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‘पैडी सीजन में नहीं होगा बिजली संकट’
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 27 May 2015 10:44 PM IST
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पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी इंजीनियर केडी चौधरी ने दावा किया है कि पैडी सीजन में इस बार बिजली की कमी नहीं होगी। बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पावरकाम पूरी तरह से तैयार है। जल्द ही तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के दो यूनिट चालू हो जाएंगे।
इंजीनियर चौधरी ने बताया कि पंजाब में बिजली की मांग पैडी सीजन दौरान 12000 मेगावाट से अधिक हो जाती है और बाकी आठ महीनों दौरान 3000 मेगावाट से छह हजार मेगावाट के बीच रहती है। दावा किया कि इस समय पंजाब के समय बिजली की उपलब्धता 12 हजार मेगावाट से अधिक है और केंद्रीय प्रोजेक्टों से बिजली लाने के लिए 5700 मेगावाट की संचार क्षमता है।
राजपुरा थर्मल प्लांट 1400 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। एक यूनिट चल रहा है, जबकि तलवंडी साबो के बाकी दोनों यूनिट जुलाई महीने में शुरू हो जाएंगे, जिनसे 1320 मेगावाट बिजली मिलेगी। गोइंदवाल के 540 मेगावाट के दो यूनिट इसी साल अक्तूबर तक चालू हो जाएंगे।
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उधर पावरकाम के तीनों थर्मल प्लांट भी अपनी पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन के लिए तैयार हैं। हरेक प्लांट में इस समय 25 दिनों का कोयला बचा है। हालांकि कारपोरेशन को केंद्र सरकार की ओर से पचवाड़ा के पास खदान अलाट कर दी गई है, लेकिन इसमें से कोयला निकालने के लिए कुछ महीने और लगेंगे।
कोयले की कमी होने की सूरत में शार्ट टर्म पावर परचेज समझौते किए गए हैं और साथ ही केंद्रीय प्रोजेक्टों से अलाट नहीं की गई बिजली लेने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। पचवाड़ा के पास खदान के लिए नए डेवलपर के काम शुरू करने तक खदान से कोयला प्राप्त करने के लिए अंतरिम प्रबंध भी किए जा रहे हैं।
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इंजीनियर चौधरी ने बताया कि पंजाब में बिजली की मांग पैडी सीजन दौरान 12000 मेगावाट से अधिक हो जाती है और बाकी आठ महीनों दौरान 3000 मेगावाट से छह हजार मेगावाट के बीच रहती है। दावा किया कि इस समय पंजाब के समय बिजली की उपलब्धता 12 हजार मेगावाट से अधिक है और केंद्रीय प्रोजेक्टों से बिजली लाने के लिए 5700 मेगावाट की संचार क्षमता है।
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राजपुरा थर्मल प्लांट 1400 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। एक यूनिट चल रहा है, जबकि तलवंडी साबो के बाकी दोनों यूनिट जुलाई महीने में शुरू हो जाएंगे, जिनसे 1320 मेगावाट बिजली मिलेगी। गोइंदवाल के 540 मेगावाट के दो यूनिट इसी साल अक्तूबर तक चालू हो जाएंगे।
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उधर पावरकाम के तीनों थर्मल प्लांट भी अपनी पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन के लिए तैयार हैं। हरेक प्लांट में इस समय 25 दिनों का कोयला बचा है। हालांकि कारपोरेशन को केंद्र सरकार की ओर से पचवाड़ा के पास खदान अलाट कर दी गई है, लेकिन इसमें से कोयला निकालने के लिए कुछ महीने और लगेंगे।
कोयले की कमी होने की सूरत में शार्ट टर्म पावर परचेज समझौते किए गए हैं और साथ ही केंद्रीय प्रोजेक्टों से अलाट नहीं की गई बिजली लेने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। पचवाड़ा के पास खदान के लिए नए डेवलपर के काम शुरू करने तक खदान से कोयला प्राप्त करने के लिए अंतरिम प्रबंध भी किए जा रहे हैं।