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पैरेंट्स की देखभाल न करने पर मकान की रजिस्ट्री रद
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा
Updated Thu, 25 Jun 2015 10:17 PM IST
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ट्रिब्यूनल वेलफेयर आफ सीनियर सिटीजन-कम-उप मंडल मजिस्ट्रेट मोगा सुरिंदर कौर ने सीनियर सिटीजन मेंटिनेंस आफ वेलफेयर पैरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिटायर अध्यापक के वारिस को धोखे से नाम करवाई संपत्ति वापस करने का आदेश दिया है।
बच्चों को नायक बनाने वाले मां-बाप जिंदगी के मुश्किल पड़ाव में भी उनकी हर खुशी पूरी करने का यत्न करते हैं और वह अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव में बच्चों का सहारा के रूप में देखते हैं। लेकिन सहारा बनने आई एक विधवा ने वृद्ध दंपति को बेसहारा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
उसने धोखे से रिटायर अध्यापक का मकान अपने नाम करा लिया और इसके बाद उनकी देखभाल बंद कर दी। धूड़कोट कलां निवासी और हाल आबाद मोहल्ला किशनपुरा रिटायर अध्यापक तारा सिंह ने ट्रिब्यूनल वेलफेयर आफ सीनियर सिटीजन-कम-उप मंडल मजिस्ट्रेट सुरिंदर कौर की अदालत में सीनियर सिटीजन मेंटीनेंस आफ वेलफेयर पेरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत अर्जी में बताया था कि बेऔलाद होने के कारण उन्होंने एक विधवा को बुढापे का सहारा बना कर अपने पास रखा।
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महिला ने धोखे से 21 फरवरी 2013 को उनका मकान अपने नाम करवा लिया और इसके बाद उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल बंद कर दी। सेवा संभाल न होने के चलते उनकी पत्नी जसवीर कौर की मौत हो गई। इस अर्जी पर सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने मकान की धोखे से करवाई रजिस्ट्री (सेल डीड) रद करने का आदेश दिया है।
डीसी परमिंदर सिंह गिल ने बताया कि अपनी औलाद से दुखी माता पिता सीनियर सिटीजन मेंटिनेंस आफ वेलफेयर पैरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत संबंधित उप मंडल मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दायर कर सकते हैं। उन्हाेंने कहा कि इस एक्ट के अंतर्गत बुजुर्ग अपनी औलाद से गुजारा भत्ता लेने के हकदार हैं।
उन्हाेंने कहा कि बुजुर्गों को बुढापे में औलाद बेसहारा नहीं छोड़ सकती और उन्हाें बुजुर्ग माता पिता की देखभाल करना अब कानूनी तौर पर जरूरी हो गया है। उन्हाेंने बताया कि ट्रिब्यूनल के द्वारा पीडित बुजुर्ग को गुजारा भत्ता, भत्ता में बड़ोतरी, आदेशों को तामील करवाना, ब्याज सहित भत्ते दिलाने आदि कार्य कराए जाते हैं।
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बच्चों को नायक बनाने वाले मां-बाप जिंदगी के मुश्किल पड़ाव में भी उनकी हर खुशी पूरी करने का यत्न करते हैं और वह अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव में बच्चों का सहारा के रूप में देखते हैं। लेकिन सहारा बनने आई एक विधवा ने वृद्ध दंपति को बेसहारा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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उसने धोखे से रिटायर अध्यापक का मकान अपने नाम करा लिया और इसके बाद उनकी देखभाल बंद कर दी। धूड़कोट कलां निवासी और हाल आबाद मोहल्ला किशनपुरा रिटायर अध्यापक तारा सिंह ने ट्रिब्यूनल वेलफेयर आफ सीनियर सिटीजन-कम-उप मंडल मजिस्ट्रेट सुरिंदर कौर की अदालत में सीनियर सिटीजन मेंटीनेंस आफ वेलफेयर पेरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत अर्जी में बताया था कि बेऔलाद होने के कारण उन्होंने एक विधवा को बुढापे का सहारा बना कर अपने पास रखा।
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महिला ने धोखे से 21 फरवरी 2013 को उनका मकान अपने नाम करवा लिया और इसके बाद उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल बंद कर दी। सेवा संभाल न होने के चलते उनकी पत्नी जसवीर कौर की मौत हो गई। इस अर्जी पर सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने मकान की धोखे से करवाई रजिस्ट्री (सेल डीड) रद करने का आदेश दिया है।
डीसी परमिंदर सिंह गिल ने बताया कि अपनी औलाद से दुखी माता पिता सीनियर सिटीजन मेंटिनेंस आफ वेलफेयर पैरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत संबंधित उप मंडल मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दायर कर सकते हैं। उन्हाेंने कहा कि इस एक्ट के अंतर्गत बुजुर्ग अपनी औलाद से गुजारा भत्ता लेने के हकदार हैं।
उन्हाेंने कहा कि बुजुर्गों को बुढापे में औलाद बेसहारा नहीं छोड़ सकती और उन्हाें बुजुर्ग माता पिता की देखभाल करना अब कानूनी तौर पर जरूरी हो गया है। उन्हाेंने बताया कि ट्रिब्यूनल के द्वारा पीडित बुजुर्ग को गुजारा भत्ता, भत्ता में बड़ोतरी, आदेशों को तामील करवाना, ब्याज सहित भत्ते दिलाने आदि कार्य कराए जाते हैं।