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परनीत को घेरने की तैयारी, पटियाला में बिछी चुनावी बिसात
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 10 Mar 2014 08:43 AM IST
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सभी प्रमुख पार्टियों द्वारा लोक सभा उम्मीदवारों के ऐलान के साथ पटियाला में चुनावी बिसात बिछ गई है।
दिल्ली चुनाव में सबको हैरान करने वाली आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले यहां से डॉ. धर्मवीर गांधी को प्रत्याशी घोषित किया था। फिर अकाली दल ने दीपइंदर ढिल्लों को उम्मीदवार बनाया।
शनिवार को कांग्रेस ने भी पहली लिस्ट में परनीत कौर को फिर से उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर दिया है। जिससे हलके में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
पटियाला हलका कांग्रेस का गढ़ रहा है, परनीत कौर लगातार तीन बार यहां से जीतती आ रही हैं।
हलके के लोगों की जबान पर एक ही बात है कि इस बार परनीत कौर की राह आसान नहीं होगी।
इस बार मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है। अकाली दल ने परनीत कौर के खास सिपहसालार रहे दीपइंदर ढिल्लों को मैदान में उतारा है।
ढिल्लों साफ छवि के हैं, नया उम्मीदवार होने और पार्टी की सख्ती के कारण पटियाला के सभी अकाली गुट इस बार एकजुट होकर उनके साथ चल रहे हैं।
रविवार को उनके चुनावी दफ्तर के उद्घाटन में रखड़ा, टोहड़ा, चंदूमाजरा और कैप्टन कंवलजीत गुटों के लोग पहुंचे थे। उधर, आप के उम्मीदवार डॉ. गांधी भी पटियाला की चुनावी जंग को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं।
पेशे से डॉक्टर लंबे अरसे से समाजसेवा में लगे हैं। पार्टी की सदस्यता मुहिम को भी पटियाला में सबसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।
शहरी वोटरों में पार्टी तेजी से पैठ बना रही है। पटियाला के साक्षर वोटरों (90 फीसदी पुरुष, 83 फीसदी महिलाएं) पर सबकी नजरें रहेंगी। बसपा ने राम सिंह धीमान को उम्मीदवार घोषित कर काम शुरू कर दिया था।
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कांग्रेस पटियाला, शिअद डेराबस्सी में मजबूत
चंडीगढ़। कांग्रेस इस बार भी अपने परंपरागत किलों पटियाला, पटियाला रूरल पर ज्यादा निर्भर करेगी। पटियाला से कैप्टन अमरिंदर 42 हजार और पटियाला रूरल से ब्रह्म मोहिंद्रा 27 हजार वोटों से जीते थे।
इसके अलावा नाभा और राजपुरा में कांग्रेस मजबूत है। पर सनौर के कांग्रेस विधायक लाल सिंह के समीकरण कैप्टन परिवार के साथ ठीक नहीं चल रहे हैं।
उधर, अकालियों का भरोसा डेराबस्सी हलके पर है। पिछले चुनाव में एनके शर्मा यहां से जीते थे, जबकि, दीपइंदर ढिल्लों ने आजाद चुनाव लड़ कर दूसरा स्थान हासिल किया था।
कांग्रेस का सुरक्षित किला रहा पटियाला
चंडीगढ़। पटियाला हलका कांग्रेस का सुरक्षित किला रहा है।
अब तक दस बार कांग्रेस उम्मीदवार यहां से जीते हैं। जिनमें पांच बार पटियाला राजघराने का कब्जा रहा।
अकाली दल ने पहली बार 1977 में यहां जीत का स्वाद चखा।
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दिल्ली चुनाव में सबको हैरान करने वाली आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले यहां से डॉ. धर्मवीर गांधी को प्रत्याशी घोषित किया था। फिर अकाली दल ने दीपइंदर ढिल्लों को उम्मीदवार बनाया।
शनिवार को कांग्रेस ने भी पहली लिस्ट में परनीत कौर को फिर से उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर दिया है। जिससे हलके में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
पटियाला हलका कांग्रेस का गढ़ रहा है, परनीत कौर लगातार तीन बार यहां से जीतती आ रही हैं।
हलके के लोगों की जबान पर एक ही बात है कि इस बार परनीत कौर की राह आसान नहीं होगी।
इस बार मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है। अकाली दल ने परनीत कौर के खास सिपहसालार रहे दीपइंदर ढिल्लों को मैदान में उतारा है।
ढिल्लों साफ छवि के हैं, नया उम्मीदवार होने और पार्टी की सख्ती के कारण पटियाला के सभी अकाली गुट इस बार एकजुट होकर उनके साथ चल रहे हैं।
रविवार को उनके चुनावी दफ्तर के उद्घाटन में रखड़ा, टोहड़ा, चंदूमाजरा और कैप्टन कंवलजीत गुटों के लोग पहुंचे थे। उधर, आप के उम्मीदवार डॉ. गांधी भी पटियाला की चुनावी जंग को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं।
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पेशे से डॉक्टर लंबे अरसे से समाजसेवा में लगे हैं। पार्टी की सदस्यता मुहिम को भी पटियाला में सबसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।
शहरी वोटरों में पार्टी तेजी से पैठ बना रही है। पटियाला के साक्षर वोटरों (90 फीसदी पुरुष, 83 फीसदी महिलाएं) पर सबकी नजरें रहेंगी। बसपा ने राम सिंह धीमान को उम्मीदवार घोषित कर काम शुरू कर दिया था।
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कांग्रेस पटियाला, शिअद डेराबस्सी में मजबूत
चंडीगढ़। कांग्रेस इस बार भी अपने परंपरागत किलों पटियाला, पटियाला रूरल पर ज्यादा निर्भर करेगी। पटियाला से कैप्टन अमरिंदर 42 हजार और पटियाला रूरल से ब्रह्म मोहिंद्रा 27 हजार वोटों से जीते थे।
इसके अलावा नाभा और राजपुरा में कांग्रेस मजबूत है। पर सनौर के कांग्रेस विधायक लाल सिंह के समीकरण कैप्टन परिवार के साथ ठीक नहीं चल रहे हैं।
उधर, अकालियों का भरोसा डेराबस्सी हलके पर है। पिछले चुनाव में एनके शर्मा यहां से जीते थे, जबकि, दीपइंदर ढिल्लों ने आजाद चुनाव लड़ कर दूसरा स्थान हासिल किया था।
कांग्रेस का सुरक्षित किला रहा पटियाला
चंडीगढ़। पटियाला हलका कांग्रेस का सुरक्षित किला रहा है।
अब तक दस बार कांग्रेस उम्मीदवार यहां से जीते हैं। जिनमें पांच बार पटियाला राजघराने का कब्जा रहा।
अकाली दल ने पहली बार 1977 में यहां जीत का स्वाद चखा।