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ऑर्बिट बस कांड में गवाही देने से घबरा रहे यात्री
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा
Updated Tue, 02 Jun 2015 09:48 PM IST
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सत्ताधारी बादलों की मालकी वाली कंपनी ऑर्बिट की बस में छेड़छाड़ के बाद चलती बस से कथित तौर पर फेंक कर मारी गई नाबालिग लड़की अर्शदीप कौर के मामले में पुलिस के हाथ अभी तक नाकामी ही लगी है। पुलिस की ओर से पहचान कराए गए बस के छह यात्री गवाही देने से घबरा रहे हैं।
थाना बाघापुराना के एसएचओ अवतार सिंह ने बताया कि घटना के समय बस में सफर कर रहे छह बस यात्रियों की पहचान हुई थी और उनसे पूछताछ की गई है। उन्हाेंने कहा कि इस कांड की तह तक सच्चाई जानने के लिए घटना समय बस में सफर कर रही सवारियों से इस घटना संबंधित असली तथ्यों को सामने लाने के लिए अखबारों में अपील इश्तिहार जारी किया था।
पुलिस यह पता लाने की कोशिश कर रही है कि अर्शदीप कौर और उसकी मां छिंदर कौर को फेंका गया है या उन्हाेंने खुद छलांग लगाई है। पुलिस सूत्रों मुताबिक घटना के समय बस में सफर कर रहे जिन 6 यात्रियों की पहचान हुई है, उनमें विजय कुमार बठिंडा, गगनदीप सिंह जलालाबाद, परमजीत सिंह बठिंडा, जगतार सिंह और अमरजीत कौर गांव रोडे शामिल हैं।
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पुलिस सूत्र बताते हैं कि इन यात्रियों की टोल प्लाजा की फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन से पहचान की गई लेकिन इन यात्रियों में से सिर्फ एक यात्री को छोड़ कर बाकी किसी यात्री ने पुलिस को कुछ नहीं बताया। इन यात्रियों ने किसी ने कोई स्पष्ट नहीं किया कि अर्शदीप कौर और उसकी मां छिंदर कौर को फेंका गया है या उन्हाेंने खुद छलांग लगाई है।
इन यात्रियों में से कुछ ने यह कह कर पुलिस से पीछा छुड़ा लिया कि वह घटना समय सो रहे थे और जब शोर हुआ तो उनकी नींद खुली और उन्होंने अपनी आंखों से कोई घटना नहीं देखी। यहां एक निजी अस्पताल में काम करते नौजवान ने बताया कि वह घटना के समय बस में सफर कर रहा था और वह अपना नाम प्रसारित होने से डर रहा है।
गौरतलब है बीती 29 अप्रैल की शाम को थाना बाघापुराना अधीन गांव गिल के पास ऑर्बिट कंपनी की बस में छेड़छाड़ के बाद कथित तौर पर फेंके जाने नाबालिग लड़की अर्शदीप कौर की मौत हो गई थी और उसकी मां छिंदर कौर गंभीर घायल हो गई थी। इस कांड की देश दुनिया में चर्चा होने बाद बादलों को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।
पीड़ित परिवार के घर की सुरक्षा के लिए एक एएसआई की निगरानी में 5 पुलिस कर्मी तैनात हुए हैं। इस मामले में बस चालक रणजीत सिंह, कंडक्टर सुखविंदर सिंह हैलपर (हाकर) गुरदीप सिंह निवासी मोगा और अमर राम उर्फ दाना को गिरफ्तार कर लिया गया था और वह न्यायिक हिरासत में हैं।
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थाना बाघापुराना के एसएचओ अवतार सिंह ने बताया कि घटना के समय बस में सफर कर रहे छह बस यात्रियों की पहचान हुई थी और उनसे पूछताछ की गई है। उन्हाेंने कहा कि इस कांड की तह तक सच्चाई जानने के लिए घटना समय बस में सफर कर रही सवारियों से इस घटना संबंधित असली तथ्यों को सामने लाने के लिए अखबारों में अपील इश्तिहार जारी किया था।
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पुलिस यह पता लाने की कोशिश कर रही है कि अर्शदीप कौर और उसकी मां छिंदर कौर को फेंका गया है या उन्हाेंने खुद छलांग लगाई है। पुलिस सूत्रों मुताबिक घटना के समय बस में सफर कर रहे जिन 6 यात्रियों की पहचान हुई है, उनमें विजय कुमार बठिंडा, गगनदीप सिंह जलालाबाद, परमजीत सिंह बठिंडा, जगतार सिंह और अमरजीत कौर गांव रोडे शामिल हैं।
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पुलिस सूत्र बताते हैं कि इन यात्रियों की टोल प्लाजा की फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन से पहचान की गई लेकिन इन यात्रियों में से सिर्फ एक यात्री को छोड़ कर बाकी किसी यात्री ने पुलिस को कुछ नहीं बताया। इन यात्रियों ने किसी ने कोई स्पष्ट नहीं किया कि अर्शदीप कौर और उसकी मां छिंदर कौर को फेंका गया है या उन्हाेंने खुद छलांग लगाई है।
इन यात्रियों में से कुछ ने यह कह कर पुलिस से पीछा छुड़ा लिया कि वह घटना समय सो रहे थे और जब शोर हुआ तो उनकी नींद खुली और उन्होंने अपनी आंखों से कोई घटना नहीं देखी। यहां एक निजी अस्पताल में काम करते नौजवान ने बताया कि वह घटना के समय बस में सफर कर रहा था और वह अपना नाम प्रसारित होने से डर रहा है।
गौरतलब है बीती 29 अप्रैल की शाम को थाना बाघापुराना अधीन गांव गिल के पास ऑर्बिट कंपनी की बस में छेड़छाड़ के बाद कथित तौर पर फेंके जाने नाबालिग लड़की अर्शदीप कौर की मौत हो गई थी और उसकी मां छिंदर कौर गंभीर घायल हो गई थी। इस कांड की देश दुनिया में चर्चा होने बाद बादलों को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।
पीड़ित परिवार के घर की सुरक्षा के लिए एक एएसआई की निगरानी में 5 पुलिस कर्मी तैनात हुए हैं। इस मामले में बस चालक रणजीत सिंह, कंडक्टर सुखविंदर सिंह हैलपर (हाकर) गुरदीप सिंह निवासी मोगा और अमर राम उर्फ दाना को गिरफ्तार कर लिया गया था और वह न्यायिक हिरासत में हैं।