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लहरागागा सीट ः भट्ठल को हरा चुके हैं सीनियर ढींढसा, क्या जूनियर दोहरा पाएंगे इतिहास
ब्यूरो, अमर उजाला, संगरूर
Updated Sat, 14 Jan 2017 03:22 PM IST
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चुनाव
- फोटो : डेमो फोटो
पंजाब की हॉट विधानसभा सीट लहरागागा से पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल और प्रदेश के वर्तमान वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार बन गए हैं।
यह वही सीट है जिस पर राजिंदर कौर भट्ठल लगातार पांच विधानसभा चुनाव (1992, 1997, 2002, 2007 व 2012) जीत चुकी हैं। वहीं वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा चार बार सुनाम से चुनाव (2000 में सुनाम उपचुनाव, 2002, 2007 और 2012) जीत में दर्ज की है।
अब इन दोनों के बीच आम आदमी पार्टी के जसबीर सिंह कुदनी के चुनावी मैदान में कूदने से चुनावी माहौल गरमा गया है। आप प्रत्याशी की रफ्तार ने अकाली भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की चिंता बढा दी है।
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लहरागागा हलके के कई गांवों में कूदनी का प्रभाव है। जो अकाली दल के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। शहरी इलाकों खास तौर पर कांग्रेस का वोट बैंक माने जाने वाली स्लम बस्तियों और मध्यम वर्ग में आप प्रत्याशी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां नई सियासी तस्वीर उभर सकती है।
कांग्रेस की नेता भट्ठल को 45 साल पहले राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा से धनौला विधानसभा क्षेत्र से चुनौती मिली थी। इस सीट से 1972 में आजाद तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे सीनियर ढींढसा ने बीबी भट्ठल को चुनाव में शिकस्त दी थी।
इस बार भट्ठल के सामने ढींढसा के बेटे परमिंदर ढींढसा हैं। देखना होगा कि क्या जूनियर ढींडसा, अपने पिता का इतिहास दोहरा पाते हैं अथवा भट्ठल 45 साल पहले मिली हार का बदला लेने में सफल हो पाती है।
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यह वही सीट है जिस पर राजिंदर कौर भट्ठल लगातार पांच विधानसभा चुनाव (1992, 1997, 2002, 2007 व 2012) जीत चुकी हैं। वहीं वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा चार बार सुनाम से चुनाव (2000 में सुनाम उपचुनाव, 2002, 2007 और 2012) जीत में दर्ज की है।
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अब इन दोनों के बीच आम आदमी पार्टी के जसबीर सिंह कुदनी के चुनावी मैदान में कूदने से चुनावी माहौल गरमा गया है। आप प्रत्याशी की रफ्तार ने अकाली भाजपा गठबंधन और कांग्रेस की चिंता बढा दी है।
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लहरागागा हलके के कई गांवों में कूदनी का प्रभाव है। जो अकाली दल के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। शहरी इलाकों खास तौर पर कांग्रेस का वोट बैंक माने जाने वाली स्लम बस्तियों और मध्यम वर्ग में आप प्रत्याशी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां नई सियासी तस्वीर उभर सकती है।
कांग्रेस की नेता भट्ठल को 45 साल पहले राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा से धनौला विधानसभा क्षेत्र से चुनौती मिली थी। इस सीट से 1972 में आजाद तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ रहे सीनियर ढींढसा ने बीबी भट्ठल को चुनाव में शिकस्त दी थी।
इस बार भट्ठल के सामने ढींढसा के बेटे परमिंदर ढींढसा हैं। देखना होगा कि क्या जूनियर ढींडसा, अपने पिता का इतिहास दोहरा पाते हैं अथवा भट्ठल 45 साल पहले मिली हार का बदला लेने में सफल हो पाती है।