Doctors Strike in Punjab: दूसरे दिन भी डाॅक्टरों की हड़ताल जारी, मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी
सुबह सात बजे से ही पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को लाइनें लगने लगी, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल थे। कुछ मरीज ऐसे थे जो आस-पास से आए थे, वे घर लौट गए। लेकिन कुछ मरीज दूर से आए थे, उन्हें मजबूरन 11 बजने का इंतजार करना पड़ा।
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सुबह 8 से 11 बजे तक ओपीडी में डॉक्टर बैठे तो सही, लेकिन किसी मरीज की नई पर्ची 11 बजे तक न कटने के कारण, डॉक्टर केवल वार्ड में भर्ती मरीजों को ही देख रहे थे। वहीं सुबह सात बजे से ही पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को लाइनें लगने लगी, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल थे। कुछ मरीज ऐसे थे जो आस-पास से आए थे, वे घर लौट गए। लेकिन कुछ मरीज दूर से आए थे, उन्हें मजबूरन 11 बजने का इंतजार करना पड़ा।
इसके साथ वहीं पीसीएमएसए के डॉक्टर अपनी मांगो के लिए अस्पताल ओपीडी के बाहर प्रदर्शन करते हुए नजर आए। वहां बैठे मरीज भी डॉक्टरों की मांग पर बोले कि सरकार को डॉक्टरों की मांगों को जल्द पूरा करना चाहिए।
वहीं, पंजाब के पटियाला के सरकारी माता कौशल्या अस्पताल के साथ-साथ नाभा, समाना व राजपुरा के सिविल अस्पतालों में मंगलवार को दूसरे दिन डाॅक्टरों की हड़ताल के कारण मरीज परेशान रहे। डाॅक्टरों ने सुबह आठ बजे से लेकर 11 बजे तक कामकाज का बायकाट किया। जिसके चलते ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइनें लग गईं। वहीं डाॅक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों के आपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को ऑपरेशन के लिए आगे की तारीखें दी जा रही हैं।
पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेस एसोसिएशन की पटियाला इकाई के प्रधान डाॅ. सुमित सिंह ने बताया कि एसोसिएशन ने पहले तीन दिन सुबह 8 बजे से लेकर 11 बजे तक हड़ताल करने का फैसला लिया है। इसके तहत बुधवार को भी इसी तरह से तीन घंटों के लिए डाॅक्टर कामकाज का बायकाट करेंगे। वहीं इस आंदोलन के दूसरे चरण में 12 सितंबर से पूरे समय के लिए सभी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। केवल इमरजेंसी सेवाएं ही बहाल रखी जाएंगी। इसलिए सरकार से मांग है कि डाॅक्टरों की मांगों का जल्द से जल्द हल किया जाए।एसोसिएशन ने अस्पतालों में डाॅक्टरों की समयबद्ध तरक्की न होने का विरोध किया। एसोसिएशन ने सवाल किया कि क्या डाॅक्टरों की पदोन्नितयां रोककर सरकार अस्पतालों को खत्म करना चाहती है। डाॅ. सुमित सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार के ही दूसरे विभाग चिकित्सा शिक्षा व शोध में डाॅक्टरों को 4 व 7 साल पर तरक्की दी जा रही है, फिर सबसे जरूरी सेहत विभाग की तरक्की पर ग्रहण क्यों लगाया जा रहा है। इस मौके पर अस्पतालों में डाॅक्टरों की सुरक्षा के अभी तक कोई पुख्ता प्रबंध न किए जाने का भी विरोध किया गया। डाॅ, सुमित सिंह ने कहा कि बीते दिन ही मोहाली में एक गर्भवती डाॅक्टर पर ड्यूटी के दौरान हमला किया गया है। इसलिए मांग है कि सेहत मंत्री केवल दावों के बजाय अस्पतालों में डाॅक्टरों की सुरक्षा के लिए जमीनी स्तर पर प्रबंध करें।