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‘केंद्र सोना व्यापारियों को तबाह करने पर तुला’
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Mon, 25 Apr 2016 10:24 PM IST
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पटियाला में मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ धरना देकर नारेबाजी करते ज्वेलर।
- फोटो : अमर उजाला
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आल इंडिया जेम्स और ज्वेलरी फेडरेशन आफ इंडिया के भारत बंद के आह्वान के मद्देनजर पटियाला में भी ज्वेलर व स्वर्णकार तीन दिन के लिए हड़ताल पर चले गए। करीब 200 ज्वेलरों ने सोमवार को दुकानें व व्यापार को बंद रखा। किला चौक में सब ज्वेलरों व स्वर्णकारों ने इकट्ठे होकर धरना दिया। इस दौरान केंद्र सरकार व वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
इस मौके पर स्वर्णकार संघ के प्रधान भीम सेन, तहसील प्रधान प्रवीण कुमार लकी, स्वर्णकार एसोसिएशन से विश्वजीत ने कहा कि केंद्र सरकार व वित्त मंत्रालय ज्वेलरों व सोना व्यापारियों के व्यापार को तबाह करने पर तुला है। सरकार ने एक तानाशाही फैसला लेते हुए ब्रांडेड ज्वेलरी पर 12.5 प्रतिशत और बिना ब्रांडेड ज्वेलरी पर एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी को लागू कर दिया है।
साथ ही ग्राहकों व खरीदारों की ओर से दो लाख रुपये तक के गहनों व सोने की खरीद पर पैन कार्ड को भी जरूरी कर दिया है। इसका ज्वेलर व सोना व्यापारी विरोध करते हैं। सरकार के गलत रवैये के कारण कई व्यापारियों की दुकानें बंद हो चुकी हैं और कई ने तंग आकर अपने व्यापार बदल लिए हैं। सोना व्यापारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार ने अपने इस तानाशाही आदेश को वापस न लिया, तो सरकार के खिलाफ बेमियादी हड़ताल की जाएगी। जिसका सरकार को भी आर्थिक रूप से नुकसान झेलना पड़ेगा।
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इस मौके पर स्वर्णकार संघ के प्रधान भीम सेन, तहसील प्रधान प्रवीण कुमार लकी, स्वर्णकार एसोसिएशन से विश्वजीत ने कहा कि केंद्र सरकार व वित्त मंत्रालय ज्वेलरों व सोना व्यापारियों के व्यापार को तबाह करने पर तुला है। सरकार ने एक तानाशाही फैसला लेते हुए ब्रांडेड ज्वेलरी पर 12.5 प्रतिशत और बिना ब्रांडेड ज्वेलरी पर एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी को लागू कर दिया है।
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साथ ही ग्राहकों व खरीदारों की ओर से दो लाख रुपये तक के गहनों व सोने की खरीद पर पैन कार्ड को भी जरूरी कर दिया है। इसका ज्वेलर व सोना व्यापारी विरोध करते हैं। सरकार के गलत रवैये के कारण कई व्यापारियों की दुकानें बंद हो चुकी हैं और कई ने तंग आकर अपने व्यापार बदल लिए हैं। सोना व्यापारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार ने अपने इस तानाशाही आदेश को वापस न लिया, तो सरकार के खिलाफ बेमियादी हड़ताल की जाएगी। जिसका सरकार को भी आर्थिक रूप से नुकसान झेलना पड़ेगा।
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