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मेरे मुंह तों कफन उठा देओ साथियों, शहीद कदे मुंह लकोया नहीं करदे
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पटियाला। मालवा साहित्य कला मंच के तत्वाधान में शहीद-ए-आजम भगत सिंह को समर्पित संगोष्ठी का आयोजन डीएवी स्कूल में हुआ। गोष्ठी की मुख्य वक्ता प्रसिद्ध समाज सेविका एवं प्राध्यापिका सुमन बत्रा ने शहीद भगत सिंह की जीवनी और दर्शन पर प्रकाश डाला। उनके शब्दों ‘मेरे मुंह तों कफन उठा देओ साथियों, शहीद कदे मुंह लकोया नहीं करदे’ ने सभी को भावविभोर कर दिया।
यह संगोष्ठी मंच संस्थापक शिरोमणि साहित्यकार डॉ. मनमोहन सहगल के सानिध्य में हुई। इसकी अध्यक्षता संस्कृत विद्वान डॉ. महेशचंद्र गौतम ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुमन बत्रा सुशोभित रहीं। गोष्ठी के प्रथम चरण में शहीद भगत सिंह के जीवन एवं सिद्धांतों पर चर्चा की गई।
सुमन बत्रा ने कहा कि हर पंजाबी को खुद में भगत सिंह और उनके सिद्धांतों को जिंदा रखने की आवश्यकता है। उनकी इसी कड़ी को आगे जोड़ते हुए मंच संचालक डॉ. पूनम गुप्त ने ‘लूटकर जान अपनी वे तो रुख्सत हो गए हैं, अब यह हम पर है वतन की किस तरह आगे हिफाजत हो’ सुनाकर संगोष्ठी को आगे बढ़ाया।
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शहीदों को किया नमन
नवीन कमल भारती ने शहीद भगत सिंह के जीवन के अनछुए किस्सों पर प्रकाश डाला। संस्था सचिव सुशील आजाद ने भगत सिंह को क्रांति का अग्रदूत बताते हुए मास्को में मंचित नाटक भगत सिंह नहीं मरेगा पर अपने संस्मरण साझा किए। काव्यपाठ की श्रृंखला में डॉ. जीएस आनंद ने अपनी नज्म में कहा कि कहने को तो भगत सिंह, तेरा देश आजाद है, पर खुद ही आकर देख लो, कितना यह आजाद है। डॉ. पूनम गुप्त ने कोटि कोटि प्रणाम देश के वीरों को रचना प्रस्तुत कर शहीदों को नमन किया। कैप्टन चमकौर सिंह चाहल ने भी अपनी कविता में शहीदों को नमन किया। वरिष्ठ शायर हरिदत्त हबीब ने सुंदर नज्म मेरे वतन तुझपे दिल है कुर्बान, ये जां भी तुझपे फिदा करेंगे, रहे तेरा नाम सबसे ऊंचा, तेरे लिए ही जिये मरेंगे पढ़ी। महिंदर सिंह जग्गी ने शहीदों की शहादत पर और भावना ने अपनी कविता बाल श्रम अपराध है बच्चों को कौन बताएगा प्रस्तुत की।
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यह संगोष्ठी मंच संस्थापक शिरोमणि साहित्यकार डॉ. मनमोहन सहगल के सानिध्य में हुई। इसकी अध्यक्षता संस्कृत विद्वान डॉ. महेशचंद्र गौतम ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुमन बत्रा सुशोभित रहीं। गोष्ठी के प्रथम चरण में शहीद भगत सिंह के जीवन एवं सिद्धांतों पर चर्चा की गई।
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सुमन बत्रा ने कहा कि हर पंजाबी को खुद में भगत सिंह और उनके सिद्धांतों को जिंदा रखने की आवश्यकता है। उनकी इसी कड़ी को आगे जोड़ते हुए मंच संचालक डॉ. पूनम गुप्त ने ‘लूटकर जान अपनी वे तो रुख्सत हो गए हैं, अब यह हम पर है वतन की किस तरह आगे हिफाजत हो’ सुनाकर संगोष्ठी को आगे बढ़ाया।
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शहीदों को किया नमन
नवीन कमल भारती ने शहीद भगत सिंह के जीवन के अनछुए किस्सों पर प्रकाश डाला। संस्था सचिव सुशील आजाद ने भगत सिंह को क्रांति का अग्रदूत बताते हुए मास्को में मंचित नाटक भगत सिंह नहीं मरेगा पर अपने संस्मरण साझा किए। काव्यपाठ की श्रृंखला में डॉ. जीएस आनंद ने अपनी नज्म में कहा कि कहने को तो भगत सिंह, तेरा देश आजाद है, पर खुद ही आकर देख लो, कितना यह आजाद है। डॉ. पूनम गुप्त ने कोटि कोटि प्रणाम देश के वीरों को रचना प्रस्तुत कर शहीदों को नमन किया। कैप्टन चमकौर सिंह चाहल ने भी अपनी कविता में शहीदों को नमन किया। वरिष्ठ शायर हरिदत्त हबीब ने सुंदर नज्म मेरे वतन तुझपे दिल है कुर्बान, ये जां भी तुझपे फिदा करेंगे, रहे तेरा नाम सबसे ऊंचा, तेरे लिए ही जिये मरेंगे पढ़ी। महिंदर सिंह जग्गी ने शहीदों की शहादत पर और भावना ने अपनी कविता बाल श्रम अपराध है बच्चों को कौन बताएगा प्रस्तुत की।