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राजस्थान: 6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में एक और आरोपी गिरफ्तार, कमीशन के लालच में दिया था बैंक खाता

Thu, 10 Sep 2026 10:44 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Thu, 10 Sep 2026 10:44 PM IST
सार

6.80 करोड़ रुपये के बॉस स्कैम मामले में पुलिस ने बाड़मेर से तगाराम को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कमीशन के लालच में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने का आरोप है। मामले में अब तक आठ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
 

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6.80 crore boss scam tagaram arrest jaipur cyber crime barmer mule bank account commission cyber fraud
साइबर अपराध - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान पुलिस के केंद्रीय साइबर अपराध थाने की टीम ने 6.80 करोड़ रुपये के बॉस स्कैम मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बाड़मेर निवासी तगाराम को साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने के आरोप में पकड़ा है। आरोपी ने कमीशन के लालच में आकर अपना बैंक खाता गिरोह को दिया था। इस चर्चित प्रकरण में पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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जांच में सामने आई तगाराम की भूमिका
साइबर अपराध के अतिरिक्त महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने बताया कि अग्रिम अनुसंधान के दौरान तगाराम की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद पुलिस टीम ने उसे बाड़मेर से गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए जयपुर लाया गया।
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खाते में आई रकम निकालने बैंक पहुंचा
पुलिस जांच में बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों से तगाराम की संलिप्तता सामने आई है। आरोपी ने अपना बैंक खाता हरेन्द्र उर्फ हनी नाम के व्यक्ति को उपलब्ध कराया था। इस खाते में 24 अगस्त को 2.50 लाख रुपये की राशि आई थी। इसके तुरंत बाद तगाराम, हरेन्द्र के साथ खुद बैंक पहुंचा और खाते में आई रकम निकालने का प्रयास किया था।
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ठगी की रकम खपाने का पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे छिपाने और अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित करने के लिए नेटवर्क चला रहा था। इसके लिए म्यूल बैंक खातों, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा था।

टेलीग्राम से मिलते थे खाते और सिम
गिरोह टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से फर्जी या म्यूल बैंक खाते, एटीएम, पासबुक और सिम की किट उपलब्ध कराता था। ठगी की राशि खातों में पहुंचते ही एटीएम और चेक से नकद निकाल ली जाती थी या यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और दूसरे खातों में भेज दी जाती थी।

क्रिप्टो करेंसी में बदलते थे पैसे
ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में लगातार स्थानांतरित कर कई स्तरों पर लेयरिंग की जाती थी। इसके बाद राशि को बाइनेंस जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम पर उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से यूएसडीटी या अन्य क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता था।


मनी ट्रेल खंगाल रही पुलिस
पुलिस आरोपियों के व्हाट्सएप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। ठगी की रकम किन-किन खातों तक पहुंची और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए मनी ट्रेल खंगाली जा रही है।
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