पंजाब: बेरोजगारों को 3000 रुपये भत्ते की घोषणा कर सकते हैं केजरीवाल, कांग्रेस में मचे बवाल से खुश है पार्टी!
पार्टी उत्तराखंड की हर विधानसभा सीट पर बेरोजगार यात्रा निकाल रही है और अपने वादों को युवाओं को याद दिला रही है। बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा के बाद पंजाब में भी बेरोजगारी यात्रा निकालने पर विचार किया जा सकता है। छह फीसदी बेरोजगारी वाले पंजाब में केजरीवाल का यह नुस्खा अपना असर छोड़ सकता है...
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अरविंद केजरीवाल ने बेरोजगारों के लिए बेरोजगारी भत्ता देने को अपना प्रमुख चुनावी हथियार बना लिया है। वे उत्तराखंड के युवाओं को सत्ता में आने पर छह महीने के अंदर एक लाख सरकारी नौकरी का वादा कर चुके हैं। नौकरी न मिलने तक हर बेरोजगार को पांच हजार रुपये प्रति माह भत्ता देने की घोषणा कर रखी है। इसी प्रकार वे गोवा में सत्ता में आने पर बेरोजगारों को तीन हजार रुपये प्रति माह बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा कर चुके हैं। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल पंजाब के अपने दो दिवसीय दौरे पर पंजाब के युवाओं को भी न्यूनतम 3000 रुपये प्रति माह भत्ता देने के साथ-साथ किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा कर सकते हैं। कांग्रेस में मची अंतर्कलह के बीच आम आदमी पार्टी पंजाब में अपने लिए बेहतर संभावना देख रही है।
आम आदमी पार्टी पंजाब के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने युवाओं को ताकत देने को अपनी सबसे प्रमुख रणनीति बना रखी है। दिल्ली में भी वे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर सबसे ज्यादा योजनाएं लांच कर चुके हैं तो उन्हें रोजगार देने के लिए भी विभिन्न स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अपनी पंजाब यात्रा के दौरान यहां के युवाओं को भी भत्ता देने की घोषणा कर सकते हैं।
पार्टी उत्तराखंड की हर विधानसभा सीट पर बेरोजगार यात्रा निकाल रही है और अपने वादों को युवाओं को याद दिला रही है। बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा के बाद पंजाब में भी बेरोजगारी यात्रा निकालने पर विचार किया जा सकता है। छह फीसदी बेरोजगारी वाले पंजाब में केजरीवाल का यह नुस्खा अपना असर छोड़ सकता है।
कांग्रेस की अंतर्कलह से उम्मीद
आम आदमी पार्टी इस विधानसभा चुनाव में पंजाब में अपने लिए बेहतर संभावना देख रही है। पिछली बार भी वह सत्ता की प्रबल दावेदार थी, लेकिन पार्टी के ही कुछ नेताओं के असंतुष्ट हो जाने और कांग्रेस के एक सीमा से आगे जाकर लोगों के लिए वादे करने से आम आदमी पार्टी की संभावनाएं खत्म हो गईं। लेकिन पार्टी मान रही है कि इस बार स्थिति उसके अनुकूल है।
एक तरफ तो उसके आंतरिक संगठन में पूरे नेता एकजुट हैं और सभी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में भरोसा रखते हुए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रहे हैं तो दूसरी ओर सत्ता की दूसरी प्रमुख दावेदार कांग्रेस अपनी अंतर्कलह से जूझ रही है। माना जा रहा है कि चुनाव के समय भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू गुट एक-दूसरे के विरोध में काम करना जारी रह सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस की आपसी फूट का लाभ आम आदमी पार्टी को मिल सकता है।
अपनी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
आम आदमी पार्टी पंजाब में अपनी जीत के लिए केवल कांग्रेस की फूट या अकाली दल के भ्रष्टाचार के आरोप पर निर्भर नहीं कर रही है, उसने पंजाब को जीतने के लिए अपने स्तर पर रणनीति बना रखी है। उसका मानना है कि अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब में 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने और किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा बेहद कारगर साबित हो सकती है। पार्टी अपने तरकश से और चुनावी तीर निकालकर पंजाब में अपनी जीत सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी और अरविंद केजरीवाल की दो दिवसीय यात्रा इसी रणनीति का परिणाम है।