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Patiala News: नशे से आजादी... काॅलेज लेक्चरर की नौकरी ठुकरा 30 वर्षों से युवाओं को नशामुक्त करने में जुटी हैं परमिंदर कौर
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-स्कूल व काॅलेजों में लेक्चर करके विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ कर रहीं जागरूक
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। काॅलेज में लेक्चरर की नाैकरी ठुकराकर परमिंदर कौर मनचंदा पिछले करीब 30 वर्षों से नशे की दलदल में फंसे युवाओं को बाहर लाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। परमिंदर कहती हैं पंजाब को नशे से आजादी दिला कर रहेंगी। वह पंजाब रेडक्राॅस के पटियाला स्थित साकेत अस्पताल के नशा छुड़ाओ केंद्र की इंचार्ज प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। उन्होंने बताया कि पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी से एमए, एमफिल (साइकोलाॅजी) करने के बाद उन्हें काॅलेज में लेक्चरर की नौकरी मिल रही थी लेकिन उनका सपना पंजाब को नशामुक्त करने का था।
उन्होंने साकेत अस्पताल में काउंसलर के तौर पर ज्वाइन कर लिया जहां वह इलाज के लिए आने वाले युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने लगीं। इस काम में उन्हें काफी संतोष मिला जब माता-पिता नशा छोड़ने वाले अपने बच्चों को हंसी-खुशी घर वापस लेकर जाते थे। उन्होंने नशे के शिकार युवाओं के लिए ही काम करने का प्रण लिया। इसके कुछ सालों के बाद वह साकेत अस्पताल के नशा छुड़ाओ की डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर और अब इंचार्ज बन गई हैं।
57 साल की परमिंदर कौर ने बताया कि केंद्र में काम करने के अलावा वह विभिन्न स्कूलों व काॅलेजों में जाकर महीने में करीब 15 लेक्चर देती हैं। इस दौरान वह विद्यार्थियों को नशे के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देती हैं व उन्हें इस बुराई से दूर रहने को प्रेरित करती हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने में वह तकरीबन 800 विद्यार्थियों को जागरूक करती हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी वह लेक्चर करने जाती हैं। वह अभी भी हर महीने 250 लोगों की नशे के खिलाफ काउंसलिंग करती हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के नशा छुड़ाओ केंद्र में हर महीने करीब 50 मरीजों का इलाज करके उन्हें नशे से दूर करके घर वापस भेजा जाता है।
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परिवार वाले पूरा साथ दें
इसके अलावा करीब 200 मरीजों को ओपीडी में इलाज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ज्यादा भयावह यह है कि वर्तमान में केंद्र में 13 साल से 30 साल की आयुवर्ग के ज्यादातर मरीज नशे छुड़वाने के लिए आ रहे हैं। वह इनकी खुद काउंसलिंग करती हैं। नशे के क्षेत्र में सराहनीय काम के लिए स्टेट अवाॅर्ड हासिल कर चुकीं परमिंदर कौर का कहना है कि उनका यही सपना है कि वह अपने जीवन की आखिरी सांस तक युवाओं को नशे से बचाने के लिए काम करती रहें। एक बार नशा छोड़ चुका युवा दोबारा इस दलदल में न फंसे, इसके लिए जरूरी है कि परिवार वाले उनका पूरा साथ दें। इस दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। काॅलेज में लेक्चरर की नाैकरी ठुकराकर परमिंदर कौर मनचंदा पिछले करीब 30 वर्षों से नशे की दलदल में फंसे युवाओं को बाहर लाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। परमिंदर कहती हैं पंजाब को नशे से आजादी दिला कर रहेंगी। वह पंजाब रेडक्राॅस के पटियाला स्थित साकेत अस्पताल के नशा छुड़ाओ केंद्र की इंचार्ज प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। उन्होंने बताया कि पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी से एमए, एमफिल (साइकोलाॅजी) करने के बाद उन्हें काॅलेज में लेक्चरर की नौकरी मिल रही थी लेकिन उनका सपना पंजाब को नशामुक्त करने का था।
उन्होंने साकेत अस्पताल में काउंसलर के तौर पर ज्वाइन कर लिया जहां वह इलाज के लिए आने वाले युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने लगीं। इस काम में उन्हें काफी संतोष मिला जब माता-पिता नशा छोड़ने वाले अपने बच्चों को हंसी-खुशी घर वापस लेकर जाते थे। उन्होंने नशे के शिकार युवाओं के लिए ही काम करने का प्रण लिया। इसके कुछ सालों के बाद वह साकेत अस्पताल के नशा छुड़ाओ की डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर और अब इंचार्ज बन गई हैं।
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57 साल की परमिंदर कौर ने बताया कि केंद्र में काम करने के अलावा वह विभिन्न स्कूलों व काॅलेजों में जाकर महीने में करीब 15 लेक्चर देती हैं। इस दौरान वह विद्यार्थियों को नशे के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देती हैं व उन्हें इस बुराई से दूर रहने को प्रेरित करती हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने में वह तकरीबन 800 विद्यार्थियों को जागरूक करती हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी वह लेक्चर करने जाती हैं। वह अभी भी हर महीने 250 लोगों की नशे के खिलाफ काउंसलिंग करती हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के नशा छुड़ाओ केंद्र में हर महीने करीब 50 मरीजों का इलाज करके उन्हें नशे से दूर करके घर वापस भेजा जाता है।
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इसके अलावा करीब 200 मरीजों को ओपीडी में इलाज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ज्यादा भयावह यह है कि वर्तमान में केंद्र में 13 साल से 30 साल की आयुवर्ग के ज्यादातर मरीज नशे छुड़वाने के लिए आ रहे हैं। वह इनकी खुद काउंसलिंग करती हैं। नशे के क्षेत्र में सराहनीय काम के लिए स्टेट अवाॅर्ड हासिल कर चुकीं परमिंदर कौर का कहना है कि उनका यही सपना है कि वह अपने जीवन की आखिरी सांस तक युवाओं को नशे से बचाने के लिए काम करती रहें। एक बार नशा छोड़ चुका युवा दोबारा इस दलदल में न फंसे, इसके लिए जरूरी है कि परिवार वाले उनका पूरा साथ दें। इस दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।