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अब टैंक के पुर्जे भी बनाने लगा लुधियाना
राजीव शर्मा /अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 21 Jan 2014 10:23 PM IST
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लुधियाना के उद्योग लड़ाकू विमानों के कलपुर्जों के निर्माण के बाद अब भारतीय सेना में इस्तेमाल हो रहे विदेशी टैंकों के कलपुर्जे भी बनाने लगे हैं। शहर की प्रतिष्ठित ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनी रजनीश इंडस्ट्रीज को सेना ने अपने विदेशी टैंक ों के पुर्जे बनाने का आर्डर दिया है।
कंपनी ने कलपुर्जों की आपूर्ति भी शुरू कर दी है। फिलहाल कंपनी द्वारा टैंकों के केवल तीन पुर्जे ही बनाकर सप्लाई किए जा रहे हैं। संभवत: पंजाब में टैंकों के कलपुर्जे बनाने वाली यह पहली कंपनी है।
सेना ने कंपनी से अन्य सात-आठ कलपुर्जों के बारे में भी जानकारी हासिल की है। इस बारे में अभी फैसला नहीं हुआ है। ड्राइंग और अन्य डिजाइन प्रोसेस पूरा करने के बाद कंपनी इन कलपुर्जों के सैंपल तैयार कर सेना को भेजेगी। उसके बाद आर्डर मिलने पर अन्य कपपुर्जों की आपूर्ति भी संभव हो पाएगी। यह जानकारी कंपनी के चेयरमैन रजनीश अहूजा ने दी।
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उन्होंने बताया कि एयरफोर्स और थल सेना के बाद अब कंपनी का फोकस नेवी में इस्तेमाल होने वाले विशेष वाहनों के कलपुर्जे बनाने की तरफ है। इसके लिए होम वर्क किया जा रहा है। रजनीश इंडस्ट्री ने वर्ष 2013 में एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों के कलपुर्जे बनाने का आर्डर हासिल किया था। कंपनी लड़ाकू विमानों के तकरीबन दस कलपुर्जे बनाकर वायु सेना को उपलब्ध करा रही है। इस सफलता से उत्साहित कंपनी ने अब डिफेंस के अन्य उपकरणों के कलपुर्जों के निर्माण की ओर ध्यान देना शुरू किया है।
देश में विकसित कलपुर्जे कई गुना सस्ते
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल आहूजा ने कहा कि भारतीय सेना के पास विदेशी टैंक हैं। इनमें के लिए कलपुर्जों की जरूरत पड़ने पर पहले तो सेना विदेश से ही पुर्जें मंगवाती थी, लेकिन अब इन्हें देश में ही विकसित कराया जा रहा है। इससे पुर्जे कई गुना सस्ते पड़ते हैं और क्वालिटी विदेशी कलपुर्जों के समान रहती है।
विदेशी कंपनियों से कम नहीं
आहूजा ने कहा कि थल सेना और एयरफोर्स के साथ काम करने का मकसद यही है कि भारतीय कंपनियां भी विदेशी कंपनियों के मुकाबले किसी लिहाज से कम नहीं हैं। उनका दावा है कि टैंक के विशेष पुर्जे बनाने वाली रजनीश इंडस्ट्री पंजाब की एकमात्र इकाई है।
टैंक के पुर्जे बनाने वाला स्टील पांच लाख रुपये प्रति टन
लुधियाना। कार, ट्रक और अन्य पैसेंजर व व्यवसायिक ऑटो पार्ट्स बनाने के लिए सामान्य स्टील की कीमत करीब 45 हजार रुपये प्रति टन है। लेकिन सेना में इस्तेमाल हो रहे विदेशी टैंकों के पुर्जे विशेष स्टील से बनाए जा रहे हैं। इस विशेष स्टील की कीमत पांच लाख रुपये प्रति टन है। रजनीश आहूजा ने कहा कि यह स्टील डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले स्टील प्लांटों से खास तौर पर आ रहा है।
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कंपनी ने कलपुर्जों की आपूर्ति भी शुरू कर दी है। फिलहाल कंपनी द्वारा टैंकों के केवल तीन पुर्जे ही बनाकर सप्लाई किए जा रहे हैं। संभवत: पंजाब में टैंकों के कलपुर्जे बनाने वाली यह पहली कंपनी है।
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सेना ने कंपनी से अन्य सात-आठ कलपुर्जों के बारे में भी जानकारी हासिल की है। इस बारे में अभी फैसला नहीं हुआ है। ड्राइंग और अन्य डिजाइन प्रोसेस पूरा करने के बाद कंपनी इन कलपुर्जों के सैंपल तैयार कर सेना को भेजेगी। उसके बाद आर्डर मिलने पर अन्य कपपुर्जों की आपूर्ति भी संभव हो पाएगी। यह जानकारी कंपनी के चेयरमैन रजनीश अहूजा ने दी।
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उन्होंने बताया कि एयरफोर्स और थल सेना के बाद अब कंपनी का फोकस नेवी में इस्तेमाल होने वाले विशेष वाहनों के कलपुर्जे बनाने की तरफ है। इसके लिए होम वर्क किया जा रहा है। रजनीश इंडस्ट्री ने वर्ष 2013 में एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों के कलपुर्जे बनाने का आर्डर हासिल किया था। कंपनी लड़ाकू विमानों के तकरीबन दस कलपुर्जे बनाकर वायु सेना को उपलब्ध करा रही है। इस सफलता से उत्साहित कंपनी ने अब डिफेंस के अन्य उपकरणों के कलपुर्जों के निर्माण की ओर ध्यान देना शुरू किया है।
देश में विकसित कलपुर्जे कई गुना सस्ते
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल आहूजा ने कहा कि भारतीय सेना के पास विदेशी टैंक हैं। इनमें के लिए कलपुर्जों की जरूरत पड़ने पर पहले तो सेना विदेश से ही पुर्जें मंगवाती थी, लेकिन अब इन्हें देश में ही विकसित कराया जा रहा है। इससे पुर्जे कई गुना सस्ते पड़ते हैं और क्वालिटी विदेशी कलपुर्जों के समान रहती है।
विदेशी कंपनियों से कम नहीं
आहूजा ने कहा कि थल सेना और एयरफोर्स के साथ काम करने का मकसद यही है कि भारतीय कंपनियां भी विदेशी कंपनियों के मुकाबले किसी लिहाज से कम नहीं हैं। उनका दावा है कि टैंक के विशेष पुर्जे बनाने वाली रजनीश इंडस्ट्री पंजाब की एकमात्र इकाई है।
टैंक के पुर्जे बनाने वाला स्टील पांच लाख रुपये प्रति टन
लुधियाना। कार, ट्रक और अन्य पैसेंजर व व्यवसायिक ऑटो पार्ट्स बनाने के लिए सामान्य स्टील की कीमत करीब 45 हजार रुपये प्रति टन है। लेकिन सेना में इस्तेमाल हो रहे विदेशी टैंकों के पुर्जे विशेष स्टील से बनाए जा रहे हैं। इस विशेष स्टील की कीमत पांच लाख रुपये प्रति टन है। रजनीश आहूजा ने कहा कि यह स्टील डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले स्टील प्लांटों से खास तौर पर आ रहा है।