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Patiala News: पीएम श्री योजना के खिलाफ उतरे शिक्षक संगठन, कहा- पंजाब में लागू नहीं होने देंगे
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-डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने कहा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के जरिये शिक्षा का निजीकरण मंजूर नहीं
-केंद्र की ओर से ग्रांट रोकने के नाम पर राज्यों के अधिकारों में की जा रही है दखलअंदाजी
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। केंद्र की पीएम श्री योजना (प्रधानमंत्री स्कूल्स फाॅर राइजिंग इंडिया) के खिलाफ पंजाब की विभिन्न अध्यापक जत्थेबंदियां मैदान में उतर आई हैं। अध्यापकों के मुताबिक स्कूलों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने के नाम पर शुरू की गई इस योजना के जरिये केंद्र स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर रही है। यह शिक्षा का निजीकरण है, जिसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
अध्यापक जत्थेबंदियों ने मांग की कि पंजाब सरकार की ओर से इस योजना को सूबे के स्कूलों में लागू न किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मांग को पूरा न किया गया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (एलिमेंट्री) को नोडल अफसर घोषित करते 15 अगस्त तक स्कीम के तहत तैयार पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई करने की हिदायतें स्कूल प्रमुखों को जारी की गई थीं।
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह ने कहा कि मई 2023 में सीएम भगवंत मान के साथ जत्थेबंदी की बैठक में पीएम श्री योजना के खिलाफ विरोध जताया गया था। इसके बाद पंजाब सरकार ने इसे लागू करने से किनारा कर लिया था, लेकिन इसके बाद केंद्र की ओर से पंजाब की स्कूल शिक्षा से संबंधित ग्रांटों पर रोक लगा दी गई और इस योजना को जबरी लागू कराया गया। अब फिर से इस साल उक्त योजना को स्कूलों में लागू करने की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि योजना के तहत स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी ढांचा मजबूत किया जाएगा, जबकि सच्चाई है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सारे मापदंड लागू करने के लिए यह योजना लाई गई है।
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शिक्षा नीति तैयार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया
अध्यापक नेता अश्विनी अवस्थी, महिंदर कौडियांवाली ने कहा कि कईं बार मांग करने के बावजूद मान सरकार ने पंजाब के शिक्षा शास्त्रियों, अध्यापकों, विद्यार्थियों व अन्य शिक्षण माहिरों के सुझाव लेकर यहां की स्थानीय सभ्याचारक, भाषाई, आर्थिक व सामाजिक जरूरतों के अनुसार अपनी शिक्षा नीति तैयार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। इस तरह से पंजाब की आप सरकार एक बार फिर से पंजाब व यहां के लोगों के हितों के विपरीत भुगतती हुई फेडरल ढांचे की रक्षा करने में बुरी तरह से असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस सारे मामले को लेकर जल्द अगली रणनीति तैयार करने को बैठक की जाएगा। सरकार को संघर्षों के जरिये घेरा जाएगा। किसी भी कीमत पर योजना को पंजाब के स्कूलों में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
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-केंद्र की ओर से ग्रांट रोकने के नाम पर राज्यों के अधिकारों में की जा रही है दखलअंदाजी
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। केंद्र की पीएम श्री योजना (प्रधानमंत्री स्कूल्स फाॅर राइजिंग इंडिया) के खिलाफ पंजाब की विभिन्न अध्यापक जत्थेबंदियां मैदान में उतर आई हैं। अध्यापकों के मुताबिक स्कूलों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने के नाम पर शुरू की गई इस योजना के जरिये केंद्र स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू कर रही है। यह शिक्षा का निजीकरण है, जिसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
अध्यापक जत्थेबंदियों ने मांग की कि पंजाब सरकार की ओर से इस योजना को सूबे के स्कूलों में लागू न किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मांग को पूरा न किया गया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (एलिमेंट्री) को नोडल अफसर घोषित करते 15 अगस्त तक स्कीम के तहत तैयार पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई करने की हिदायतें स्कूल प्रमुखों को जारी की गई थीं।
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डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह ने कहा कि मई 2023 में सीएम भगवंत मान के साथ जत्थेबंदी की बैठक में पीएम श्री योजना के खिलाफ विरोध जताया गया था। इसके बाद पंजाब सरकार ने इसे लागू करने से किनारा कर लिया था, लेकिन इसके बाद केंद्र की ओर से पंजाब की स्कूल शिक्षा से संबंधित ग्रांटों पर रोक लगा दी गई और इस योजना को जबरी लागू कराया गया। अब फिर से इस साल उक्त योजना को स्कूलों में लागू करने की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि योजना के तहत स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी ढांचा मजबूत किया जाएगा, जबकि सच्चाई है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सारे मापदंड लागू करने के लिए यह योजना लाई गई है।
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शिक्षा नीति तैयार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया
अध्यापक नेता अश्विनी अवस्थी, महिंदर कौडियांवाली ने कहा कि कईं बार मांग करने के बावजूद मान सरकार ने पंजाब के शिक्षा शास्त्रियों, अध्यापकों, विद्यार्थियों व अन्य शिक्षण माहिरों के सुझाव लेकर यहां की स्थानीय सभ्याचारक, भाषाई, आर्थिक व सामाजिक जरूरतों के अनुसार अपनी शिक्षा नीति तैयार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। इस तरह से पंजाब की आप सरकार एक बार फिर से पंजाब व यहां के लोगों के हितों के विपरीत भुगतती हुई फेडरल ढांचे की रक्षा करने में बुरी तरह से असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इस सारे मामले को लेकर जल्द अगली रणनीति तैयार करने को बैठक की जाएगा। सरकार को संघर्षों के जरिये घेरा जाएगा। किसी भी कीमत पर योजना को पंजाब के स्कूलों में लागू नहीं होने दिया जाएगा।