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पंजाब में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मिलेगा बल
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 27 May 2014 11:51 PM IST
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बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल को केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय सौंपे जाने से पंजाब में इस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है।
हालांकि प्रदेश में सबसे बड़ी चुनौती इस इंडस्ट्री में निवेश के लिए माहौल बनाने और सुविधाएं उपलब्ध कराने की रहेगी।
एक अन्य चुनौती यह है कि बीते दिनों हुए प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टमेंट प्रमोशन समिट और एग्रीकल्चर समिट में राज्य सरकार ने जिन कंपनियों के साथ एमओयू साइन किए थे, उन्हें जल्द सिरे चढ़ाना होगा, क्योंकि इनमें से बड़ी संख्या में कंपनियों ने अब तक दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
गत फरवरी माह में सरकार ने एग्रीकल्चर समिट कराया था। उसमें 2600 करोड़ रुपये के 10 एमओयू साइन हुए थे, जो ज्यादातर एग्री और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से संबंधित थे।
इनमें सेंटर ऑफ पोटैटो एक्सपर्टाइज स्थापित करना, मिसेज बेक्टर फूड स्पेशलिटीज के साथ फूड प्रोसेसिंग संबंधित समझौता, केटीसी फूड के समझौता आदि शामिल थे।
पिछले साल सरकार ने प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टमेंट प्रमोशन समिट कराया था। उसमें साइन हुए 12000 करोड़ रुपये के 62 एमओयू भी एग्री और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से संबंधित थे। इनमें आईटीसी और करगिल के प्रोजेक्ट शामिल थे।
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सूत्रों के अनुसार, उक्त दोनों समिट में एमओयू साइन करने वाली अधिकतर कंपनियों ने अब तक प्रोजेक्ट शुरू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
हरसिमरत के लिए ये प्रोजेक्ट शुरू कराना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी। सूत्रों के मुताबिक, हरसिमरत के मंत्री बनते ही सरकार ने फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के विकास के लिए कवायद शुरू कर दी है।
अधिकारियों को इस क्षेत्र में संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।
किसानों का आर्थिक स्तर सुधारना है लक्ष्य : हरसिमरत
केंद्रीय मंत्री का पदभार संभालने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि किसानों को आर्थिक स्तर पर मजबूत करना ही उनका लक्ष्य है। इसके लिए फसलों की प्रोसेसिंग करवाकर उनका मूल्य बढ़ाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। साग, मक्की, लस्सी के लिए विदेशी बाजार में अपार संभावनाएं हैं।
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हालांकि प्रदेश में सबसे बड़ी चुनौती इस इंडस्ट्री में निवेश के लिए माहौल बनाने और सुविधाएं उपलब्ध कराने की रहेगी।
एक अन्य चुनौती यह है कि बीते दिनों हुए प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टमेंट प्रमोशन समिट और एग्रीकल्चर समिट में राज्य सरकार ने जिन कंपनियों के साथ एमओयू साइन किए थे, उन्हें जल्द सिरे चढ़ाना होगा, क्योंकि इनमें से बड़ी संख्या में कंपनियों ने अब तक दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
गत फरवरी माह में सरकार ने एग्रीकल्चर समिट कराया था। उसमें 2600 करोड़ रुपये के 10 एमओयू साइन हुए थे, जो ज्यादातर एग्री और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से संबंधित थे।
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इनमें सेंटर ऑफ पोटैटो एक्सपर्टाइज स्थापित करना, मिसेज बेक्टर फूड स्पेशलिटीज के साथ फूड प्रोसेसिंग संबंधित समझौता, केटीसी फूड के समझौता आदि शामिल थे।
पिछले साल सरकार ने प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टमेंट प्रमोशन समिट कराया था। उसमें साइन हुए 12000 करोड़ रुपये के 62 एमओयू भी एग्री और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से संबंधित थे। इनमें आईटीसी और करगिल के प्रोजेक्ट शामिल थे।
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सूत्रों के अनुसार, उक्त दोनों समिट में एमओयू साइन करने वाली अधिकतर कंपनियों ने अब तक प्रोजेक्ट शुरू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
हरसिमरत के लिए ये प्रोजेक्ट शुरू कराना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी। सूत्रों के मुताबिक, हरसिमरत के मंत्री बनते ही सरकार ने फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के विकास के लिए कवायद शुरू कर दी है।
अधिकारियों को इस क्षेत्र में संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।
किसानों का आर्थिक स्तर सुधारना है लक्ष्य : हरसिमरत
केंद्रीय मंत्री का पदभार संभालने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि किसानों को आर्थिक स्तर पर मजबूत करना ही उनका लक्ष्य है। इसके लिए फसलों की प्रोसेसिंग करवाकर उनका मूल्य बढ़ाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। साग, मक्की, लस्सी के लिए विदेशी बाजार में अपार संभावनाएं हैं।