{"_id":"66c0d6e6770de5c5b50f449e","slug":"this-time-there-was-less-rain-in-punjab-during-monsoon-patiala-news-c-284-1-ptl1001-5316-2024-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Patiala News: पंजाब में इस बार मानसून में कम बारिश, धान की फसलें प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Patiala News: पंजाब में इस बार मानसून में कम बारिश, धान की फसलें प्रभावित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कईं जिलों में वायरस की चपेट में आईं फसलें, हुईं बौनेपन का शिकार
माहिरों ने बारिश की कमी व अधिक उमस भरी गर्मी पड़ने को बताया कारण
जुलाई में सामान्य से 44 फीसदी, तो अगस्त में अब तक 9 फीसदी कम बारिश दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब में इस बार मौसम विभाग की भविष्यवाणी के विपरीत बारिश अब तक सामान्य से कम रही है। जुलाई में सामान्य से 44 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब अगस्त भी मानसून के लिहाज से अधिक अच्छा नहीं जा रहा है। अब तक सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश ही दर्ज की गई है। इसका असर धान की फसलों पर पड़ा है। पंजाब के कईं जिलों में धान की फसलें एक नए वायरस की चपेट में आई हैं, जिससे फसलें बौनेपन का शिकार हो रही हैं। इस रोग से झाड़ कम होने की आशंका जताई जा रही है। खेतीबाड़ी माहिर इसका कारण बारिश की कमी और अधिक उमस भरी गर्मी को मान रहे हैं। हालांकि पंजाब खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह का कहना है कि यह रोग पंजाब के कुछ जिलों में धान की फसलों में पाया गया है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी कर दी है कि किन कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करके काबू पाया जा सकता है। साथ ही बताया कि जैसे ही रोग के संबंध में किसानों की तरफ से शिकायतें मिलीं, तुरंत पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना की टीम की ओर से प्रभावित इलाकों में सैंपल लिए गए। जांच में वायरस रोग की पुष्टि हो गई है। इसके बाद उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक भारत में पहली बार 2022 में धान की फसलों में यह वायरस रोग पाया गया था। यह रोग धान में चिट्ठी पीठ वाले टिड्डे के जरिये फैलता है और धान की मौजूदा सभी किस्मों पर हमला कर सकता है। इस रोग से प्रभावित धान के पौधे बौने, उनके पत्ते नोकदार व जड़ें कम गहरी रह जाती हैं। प्रभावित पौधों की ऊंचाई आम पौधों की तुलना में आधी या एक तिहाई रह जाती है। रोग के ज्यादा हमले के कारण कईं बार पौधे मुरझा कर सूख भी जाते हैं। इस साल पंजाब के विभिन्न जिलों जैसे रोपड़, मोहाली, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब में धान की फसलों के लिए कईं सैंपलों में से कुछ में यह रोग वाला वायरस पाया गया है। गौरतलब है कि पंजाब में इस बार 32 लाख हेक्टेयर रकबे पर धान की फसलें लगाई गई हैं। विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह के मुताबिक प्रभावित जिलों में कहीं-कहीं कुछ रकबा वायरस रोग की चपेट में आया है। सर्वे के बाद ही प्रभावित रकबे के बारे में सही से पता लग पाएगा।
बंगाल की खाड़ी में नहीं बनी हवाएं
मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक बंगाल की खाड़ी काफी कमजोर रही। वहां अच्छे से हवाएं बन नहीं पाईं। जिस कारण पंजाब में मानसून खास तौर से जुलाई में कमजोर ही रहा है। इसके साथ ही इस बार मानसून में अब तक पंजाब में कोई पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय नहीं हुआ। इससे ज्यादा बारिश हो सकती थी। डायरेक्टर ने भी माना कि उमस भरी इस गर्मी में फसलों को बीमारियां होने का खतरा बढ़ा है। उन्होंने माना कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में अनिश्चितता आ रही है। इस बार संभावना के विपरीत मानसून अच्छा नहीं जा रहा है। जबकि पिछले साल उम्मीद के विपरीत जुलाई में काफी अधिक बारिश पड़ने से पंजाब के कईं जिलों में बाढ़ आ गई थी। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में अब तक 94.6 एमएम की सामान्य बारिश के मुकाबले 85.7 एमएम की बारिश रही है, जो सामान्य से 9 फीसदी कम दर्ज की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
माहिरों ने बारिश की कमी व अधिक उमस भरी गर्मी पड़ने को बताया कारण
जुलाई में सामान्य से 44 फीसदी, तो अगस्त में अब तक 9 फीसदी कम बारिश दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब में इस बार मौसम विभाग की भविष्यवाणी के विपरीत बारिश अब तक सामान्य से कम रही है। जुलाई में सामान्य से 44 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब अगस्त भी मानसून के लिहाज से अधिक अच्छा नहीं जा रहा है। अब तक सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश ही दर्ज की गई है। इसका असर धान की फसलों पर पड़ा है। पंजाब के कईं जिलों में धान की फसलें एक नए वायरस की चपेट में आई हैं, जिससे फसलें बौनेपन का शिकार हो रही हैं। इस रोग से झाड़ कम होने की आशंका जताई जा रही है। खेतीबाड़ी माहिर इसका कारण बारिश की कमी और अधिक उमस भरी गर्मी को मान रहे हैं। हालांकि पंजाब खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह का कहना है कि यह रोग पंजाब के कुछ जिलों में धान की फसलों में पाया गया है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी कर दी है कि किन कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करके काबू पाया जा सकता है। साथ ही बताया कि जैसे ही रोग के संबंध में किसानों की तरफ से शिकायतें मिलीं, तुरंत पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना की टीम की ओर से प्रभावित इलाकों में सैंपल लिए गए। जांच में वायरस रोग की पुष्टि हो गई है। इसके बाद उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक भारत में पहली बार 2022 में धान की फसलों में यह वायरस रोग पाया गया था। यह रोग धान में चिट्ठी पीठ वाले टिड्डे के जरिये फैलता है और धान की मौजूदा सभी किस्मों पर हमला कर सकता है। इस रोग से प्रभावित धान के पौधे बौने, उनके पत्ते नोकदार व जड़ें कम गहरी रह जाती हैं। प्रभावित पौधों की ऊंचाई आम पौधों की तुलना में आधी या एक तिहाई रह जाती है। रोग के ज्यादा हमले के कारण कईं बार पौधे मुरझा कर सूख भी जाते हैं। इस साल पंजाब के विभिन्न जिलों जैसे रोपड़, मोहाली, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब में धान की फसलों के लिए कईं सैंपलों में से कुछ में यह रोग वाला वायरस पाया गया है। गौरतलब है कि पंजाब में इस बार 32 लाख हेक्टेयर रकबे पर धान की फसलें लगाई गई हैं। विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह के मुताबिक प्रभावित जिलों में कहीं-कहीं कुछ रकबा वायरस रोग की चपेट में आया है। सर्वे के बाद ही प्रभावित रकबे के बारे में सही से पता लग पाएगा।
विज्ञापन
बंगाल की खाड़ी में नहीं बनी हवाएं
मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक बंगाल की खाड़ी काफी कमजोर रही। वहां अच्छे से हवाएं बन नहीं पाईं। जिस कारण पंजाब में मानसून खास तौर से जुलाई में कमजोर ही रहा है। इसके साथ ही इस बार मानसून में अब तक पंजाब में कोई पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय नहीं हुआ। इससे ज्यादा बारिश हो सकती थी। डायरेक्टर ने भी माना कि उमस भरी इस गर्मी में फसलों को बीमारियां होने का खतरा बढ़ा है। उन्होंने माना कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में अनिश्चितता आ रही है। इस बार संभावना के विपरीत मानसून अच्छा नहीं जा रहा है। जबकि पिछले साल उम्मीद के विपरीत जुलाई में काफी अधिक बारिश पड़ने से पंजाब के कईं जिलों में बाढ़ आ गई थी। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में अब तक 94.6 एमएम की सामान्य बारिश के मुकाबले 85.7 एमएम की बारिश रही है, जो सामान्य से 9 फीसदी कम दर्ज की गई है।
विज्ञापन