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भाई मंड नाभा जेल से रिहा व दोबारा गिरफ्तार
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Sat, 02 Apr 2016 10:09 PM IST
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पटियाला के नाभा में भाई मंड को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करके ले जाते समय उनका सिरोपा डाल कर सम्मान करती सिख संगत।
- फोटो : अमर उजाला
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी मामले के बाद चब्बेवाल में हुए सरबत खालसा की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब के नियुक्त किए गए कार्यकारी जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड पांच महीनों के बाद शनिवार को नाभा जेल से रिहा तो हुए। लेकिन उनको थाना मक्खू की पुलिस ने जेल से बाहर आते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया। पुलिस इस दौरान सिख संगतों के रोष को देखते हुए भाई मंड को खुली जिप्सी में ले जाने पर मजबूर हो गई। गौरतलब है कि भाई मंड देशद्रोह के मामले जेल में बंद थे।
इस मौके पर पहुंचे शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान, भाई बलजीत सिंह दादूवाल और भाई मोहकम सिंह ने इस कार्रवाई को पंजाब सरकार व पुलिस की ओर से कानून की धज्जियां उड़ाने वाली बताया। भाई मंड ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब तक वह जेल में हैं, तब तक कोई एलान नहीं करेंगे और तब तक पंथक बागडोर सिमरनजीत सिंह मान, भाई मोहकम सिंह और भाई दादूवाल आदि के हाथों में रहेगी।
भाई ध्यान सिंह मंड की नई जिला जेल नाभा से रिहाई को लेकर शनिवार को सारा दिन घमासान होता रहा। सुबह से ही सरबत खालसा के लीडर व भाई मंड के समर्थक जेल के बाहर इकट्ठे हो गए। बाद दोपहर दो बजे तक रिहाई की आस में बैठे समर्थकों को उस समय भारी निराशा मिली, जब नाभा जेल से रिहा होते ही भाई मंड को थाना मक्खू की पुलिस ने छह दिसंबर 2015 के एक मामले में जेल के बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ सिख संगतों ने पंजाब सरकार व पुलिस के खिलाफ नारे लगाए।
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डीएसपी जीरा एचएस बोपाराय की अगुवाई में भारी पुलिस फोर्स जब भाई ध्यान सिंह मंड को फिरोजपुर के लिए लेकर जा रहा थी, तो हजारों की गिनती में इकट्ठा हुई सिख संगतों ने रोष मार्च के रूप में पुलिस की गाड़ी के साथ अपने वाहन लगा लिए। भाई मंड की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हुई थी। इस कारण जेल से बाहर आने पर उनके स्वागत में भारी गिनती में सिख संगत जेल के बाहर पहले से ही मौजूद थीं।
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इस मौके पर पहुंचे शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान, भाई बलजीत सिंह दादूवाल और भाई मोहकम सिंह ने इस कार्रवाई को पंजाब सरकार व पुलिस की ओर से कानून की धज्जियां उड़ाने वाली बताया। भाई मंड ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब तक वह जेल में हैं, तब तक कोई एलान नहीं करेंगे और तब तक पंथक बागडोर सिमरनजीत सिंह मान, भाई मोहकम सिंह और भाई दादूवाल आदि के हाथों में रहेगी।
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भाई ध्यान सिंह मंड की नई जिला जेल नाभा से रिहाई को लेकर शनिवार को सारा दिन घमासान होता रहा। सुबह से ही सरबत खालसा के लीडर व भाई मंड के समर्थक जेल के बाहर इकट्ठे हो गए। बाद दोपहर दो बजे तक रिहाई की आस में बैठे समर्थकों को उस समय भारी निराशा मिली, जब नाभा जेल से रिहा होते ही भाई मंड को थाना मक्खू की पुलिस ने छह दिसंबर 2015 के एक मामले में जेल के बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया। इसके खिलाफ सिख संगतों ने पंजाब सरकार व पुलिस के खिलाफ नारे लगाए।
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डीएसपी जीरा एचएस बोपाराय की अगुवाई में भारी पुलिस फोर्स जब भाई ध्यान सिंह मंड को फिरोजपुर के लिए लेकर जा रहा थी, तो हजारों की गिनती में इकट्ठा हुई सिख संगतों ने रोष मार्च के रूप में पुलिस की गाड़ी के साथ अपने वाहन लगा लिए। भाई मंड की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हुई थी। इस कारण जेल से बाहर आने पर उनके स्वागत में भारी गिनती में सिख संगत जेल के बाहर पहले से ही मौजूद थीं।