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राहत: युद्ध के बीच यूक्रेन से सुरक्षित लौटे बच्चे, परिजनों ने किया भारत सरकार का धन्यवाद

Sun, 06 Mar 2022 12:13 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, राजपुरा/जलालाबाद (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, राजपुरा/जलालाबाद (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 06 Mar 2022 12:13 PM IST
सार

जलालाबाद की आरजू ने बताया कि ट्रेन में यूक्रेन निवासियों को पहल दी जा रही थी जबकि भारतीयों को इंतजार करने के लिए कहा जाता था। उसने बताया कि दो दिनों बाद उन्हें ट्रेन मिली और बाद में पोलैंड तक पहुंचे।

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Students of Rajpura and jalalabad returned to Punjab from Ukraine 
यूक्रेन से लौटी राजपुरा की जसप्रीत कौर का स्वागत करते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

यूक्रेन रूस के बीच चल रहे युद्ध के भयावह मंजर से निकलकर पोलैंड के रास्ते घनौर के गांव उलाणा की जसप्रीत कौर शनिवार दोपहर एयरफोर्स के विमान से भारत के गाजियाबाद हिंडन एयरपोर्ट पर पहुंचीं। उनके वतन लौटते ही सारे परिवार में खुशी छा गई। परिवार वालों ने बेटी का मुंह मीठा करवाने के बाद दिल्ली के गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका। जसप्रीत के पिता बिंदरपाल सिंह ने बेटी को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने पर भारत सरकार का धन्यवाद किया और वहां पर मौजूद लोगों में लड्डू बांटकर खुशी का इजहार किया। 

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जसप्रीत कौर ने बताया कि वह यूक्रेन के खारकीव में भयावह युद्ध के मंजर और बमबारी के बीच में से पोलैंड पहुंची। उसने बताया कि नवंबर-2021 को यूक्रेन की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव में डाक्टरी की शिक्षा ग्रहण करने गई थी कि तीन माह बाद रूस-यूक्रेन सेना के बीच युद्ध छिड़ गया। 
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सबसे ज्यादा प्रभावित राजधानी कीव और खारकीव में रहे। जसप्रीत ने बताया कि जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से उन्हें यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में नागरिकों के लिए बने बंकरों में रखा गया था लगातार सात दिनों तक उसने दहशत में बिताए जहां पर दो से तीन दिन तक वह कुछ भी नहीं खा पी सकी थी। हमें बताया गया था कि चारों तरफ चल रही बमबारी से रास्ते बंद हैं जबकि मेरे साथ भारतीय दोस्त होने से मुझे कुछ राहत भी महसूस होती रही। जसप्रीत की वापसी से सभी परिवारों में आशा की किरण जागी है कि यूक्रेन में रह रहे उनके बच्चे जल्द ही उनकी आंखों के सामने होंगे।

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जलालाबाद: चक्क चुक्कड़ की बेटी के घर लौटने पर माता-पिता ने चैन की ली सांस

यूक्रेन में जंग छिड़ जाने के कारण वहां पढ़ाई के लिए गए बच्चों के अभिभावक चिंतित हैं और जो बच्चे वापस आ रहे हैं उनके घर पहुंचने पर माता पिता चैन की सांस ले रहे हैं। संघर्ष के बीच वापस लौटी गांव चक्क सुक्कड़ आरजू ने बताया कि यूक्रेन में माहौल काफी खराब है। उसने बताया कि पिछले चार वर्षों से डाक्टरी की पढ़ाई के लिए यूक्रेन में रह रही थी। अब वहां रहना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि वहां खाने पीने का कोई प्रबंध नहीं है और सरकारें भी उनकी मदद नहीं कर रही हैं।



आरजू ने बताया कि ट्रेन में यूक्रेन निवासियों को पहल दी जा रही थी जबकि भारतीयों को इंतजार करने के लिए कहा जाता था। उसने बताया कि दो दिनों बाद उन्हें ट्रेन मिली और बाद में पोलैंड तक पहुंचे। आरजू ने भारत सरकार से यह मांग की कि वहां फंसे भारतीय बच्चों को वापस लाने का प्रबंध जल्दी किया जाए। साथ ही उनके खाने पीने का प्रबंध भी किया जाए, जिससे कि वे सकुशल अपने देश भारत में अपने परिवारों के पास पहुंच सकें। 

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