अजमेर जेल में डाकू जगन गुर्जर की हत्या: वारदात के वक्त CCTV बंद, 319 में 61 कैमरे खराब; हाईकोर्ट सख्त
अजमेर की उच्च सुरक्षा जेल में चंबल के कुख्यात डाकू जगन गुर्जर की हत्या के मामले में जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 29 जून को साथी बंदी विष्णु ने तौलिए से गला घोंटकर 52 वर्षीय जगन की हत्या कर दी थी।
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राजस्थान की उच्च सुरक्षा जेल अजमेर में चंबल के कुख्यात डाकू जगन गुर्जर की हत्या के मामले ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस दिन 52 वर्षीय जगन गुर्जर की जेल के भीतर हत्या हुई, उस दौरान घटनास्थल के पास लगा सीसीटीवी कैमरा बंद था। राजस्थान उच्च न्यायालय ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए बंदियों की सुरक्षा और प्रदेश की जेलों में सीसीटीवी व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। पुलिस की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, 29 जून को जेल के भीतर साथी बंदी विष्णु ने तौलिए से गला घोंटकर जगन गुर्जर की हत्या कर दी थी।
319 कैमरों में से 61 पूरी तरह बंद
जेल प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिस बैरक के पास हत्या की वारदात हुई, वहां लगा सीसीटीवी कैमरा तकनीकी खराबी के चलते 24 जून की सुबह 9:16 बजे ही बंद हो गया था। जेल परिसर में कुल 319 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 61 कैमरे पूरी तरह बंद हैं। वहीं करीब 20 अन्य कैमरे यूपीएस और बिजली से जुड़ी समस्याओं के कारण बार-बार बंद होते रहते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जेल प्रशासन ने मार्च से जून के बीच सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग को 10 बार पत्र लिखकर खराब कैमरों, मॉनीटर और यूपीएस को दुरुस्त कराने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद समस्या बनी रही। 30 जून को भी जेल अधीक्षक ने विभाग को कैमरों की स्थिति से अवगत कराया था। मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को सीसीटीवी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कराने के आदेश दिए।
तौलिए से घोंटा था जगन का गला
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 29 जून को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच आरोपी बंदी विष्णु ने तौलिए से जगन गुर्जर का गला घोंट दिया। जगन 16 मई से अजमेर जेल में निरुद्ध था। शुरुआत में उसे ब्लॉक चार के वार्ड तीन में उसके भाई पप्पू गुर्जर के साथ रखा गया था। भाई के साथ अनबन होने के बाद उसे वार्ड दो में स्थानांतरित कर दिया गया।
जेल प्रशासन के अनुसार वार्ड बदलने के बाद जगन ने एक जेलकर्मी को बताया था कि वह पिछले तीन वर्षों से जेल में बंद विष्णु समेत कई कैदियों को जानता है। वह पास की कोठरी में बंद विष्णु और पंकज के साथ लूडो भी खेलता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी विष्णु ने पूछताछ में बताया कि जगन उस पर ताने कसता था और उसके चोरी के मामलों का मजाक उड़ाता था। आरोप है कि हत्या की वारदात से पहले विष्णु ने सीसीटीवी कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा दिया था, जिससे कैमरे में कोई दृश्य रिकॉर्ड न हो सके।
जगन गुर्जर पर दर्ज थे करीब 100 मुकदमे
धौलपुर निवासी जगन गुर्जर पर राजस्थान और मध्य प्रदेश के अलग-अलग थानों में करीब 100 आपराधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित आवास को उड़ाने की धमकी देने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। इसके बाद वर्ष 2009 में उसने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण किया था। जून 2019 में दो महिलाओं के साथ मारपीट के मामले में जगन को पकड़ने के लिए करीब 500 पुलिसकर्मियों की टीम लगाई गई थी।
जगन पहली बार वर्ष 2001 में गिरफ्तार हुआ था और बाद में कई बार जमानत पर जेल से बाहर आया। चंबल के बीहड़ों में डकैती करने के लिए कुख्यात रहे जगन की तीन पत्नियां थीं। इनमें से एक पत्नी के उसके आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की बात भी सामने आई थी। जेल के भीतर हुई इस हत्या और बड़ी संख्या में खराब सीसीटीवी कैमरों को लेकर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।