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रयात-बाहरा स्टूडेंट्स ने बनाई पेपर रीसाइकिलिंग मशीन
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 08 Jul 2016 03:16 PM IST
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पटियाला में पेपर रीसाइकिलिंग मशीन के साथ छात्र और टीचर।
- फोटो : अमर उजाला
रयात-बाहरा पटियाला कैंपस के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स ने एक मशीन डिजाइन और विकसित की है, जो बेकार कागज को रीसाइकल करने में मदद करेगी। बेकार हो चुके कागज को जमीन में दबा देने से मीथेन गैस निकलती है, जो पर्यावरण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड से 23 गुना ज्यादा हानिकारक है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट स्टूडेंट्स ने यह मशीन मॉडल तैयार किया है।
कैंपस डायरेक्टर डा. पीयूष वर्मा ने बताया कि कागज को रीसाइकल करने से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्ग 55 फीसदी तक कम हो सकता है और पेपर फाइबर चार से पांच बार तक रीसाइकल किया जा सकता है। यह मॉडल मशीन किसी असल के पेपर मिल प्लांट की ही तरह 220 वोल्ट एसी मेन पावर सप्लाई पर काम करता है। इस मशीन को मैकेनिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स हरविंदर, संजीव, शुभम, आयूष और अमन ने तैयार किया है। रयात-बाहरा ग्रुप के चेयरमैन गुरविंदर सिंह बाहरा ने कहा कि रयात-बाहरा पटियाला कैंपस के स्टूडेंट्स पर्यावरण को लेकर सतर्क हैं और कैंपस को साफ-सुथरा रखने में पूरी सपोर्ट देते हैं।
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कैंपस डायरेक्टर डा. पीयूष वर्मा ने बताया कि कागज को रीसाइकल करने से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्ग 55 फीसदी तक कम हो सकता है और पेपर फाइबर चार से पांच बार तक रीसाइकल किया जा सकता है। यह मॉडल मशीन किसी असल के पेपर मिल प्लांट की ही तरह 220 वोल्ट एसी मेन पावर सप्लाई पर काम करता है। इस मशीन को मैकेनिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स हरविंदर, संजीव, शुभम, आयूष और अमन ने तैयार किया है। रयात-बाहरा ग्रुप के चेयरमैन गुरविंदर सिंह बाहरा ने कहा कि रयात-बाहरा पटियाला कैंपस के स्टूडेंट्स पर्यावरण को लेकर सतर्क हैं और कैंपस को साफ-सुथरा रखने में पूरी सपोर्ट देते हैं।
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