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Hindi News ›   Punjab ›   Two Sisters from Tanda Win Elections in Germany Family Celebrates Harpreet Komalpreet Rada Village

टांडा की दो बहनों ने जर्मनी में चुनाव जीता: रड़ा गांव की हरप्रीत और कोमलप्रीत की जीत पर परिजनों में जश्न

Wed, 22 Apr 2026 03:10 PM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, टांडा
संवाद न्यूज एजेंसी, टांडा Published by: Nivedita Updated Wed, 22 Apr 2026 03:10 PM IST
सार

हरप्रीत कौर संधू और कोमलप्रीत कौर ने अपनी जीत की घोषणा फेसबुक पोस्ट के माध्यम से करते हुए सभी समर्थकों का धन्यवाद किया। अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने उन पर विश्वास जताया और समर्थन दिया।

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Two Sisters from Tanda Win Elections in Germany Family Celebrates Harpreet Komalpreet Rada Village
हरप्रीत कौर संधू और कोमलप्रीत कौर - फोटो : संवाद

विस्तार

टांडा के नजदीकी गांव रड़ा की दो सगी बहनों हरप्रीत कौर संधू और कोमलप्रीत कौर ने जर्मनी में स्थानीय चुनाव जीतकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है।

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बड़ी बहन हरप्रीत कौर संधू ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। उन्होंने अपनी जीत की घोषणा फेसबुक पोस्ट के माध्यम से करते हुए सभी समर्थकों का धन्यवाद किया। अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने उन पर विश्वास जताया और समर्थन दिया। उन्होंने विदेशी सलाहकार परिषद और शहरी संसद के सदस्य के रूप में आने वाले पांच वर्षों तक पूरी मेहनत और ईमानदारी से लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का भरोसा दिलाया।
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उन्होंने लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए खास तौर पर पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं का आभार व्यक्त किया और एक मजबूत व प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
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वहीं, गांव में उनके परिजनों और ग्रामीणों में खुशी की लहर है। किसान नेता अमरजीत सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि जब परिवार का कोई सदस्य विदेश में इस तरह की सफलता हासिल करता है, तो पूरे गांव और क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।

30 साल पहले जर्मनी गए थे पिता

उन्होंने बताया कि दोनों बहनों के पिता नरिंदर सिंह संधू करीब 30 साल पहले जर्मनी चले गए थे, जबकि दोनों बेटियां और उनकी माता 12-15 साल पहले वहां गई थीं, जब वे काफी छोटी थीं। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार का गांव से लगातार संपर्क बना हुआ है और वे कोरोना काल से पहले गांव भी आए थे।



अमरजीत सिंह ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि दोनों बहनों की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है और यह अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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