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बिजली मुलाजिम नेतां ने कोर्ट में किया सरेंडर
Updated Tue, 16 Jan 2018 10:21 PM IST
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बिजली मुलाजिम नेताओं ने कोर्ट में किया सरेंडर
निचली अदालत की ओर से सुनाई सजा को हाईकोर्ट ने रखा था बरकरार
साल 2007 में पावरकॉम के एक्सईएन की शिकायत पर हुआ था पर्चा दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
निजीकरण और आउट सोर्सिंग की नीति के खिलाफ संघर्ष करते नामजद हुए टेक्निकल सर्विस यूनियन (टीएसयू) के पटियाला सर्कल के सात मुलाजिम नेताओं के खिलाफ निचली अदालत ने सजा सुनाई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे बहाल रखा है जिसके कारण इन नेताओं ने मंगलवार को पटियाला कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में बिजली मुलाजिम इन नेताओं के हक में पहुंचे। वह जेल के मेन गेट तक भी गए। मौके पर यूनियन ने मैनेजमेंट के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का फैसला लिया।
यूनियन के प्रदेश प्रधान भरपूर सिंह ने बताया कि टीएसयू के पटियाला सर्कल के इन सात बिजली मुलाजिम नेताओं विजय देव, बनारसी दास, रमेश्वर दास, तीर्थ बहादुर, राम सिंह, अमर देव, रजिंदर सिंह के खिलाफ मैनेजमेंट की ओर से 2007 में केस दर्ज किया गया था। मैनेजमेंट की ओर से यूनियन के साथ 10 नवंबर 2013 में लिखित समझौता करने के बावजूद जानबूझ कर अदालती केस वापस नहीं लिया गया। इसके तहत हाईकोर्ट की ओर से नेताओं की अपील 19 दिसंबर 2017 को रद्द कर दी गई। मंगलवार को इन सातों बिजली मुलाजिम नेताओं ने पटियाला की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इन नेताओं को एक-एक साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद अब मैनेजमेंट के खिलाफ संघर्ष और भी तेज किया जाएगा।
उधर इंकलाबी लोक मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) ने बिजली बोर्ड के कर्मचारी नेताओं को सुनाई सजा की निंदा की है। इंकलाबी लोक मोर्चा के कनवीनर रणजीत सिंह सवाजपुर और किसान यूनियन के अवतार सिंह कौरजीवाला ने कहा कि पावरकॉम मैनेजमेंट की शह पर अधिकारियों की ओर से इन मुलाजिम नेताओं पर झूठा केस डाला गया था। इन नेताओं के खिलाफ कोई भी गवाही नहीं थी और न ही किसी हथियार की बरामदगी हुई थी। एक अफसर की शिकायत पर ही सारा कुछ कर दिया गया जो हैरानीजनक बात लगती है।
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निचली अदालत की ओर से सुनाई सजा को हाईकोर्ट ने रखा था बरकरार
साल 2007 में पावरकॉम के एक्सईएन की शिकायत पर हुआ था पर्चा दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
निजीकरण और आउट सोर्सिंग की नीति के खिलाफ संघर्ष करते नामजद हुए टेक्निकल सर्विस यूनियन (टीएसयू) के पटियाला सर्कल के सात मुलाजिम नेताओं के खिलाफ निचली अदालत ने सजा सुनाई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे बहाल रखा है जिसके कारण इन नेताओं ने मंगलवार को पटियाला कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में बिजली मुलाजिम इन नेताओं के हक में पहुंचे। वह जेल के मेन गेट तक भी गए। मौके पर यूनियन ने मैनेजमेंट के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का फैसला लिया।
यूनियन के प्रदेश प्रधान भरपूर सिंह ने बताया कि टीएसयू के पटियाला सर्कल के इन सात बिजली मुलाजिम नेताओं विजय देव, बनारसी दास, रमेश्वर दास, तीर्थ बहादुर, राम सिंह, अमर देव, रजिंदर सिंह के खिलाफ मैनेजमेंट की ओर से 2007 में केस दर्ज किया गया था। मैनेजमेंट की ओर से यूनियन के साथ 10 नवंबर 2013 में लिखित समझौता करने के बावजूद जानबूझ कर अदालती केस वापस नहीं लिया गया। इसके तहत हाईकोर्ट की ओर से नेताओं की अपील 19 दिसंबर 2017 को रद्द कर दी गई। मंगलवार को इन सातों बिजली मुलाजिम नेताओं ने पटियाला की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इन नेताओं को एक-एक साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद अब मैनेजमेंट के खिलाफ संघर्ष और भी तेज किया जाएगा।
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उधर इंकलाबी लोक मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) ने बिजली बोर्ड के कर्मचारी नेताओं को सुनाई सजा की निंदा की है। इंकलाबी लोक मोर्चा के कनवीनर रणजीत सिंह सवाजपुर और किसान यूनियन के अवतार सिंह कौरजीवाला ने कहा कि पावरकॉम मैनेजमेंट की शह पर अधिकारियों की ओर से इन मुलाजिम नेताओं पर झूठा केस डाला गया था। इन नेताओं के खिलाफ कोई भी गवाही नहीं थी और न ही किसी हथियार की बरामदगी हुई थी। एक अफसर की शिकायत पर ही सारा कुछ कर दिया गया जो हैरानीजनक बात लगती है।
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