{"_id":"d7e3a19a91b1366d635d290d9b7ae6ab","slug":"the-death-of-two-tiger-in-tiger-safari","type":"story","status":"publish","title_hn":"टाइगर सफारी में दो बाघिन की मौत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टाइगर सफारी में दो बाघिन की मौत
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sun, 06 Oct 2013 10:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टाइगर सफारी में पल रहे बाघों को देखने के लिए पंजाब के कोने कोने से जीव प्रेमी आते हैं, लेकिन अब इस सफारी में केवल तीन बाघ ही बचे हैं।
पिछले दो दिनों के दौरान बीमारी के कारण दो बाघिन मोहिनी एवं लैची की मौत हो गई। रविवार को दोनों का ही सफारी में वन अधिकारियों की देखरेख में अंतिम संस्कार कर दिया गया। टाइगर सफारी के इंचार्ज एवं वन विभाग के रेंज अधिकारी गुरमिंदर सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार मोहिनी का निधन चार अक्तूबर को और लैची का निधन पांच अक्तूबर को हुआ। बुजुर्ग मोहिनी की उम्र करीब बीस साल की थी, कुछ दिन पहले उसकी एक युवा बाघ मनी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को लेकर मुठभेड़ हो गई। बाघ ने गुस्से में आकर उसे बुरी तरह से जख्मी कर दिया। इसके बाद उसकी हालत लगातार खराब होती चली गई।
उधर, 17 वर्षीय बाघिन लैची क ो अधरंग की बीमारी थी। वह सही तरीके से चल नहीं पाती थी। वन अधिकारियों का दावा है कि दोनों बाघिन का पूरा इलाज कराया गया। उनके इलाज पर पचास से साठ हजार रुपये तक का खर्च आया है। बावजूद इसके दोनाें को बचाया नहीं जा सका।
विज्ञापन
माहिनी पिछले 18 साल से और लैची पिछले करीब 14 साल से टाइगर सफारी में रह रही थी। दोनों की मौत के बाद अब सफारी में एक दो बाघ एवं सिर्फ एक बाघिन बचे हैं।
अब प्रभारी गुरमिंदर सिंह का कहना है कि टाइगर सफारी में फिर से बाघों की संख्या को बढ़ाने के लिए शीघ्र ही पूरी रणनीति बना कर सरकार को लिखा जाएगा।
विज्ञापन
पिछले दो दिनों के दौरान बीमारी के कारण दो बाघिन मोहिनी एवं लैची की मौत हो गई। रविवार को दोनों का ही सफारी में वन अधिकारियों की देखरेख में अंतिम संस्कार कर दिया गया। टाइगर सफारी के इंचार्ज एवं वन विभाग के रेंज अधिकारी गुरमिंदर सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार मोहिनी का निधन चार अक्तूबर को और लैची का निधन पांच अक्तूबर को हुआ। बुजुर्ग मोहिनी की उम्र करीब बीस साल की थी, कुछ दिन पहले उसकी एक युवा बाघ मनी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को लेकर मुठभेड़ हो गई। बाघ ने गुस्से में आकर उसे बुरी तरह से जख्मी कर दिया। इसके बाद उसकी हालत लगातार खराब होती चली गई।
विज्ञापन
उधर, 17 वर्षीय बाघिन लैची क ो अधरंग की बीमारी थी। वह सही तरीके से चल नहीं पाती थी। वन अधिकारियों का दावा है कि दोनों बाघिन का पूरा इलाज कराया गया। उनके इलाज पर पचास से साठ हजार रुपये तक का खर्च आया है। बावजूद इसके दोनाें को बचाया नहीं जा सका।
विज्ञापन
माहिनी पिछले 18 साल से और लैची पिछले करीब 14 साल से टाइगर सफारी में रह रही थी। दोनों की मौत के बाद अब सफारी में एक दो बाघ एवं सिर्फ एक बाघिन बचे हैं।
अब प्रभारी गुरमिंदर सिंह का कहना है कि टाइगर सफारी में फिर से बाघों की संख्या को बढ़ाने के लिए शीघ्र ही पूरी रणनीति बना कर सरकार को लिखा जाएगा।