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कारोबार में हुआ घाटा तो लगा लिया फंदा
अमर उजाला, मुक्तसर
Updated Mon, 21 Oct 2013 11:26 PM IST
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बागवाली गली निवासी एक फाइनेंस कारोबारी ने जलालाबाद रोड स्थित दफ्तर की छत में फं दा लगाकर खुदकुशी कर ली। खुदकुशी का कारण फाइनेंस के काम में करीब सात-आठ लाख रुपये का घाटा पड़ना बताया जा रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
बागवाली गली में स्थित भाटिया वाली लिंक गली निवासी प्रदीप (31) पुुत्र बलराज भटेजा ने अपने जलालाबाद रोड स्थित फाइनेंस दफ्तर में फंदा लगा लिया। प्रदीप अक्सर शाम को कुछ समय के लिए इस दफ्तर में आता था।
जबकि प्रदीप ने हाल ही में कोटकपूरा रोड बाइपास पर सरकारी कॉलेज के सामने स्थित किराए के होटल में नया काम भी शुरू किया था और रोजाना सुबह साढ़े आठ बजे वहां जाता था, लेकिन सोमवार को सुबह वह जब होटल नहीं पहुंचा तो उसके भाई संदीप ने उसके फोन पर संपर्क करना शुरू किया।
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प्रदीप को ढूंढते-ढूंढते वह फाइनेंस दफ्तर पहुंचा तो वहां मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ था। अंदर से प्रदीप के फोन के बजने की आवाजें आ रही थी। जब उसने किसी तरह से दरवाजे का लॉक तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो देखा कि प्रदीप का शव छत पर फंदे से लटका पड़ा है।
पुलिस को सूचित किया गया और थाना सिटी ने समेत पुलिस पार्टी मौके पर पहुंचकर जांच की। परिजनों के अनुसार प्रदीप को फाइनेंस के कारोबार में पिछले दिनों सात-आठ लाख रुपये का घाटा पड़ा था।
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बागवाली गली में स्थित भाटिया वाली लिंक गली निवासी प्रदीप (31) पुुत्र बलराज भटेजा ने अपने जलालाबाद रोड स्थित फाइनेंस दफ्तर में फंदा लगा लिया। प्रदीप अक्सर शाम को कुछ समय के लिए इस दफ्तर में आता था।
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जबकि प्रदीप ने हाल ही में कोटकपूरा रोड बाइपास पर सरकारी कॉलेज के सामने स्थित किराए के होटल में नया काम भी शुरू किया था और रोजाना सुबह साढ़े आठ बजे वहां जाता था, लेकिन सोमवार को सुबह वह जब होटल नहीं पहुंचा तो उसके भाई संदीप ने उसके फोन पर संपर्क करना शुरू किया।
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प्रदीप को ढूंढते-ढूंढते वह फाइनेंस दफ्तर पहुंचा तो वहां मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ था। अंदर से प्रदीप के फोन के बजने की आवाजें आ रही थी। जब उसने किसी तरह से दरवाजे का लॉक तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो देखा कि प्रदीप का शव छत पर फंदे से लटका पड़ा है।
पुलिस को सूचित किया गया और थाना सिटी ने समेत पुलिस पार्टी मौके पर पहुंचकर जांच की। परिजनों के अनुसार प्रदीप को फाइनेंस के कारोबार में पिछले दिनों सात-आठ लाख रुपये का घाटा पड़ा था।