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पंजाब: 15 साल से नशे के खिलाफ जंग लड़ रहे पूर्व डीजीपी शशिकांत, कहा-पंजाब में क्रांति की जरूरत
Sat, 23 Apr 2022 03:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 23 Apr 2022 03:47 PM IST
सार
शशिकांत वह अधिकारी हैं, जिन्होंने दस साल पहले पंजाब में भूचाल ला दिया था। शशिकांत तब डीजीपी जेल थे। शशिकांत ने कहा था कि ड्रग माफिया की ओर से धमकियां मिल रही हैं।
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पूर्व डीजीपी शशिकांत
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब के रिटायर्ड डीजीपी शशिकांत एक ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें पंजाब में नशे के खिलाफ व्हीसल ब्लोअर कहा जाता है। वे 15 साल से नशे के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत तभी से कर दी थी, जब वह पंजाब में बतौर डीजीपी तैनात थे।
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शशिकांत कहते हैं कि वर्ष 2007 से नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं। मैं उजड़ भी गया, पर अपना मिशन नहीं छोड़ा। पंजाब के लोग चढ़दी कलां की बात करते हैं, क्या वाकई वे चढ़दी कलां में हैं? गांवों का युवा तबाह हो चुका है। अगर पंजाबी खुद को बचाना चाहते हैं तो अपनी ऑर्गेनाइजेशन बनाएं। भ्रष्ट तंत्र पर नकेल डालें। पंजाब में नशा अभी भी बहुत है, फर्क सिर्फ इतना है कि तस्करों ने अपना रूट बदल लिया है। हेरोइन में केमिकल नशा मिक्स होकर बिकने लगा है। हिमाचल की सरकार ने आगाह भी किया है कि पंजाब से जो नशा बिकने के लिए आ रहा है, वह मिक्स है और जानलेवा है। बड़ी तस्करी में कुछ कंट्रोल हो गया है लेकिन तस्करों ने रास्ता बदल लिया है।
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उन्होंने बताया कि गुजरात बंदरगाह से नशे की खेप पकड़ी गई उसके तार पंजाब से जुड़े हुए थे। बर्मा से नशा आ रहा है, यानी नशा खत्म नहीं हुआ है जमीनी हकीकत आज भी वही है। कमी सिस्टम में है, जेल से लेकर गांवों में नशा बिक रहा है। अकेले पुलिस कुछ नहीं कर सकेगी, इसके लिए सांझा फ्रंट बनाना होगा जिसमें युवाओं के संगठन को शरीक करना होगा। सेहत विभाग, पुलिस, स्कूल, कॉलेज के संगठन सब मिलकर जंग का आह्वान करें तो नशा पंजाब से निकल सकता है। यह कहने में गुरेज नहीं है कि पंजाब में किसी सरकार ने संजीदगी से काम नहीं किया है। अब नई सरकार बनी है लोगों को काफी उम्मीदें हैं और इस पर सरकार को खरा भी उतरना होगा।
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शशिकांत वह अधिकारी हैं, जिन्होंने दस साल पहले पंजाब में भूचाल ला दिया था। शशिकांत तब डीजीपी जेल थे। शशिकांत ने कहा था कि ड्रग माफिया की ओर से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि महज छोटे तस्करों को पकड़ कर पुलिस मामलों को ठंडे बस्ते में डाल देती है और ड्रग माफिया से जुड़े बड़े नामों तक नहीं पहुंच पाती। अब बहुत देर हो गई। समय रहते कार्रवाई की जाती तो आज ये हालात न होते। पुलिस की इस कार्रवाई में राहत की बात केवल इतनी है कि यह पूरी तरह से खानापूर्ति नहीं है। कुछ फीसदी गंभीर काम हुआ है, लेकिन ज्यादा नहीं। छोटी-छोटी मछलियों को पकड़ा गया है, जबकि बीमारी तो मगरमच्छों को पकड़ने से खत्म होगी।