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पंजाब विधानसभा चुनाव: राजनीतिक माहिरों की राय-बेअदबी पर भारी पड़ेंगे लोगों से जुड़े मुद्दे, किसान आंदोलन से जागरूक हुए लोग

Tue, 21 Dec 2021 04:40 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 21 Dec 2021 04:40 PM IST
सार

2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भी बेअदबी की घटनाएं हुई थीं। 25 सितंबर 2015 को फरीदकोट जिले के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव के गुरुद्वारा साहिब के बाहर आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए। जबकि 12 अक्तूबर 2015 को फरीदकोट के ही गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप के साथ बेअदबी की गई।

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Issues related to people will remain Main in Punjab Assembly Elections 2022
अमृतसर में बेअदबी। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब में हुई बेअदबी घटना ने पंजाब में राजनीतिक माहौल को भले ही गर्मा दिया हो, लेकिन चुनावों में पंजाब की सियासत पर लोगों से जुड़े मसले ही भारी रहेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बेअदबी की घटनाओं का पार्टियां सियासी लाभ के लिए खूब दोहन कर चुकी हैं लेकिन अब इन घटनाओं से वोटरों को भ्रमित नहीं किया जा सकेगा। किसान आंदोलन ने लोगों को इतना जागरूक कर दिया है कि उन्हें पता है कि उनके लिए जरूरी मुद्दे कौन से हैं।

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नहीं भुनाया जा सकेगा बेअदबी का मुद्दा

पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड के सेवानिवृत चेयरमैन एवं पंजाबी यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस विभाग से रिटायर डॉ. केहर सिंह का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में बेअदबी का मुद्दा प्रमुख नहीं होगा। एक सीमा तक यह मुद्दा चुनावों पर असर डाल सकता है, लेकिन पंजाब की सियासत व चुनावों पर लोगों से जुड़े मुद्दे जैसे बेरोजगारी, शिक्षा, चिकित्सा सेवाएं, महंगाई और भ्रष्टाचार ही हावी रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के कारण अब लोग काफी जागरूक हो गए हैं। राजनीतिक पार्टियां अब बेअदबी के मुद्दों को चुनाव के लिए भुना नहीं सकेंगी। डॉ. केहर सिंह ने कहा कि चुनावों के संदर्भ में ऐसी साजिशें रची जाती हैं, ताकि लोगों का ध्यान प्रमुख मुद्दों से भटकाकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। लेकिन अब लोग आगे से ज्यादा जागरूक हो चुके हैं। 

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शिक्षा, बेरोजगारी से जुड़े मुद्दे रहेेंगे अहम

वहीं पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से ही रिटायर अर्थशास्त्री व राजनीतिक मामलों के माहिर प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा का कहना है कि अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब में हुई घटना काफी निंदनीय है और पंजाब सरकार द्वारा उस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वोटों के ध्रुवीकरण के लिए चुनावों से पहले इस तरह की साजिशें रची जाती हैं। ऐसे माहौल में हमेशा लोगों से जुड़े मसले नजरअंदाज हो जाते हैं। लेकिन आने वाले चुनावों में शिक्षा, बेरोजगारी और किसान कर्ज जैसे मुद्दे ही पंजाब की राजनीति पर भारी रहेंगे। 

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2017 में भी चुनाव से पहले बेअदबी की घटनाएं हुई थीं

2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भी बेअदबी की घटनाएं हुई थीं। 25 सितंबर 2015 को फरीदकोट जिले के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव के गुरुद्वारा साहिब के बाहर आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए। जबकि 12 अक्तूबर 2015 को फरीदकोट के ही गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप के साथ बेअदबी की गई। इसके दो दिन बाद 14 अक्तूबर को जब उक्त घटना के विरोध में फरीदकोट के कोटकपूरा व बहिबलकलां में सिख संगठनों ने धरना दिया, तो उन्हें हटाने के दौरान धरनाकारियों व पुलिस में झड़प हुई। जिसमें फायरिंग के दौरान दो युवकों की मौत हो गई थी।

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