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कामकाज पर नोटिस से बिफरे उद्यमी
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Fri, 30 May 2014 10:11 PM IST
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लुधियाना एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट सोसाइटी (लेट्स) और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) में ठन गई है। बोर्ड द्वारा सोसाइटी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए नोटिस भेजा गया जिससे लेट्स पदाधिकारी बिफर गए हैं। पदाधिकारियों का आरोप है कि चेयरमैन समेत बोर्ड का रवैया तानाशाह की तरह है। पदाधिकारियों को धमकाया जा रहा है, इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लेट्स पदाधिकारियों ने शुक्रवार को होटल में कांफ्रेंस करके बोर्ड को अल्टीमेटम दिया है कि पांच जून तक नोटिस वापस लिए जाएं, अन्यथा सात जून को सूबे के तमाम औद्योगिक संगठनों की बैठक बुला कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। लेट्स ने चेतावनी दी है कि बोर्ड अधिकारियों को इकाईयों में घुसने नहीं दिया जाएगा और उनका घेराव भी किया जाएगा।
लेट्स के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर (सीईओ) अवतार सिंह का कहना है कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग से निकल रहे पानी को ट्रीट करने के फोकल प्वाइंट के फेज आठ में कॉमन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाया गया है। जनवरी 2013 में इसमें 898 उद्यमी सदस्य थे अब यह संख्या बढ़ कर 1333 हो गई है। अब 2.85 लाख लीटर पानी रोजाना ट्रीट किया जा रहा है। इस प्लांट को अपग्रेड किया जा रहा है।
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सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदूषण बोर्ड पहले प्लांट के कामकाज से संतुष्ट था। रोजाना बोर्ड के अधिकारी इसे मॉनिटर करते हैं। लेकिन अचानक बोर्ड ने इसके कामकाज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। बीस मई को हुई बैठक में लेट्स पदाधिकारियों को धमकाया गया, नोटिस और मामला दर्ज कराने तक की चेतावनी भी दी गई। इसके बाद 28 मई को ही पदाधिकारियों को बोर्ड का नोटिस मिला है। सिंह ने कहा कि सारी स्थिति से सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर बादल को भी पत्र लिख कर अवगत कराया गया है।
लेट्स के महासचिव और यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान चरणजीत सिंह विश्वकर्मा का कहना है कि लेट्स के सभी पदाधिकारी उद्यमी हैं और अपने कामकाज के साथ-साथ इंडस्ट्री की सेवा में लगे हैं। इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री से प्रदूषण कम करने में इस प्लांट का बड़ा योगदान है। बावजूद इसके बोर्ड अधिकारियों का रवैया बर्दाश्त से बाहर है।
विश्वकर्मा का आरोप है कि बोर्ड के पास 400 इकाईयों की कांसेंट लंबित पड़ी हैं। इस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है। इससे उद्यमी परेशान हैं। इस अवसर पर लेट्स के डायरेक्टर उपकार सिंह ने कहा कि पंजाब में उद्योगपतियों का कोई सम्मान नहीं है, इसलिए 18 हजार इकाईयां सूबे से पलायन कर गईं। सूबे में अफसरशाही पूरी तरह से हावी है। इसका सीधा असर उद्योग जगत पर हो रहा है। इस अवसर पर मनमोहन सिंह उबी समेत कई उद्यमी मौजूद रहे।
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लेट्स पदाधिकारियों ने शुक्रवार को होटल में कांफ्रेंस करके बोर्ड को अल्टीमेटम दिया है कि पांच जून तक नोटिस वापस लिए जाएं, अन्यथा सात जून को सूबे के तमाम औद्योगिक संगठनों की बैठक बुला कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। लेट्स ने चेतावनी दी है कि बोर्ड अधिकारियों को इकाईयों में घुसने नहीं दिया जाएगा और उनका घेराव भी किया जाएगा।
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लेट्स के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर (सीईओ) अवतार सिंह का कहना है कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग से निकल रहे पानी को ट्रीट करने के फोकल प्वाइंट के फेज आठ में कॉमन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाया गया है। जनवरी 2013 में इसमें 898 उद्यमी सदस्य थे अब यह संख्या बढ़ कर 1333 हो गई है। अब 2.85 लाख लीटर पानी रोजाना ट्रीट किया जा रहा है। इस प्लांट को अपग्रेड किया जा रहा है।
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सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदूषण बोर्ड पहले प्लांट के कामकाज से संतुष्ट था। रोजाना बोर्ड के अधिकारी इसे मॉनिटर करते हैं। लेकिन अचानक बोर्ड ने इसके कामकाज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। बीस मई को हुई बैठक में लेट्स पदाधिकारियों को धमकाया गया, नोटिस और मामला दर्ज कराने तक की चेतावनी भी दी गई। इसके बाद 28 मई को ही पदाधिकारियों को बोर्ड का नोटिस मिला है। सिंह ने कहा कि सारी स्थिति से सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर बादल को भी पत्र लिख कर अवगत कराया गया है।
लेट्स के महासचिव और यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान चरणजीत सिंह विश्वकर्मा का कहना है कि लेट्स के सभी पदाधिकारी उद्यमी हैं और अपने कामकाज के साथ-साथ इंडस्ट्री की सेवा में लगे हैं। इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री से प्रदूषण कम करने में इस प्लांट का बड़ा योगदान है। बावजूद इसके बोर्ड अधिकारियों का रवैया बर्दाश्त से बाहर है।
विश्वकर्मा का आरोप है कि बोर्ड के पास 400 इकाईयों की कांसेंट लंबित पड़ी हैं। इस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है। इससे उद्यमी परेशान हैं। इस अवसर पर लेट्स के डायरेक्टर उपकार सिंह ने कहा कि पंजाब में उद्योगपतियों का कोई सम्मान नहीं है, इसलिए 18 हजार इकाईयां सूबे से पलायन कर गईं। सूबे में अफसरशाही पूरी तरह से हावी है। इसका सीधा असर उद्योग जगत पर हो रहा है। इस अवसर पर मनमोहन सिंह उबी समेत कई उद्यमी मौजूद रहे।