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पंजाब: सरकारी एमएसपी से संतुष्ट नहीं किसान, इस बार प्राइवेट को तरजीह देने के मूड में हैं अन्नदाता
Mon, 04 Apr 2022 04:16 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 04 Apr 2022 04:16 PM IST
सार
किसानों का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण गेहूं की डिमांड दोनों देशों की तरफ से बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के रेट बढ़ गए हैं।
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गेहूं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हुए तीन दिन हो चुके हैं। इस बार केंद्र की ओर से गेहूं पर दिए गए 2025 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसान संतुष्ट नहीं है। किसान अच्छे मूल्य के लिए प्राइवेट व्यापारियों को फसल बेचने को तरजीह देने के मूड में हैं।
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किसानों का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण गेहूं की डिमांड दोनों देशों की तरफ से बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के रेट बढ़ गए हैं। केंद्र ने पिछले साल के 1985 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी में इस साल मात्र 40 रुपये की वृद्धि की है। जो नाममात्र है। ऐसे में किसान अपने खर्चे निकालने के लिए प्राइवेट व्यापारियों को मौका दे सकते हैं, जो कम से कम प्रति क्विंटल 2200-2300 रुपये प्रति क्विंटल दाम दें।
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भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह ने बताया कि युद्ध के चलते रूस और यूक्रेन जैसे देशों की ओर से इस बार गेहूं की डिमांड आ रही है जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ी हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार को गेहूं पर 3000 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी देनी चाहिए थी। केंद्र ने पिछले साल की तुलना में मात्र 40 रुपये का इजाफा करते हुए 2025 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी तय की है। महंगाई के इस दौर में हर कीटनाशक दवाएं, बीज और खाद तक महंगी हो चुकी है। लेबर काफी महंगी है। किसान यही चाह रहे हैं कि उन्हें जो ज्यादा रेट देगा, उसे फसलें बेच देंगे। प्राइवेट में इस बार गेहूं प्रति क्विंटल 2300 रुपये बिकने की उम्मीद है।
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क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता अवतार सिंह कौरजीवाला ने कहा कि सरकार को ही चाहिए कि वह एमएसपी की कानूनी गारंटी देते हुए इसे स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक तय करे। इस साल गेहूं पर दिया एमएसपी बहुत कम है। इससे किसानों के खेती खर्चे पूरे नहीं होंगे। ऐसे में प्राइवेट वाले ज्यादा रेट देंगे, तो किसान बेच देगा। इस संबंधी जिला मंडी अफसर अजयपाल सिंह बराड़ ने कहा कि जिले की सारी मंडियां गेहूं की खरीद के लिए तैयार हैं। मंडियों में बिजली, पानी व शौचालय बगैरा के प्रबंध कर लिए गए हैं। लेकिन आवक फिलहाल कम हो रही है।