पश्चिम कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मनमोहन चंदेल ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्मार्ट सिटी के सीईओ और एसीईओ नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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सुनवाई के दौरान नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया लेकिन कोर्ट ने स्थिति को गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया और साफ कहा कि जनसुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आदेश का पालन नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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गौरतलब है कि रामसेतु ब्रिज पर पहले भी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल की बारिश के बाद जमीन धंसने की घटना ने इन शंकाओं को और पुख्ता कर दिया है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह ब्रिज इतने कम समय में क्षतिग्रस्त हो जाना भ्रष्टाचार और लापरवाही का संकेत माना जा रहा है।
शहरवासियों ने भी प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं और कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला आमजन की सुरक्षा के लिए राहतकारी है। अब सभी की निगाहें 11 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर यह तय होगा कि ब्रिज की मरम्मत की जाएगी या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ेगी।