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पंजाब में तीन कांग्रेस विधायकों समेत नौ और का इस्तीफा

Sun, 05 Jan 2014 03:05 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 05 Jan 2014 03:05 PM IST
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three MLA resignation from Punjab Congress

पंजाब प्रदेश कांग्रेस की हाल ही गठित 319 सदस्यीय नई कार्यकारिणी को लेकर प्रदेश कांग्रेस में शुरू हुई नेताओं की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

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नई कार्यकारिणी में सौंपे गए ओहदों से नेताओं के इस्तीफों का सिलसिला शनिवार चौथे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को छह नेताओं ने और उससे पहले पांच नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफे की घोषणा कर दी थी।
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शनिवार को नौ और नेताओं ने कार्यकारिणी में अपने ओहदों से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में कपूरथला, समराला और खडूर साहिब के विधायक और फालिल्का के पूर्व विधायक भी शामिल हैं।
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कपूरथला से पूर्व जिला प्रधान सहित तीन नेताओं ने इस्तीफे दे दिए जबकि जालंधर और जलालाबाद से भी एक-एक नेता ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसके साथ ही नई कार्यकारिणी के विरोध में इस्तीफे देने वालों की संख्या बीस हो गई है।

इस्तीफा देने वाले सभी नेताओं ने प्रदेश कार्यकारिणी के प्रति विरोध जताया है। कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह, खडूर साहिब से विधायक रमनजीत सिंह सिक्की और समराला के विधायक अमरीक सिंह ढिल्लों ने कार्यकारिणी में मिले पदों को लेकर नाराजगी जताते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की आलोचना की है।

इनके अलावा कपूरथला के पूर्व जिला प्रधान हरजीत सिंह परमार, कैप्टन हरमिंदर सिंह व हरदेव सिंह लाडी, जालंधर के मनोज अरोड़ा और फाजिल्का के पूर्व विधायक मोहिंदर सिंह रिणवा और विधानसभा चुनाव लड़ चुके जलालाबाद के मनजीत सिंह हीरा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि वे पार्टी के वफादार सिपाही के तौर पर काम करते रहेंगे। उन्होंने पीपीसीसी के अलावा हाईकमान को भी अपने इस्तीफे भेजे हैं। क्योंकि प्रदेश कमेटी में पदाधिकारियों का चयन गलत किया गया।


उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने अपने चहेतों को जगह दी। इस बात में अब कोई शक नहीं रह गया कि बाजवा ने हाईकमान को नजरंदाज किया। बाजवा ने गठन से पहले सीनियर नेताओं को विश्वास में लेने के बारे में भी झूठ बोला।

बाजवा ने खुद प्रधान होते हुए अपने भाई को महासचिव बनाया, पत्नी और अन्य सचिवों को विभिन्न पद दिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस समय जब हर कोई लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटा है, बाजवा ने पार्टी को कमजोर किया।

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