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हड़ताल से पटियाला में 600 करोड़ का बैंकिंग कारोबार प्रभावित
पटियाला
Updated Wed, 01 Mar 2017 03:08 PM IST
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पटियाला में एसबीओपी के हेडआफिस में रोष प्रदर्शन करते बैंक मुलाजिम व अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को पटियाला के करीब 2000 बैंक अधिकारी व मुलाजिम हड़ताल पर रहे। एसके गौतम के मुताबिक हड़ताल के कारण जिले के प्राइवेट व सरकारी बैंकों में करीब 600 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
बैंकों में हड़ताल के कारण न तो ग्राहकों को नगदी का भुगतान हो सका और न ही चेकों की क्लीयरेंस हो सकी। बैंकों में हर तरह का लेन-देन ठप रहा। ज्यादातर एटीएम ड्राई रहे। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह हड़ताल केंद्र सरकार के जनविरोधी बैंकिंग सुधारों के विरुद्ध थी। इस मौके पर एसबीओपी के शेरां वाला गेट स्थित हेडआफिस में बैंक मुलाजिमों व अधिकारियों ने जोरदार रोष प्रदर्शन भी किया।
एसके गौतम संयुक्त सचिव एआईबीईए ने बैंकों के मर्जर का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारी हितों का हनन होगा। उन्होंने कर्मचारियों की पेंडिंग पड़ी वेज रिवीजन को लागू करने की मांग की। साथ ही उन्होंनेे कहा कि बैंकिंग उद्योग में नियमित कार्यों को आउटसोर्स करने का हर प्रयास किया जा रहा है। यह जोखिम से भरा है।
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विनोद शर्मा, संयुक्त सचिव, एआईबीओए ने कहा कि विमुद्रीकरण के कार्यान्वयन और इसके प्रभाव हर किसी को ज्ञात हैं। अफसोस की बात है कि दिन और रात की कड़ी मेहनत के बावजूद जहां बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों को कई बार कैश न होने पर ग्राहकों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। वहीं उनसे अतिरिक्त घंटों में काम लेने के बावजूद इसका कोई पैसा नहीं मिल रहा है।
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बैंकों में हड़ताल के कारण न तो ग्राहकों को नगदी का भुगतान हो सका और न ही चेकों की क्लीयरेंस हो सकी। बैंकों में हर तरह का लेन-देन ठप रहा। ज्यादातर एटीएम ड्राई रहे। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यह हड़ताल केंद्र सरकार के जनविरोधी बैंकिंग सुधारों के विरुद्ध थी। इस मौके पर एसबीओपी के शेरां वाला गेट स्थित हेडआफिस में बैंक मुलाजिमों व अधिकारियों ने जोरदार रोष प्रदर्शन भी किया।
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एसके गौतम संयुक्त सचिव एआईबीईए ने बैंकों के मर्जर का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारी हितों का हनन होगा। उन्होंने कर्मचारियों की पेंडिंग पड़ी वेज रिवीजन को लागू करने की मांग की। साथ ही उन्होंनेे कहा कि बैंकिंग उद्योग में नियमित कार्यों को आउटसोर्स करने का हर प्रयास किया जा रहा है। यह जोखिम से भरा है।
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विनोद शर्मा, संयुक्त सचिव, एआईबीओए ने कहा कि विमुद्रीकरण के कार्यान्वयन और इसके प्रभाव हर किसी को ज्ञात हैं। अफसोस की बात है कि दिन और रात की कड़ी मेहनत के बावजूद जहां बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों को कई बार कैश न होने पर ग्राहकों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। वहीं उनसे अतिरिक्त घंटों में काम लेने के बावजूद इसका कोई पैसा नहीं मिल रहा है।