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नशे के कारोबार को खत्म करने का आह्वान
अमर उजाला, पटियाला
Updated Mon, 21 Oct 2013 11:16 PM IST
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पटियाला। पटियाला जोन के आईजी ईश्वर सिंह ने युवाओं से आह्वान किया है कि पंजाब से नशे के कारोबार के खात्मे के लिए एकजुट हों। इससे पंजाब के युवा वर्ग को गुमराह कर नशे की दलदल में धकेलने वाले असामाजिक तत्वों की साजिशों को असफल बनाया जा सकेगा।
वे सोमवार को पुलिस लाइन में शहीदी यादगार दिवस के समागम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने शहादत देने वाले पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि दी और शहीदों के सदस्यों को संबोधित भी किया।
उन्होंने कहा कि देश की अखंडता व एकता को कायम रखने के लिए शहादत का जाम पीने वाले पंजाब पुलिस के अधिकारियों और जवानों पर समूचे पंजाब वासियों को गौरव होना चाहिए।
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इन शहीदों ने खुशहाल पंजाब का सपना लेकर शहादत दी थीं, लेकिन अब युवा पीढ़ी को नशे गिरफ्त में आने से न रोका गया, तो राज्य दोबारा से तबाही के किनारे पर खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ चली लंबी लड़ाई में पंजाब पुलिस के करीब 1784 अफसरों और जवानों ने अपनी जान दे दी। उन्होंने शहीदों के परिवारों को हर सुख दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
डीसी जीके सिंह ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों की ओर से नौजवानों को हीरोइन, स्मैक, कोकीन जैसे घातक नशों का आदि बनाने और जाली करेंसी के जरिए देश को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने की कोशिशों को असफल बनाने के लिए जोरदार मुहिम चलानी पडे़गी।
करीब 54 साल पहले 21 अक्तूबर 1959 को भारत-चीन की सरहद पर लद्दाख के क्षेत्र हाट-स्प्रिंग में एसआई करम सिंह की अगुवाई में सरहद की रक्षा कर रही सीआरपीएफ और इंटेलीजेंस ब्यूरो की सांझी पेट्रोलिंग पार्टी पर चीनी फौजों की ओर से किए अचानक हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे। तब से इस दिन को देश भर में शहीदी यादगारी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके बाद जिले के 60 शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया गया और उनकी शिकायतों व मुश्किलों को सुनकर मौके पर ही निपटारा किया गया।
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वे सोमवार को पुलिस लाइन में शहीदी यादगार दिवस के समागम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने शहादत देने वाले पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि दी और शहीदों के सदस्यों को संबोधित भी किया।
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उन्होंने कहा कि देश की अखंडता व एकता को कायम रखने के लिए शहादत का जाम पीने वाले पंजाब पुलिस के अधिकारियों और जवानों पर समूचे पंजाब वासियों को गौरव होना चाहिए।
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इन शहीदों ने खुशहाल पंजाब का सपना लेकर शहादत दी थीं, लेकिन अब युवा पीढ़ी को नशे गिरफ्त में आने से न रोका गया, तो राज्य दोबारा से तबाही के किनारे पर खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ चली लंबी लड़ाई में पंजाब पुलिस के करीब 1784 अफसरों और जवानों ने अपनी जान दे दी। उन्होंने शहीदों के परिवारों को हर सुख दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
डीसी जीके सिंह ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों की ओर से नौजवानों को हीरोइन, स्मैक, कोकीन जैसे घातक नशों का आदि बनाने और जाली करेंसी के जरिए देश को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने की कोशिशों को असफल बनाने के लिए जोरदार मुहिम चलानी पडे़गी।
करीब 54 साल पहले 21 अक्तूबर 1959 को भारत-चीन की सरहद पर लद्दाख के क्षेत्र हाट-स्प्रिंग में एसआई करम सिंह की अगुवाई में सरहद की रक्षा कर रही सीआरपीएफ और इंटेलीजेंस ब्यूरो की सांझी पेट्रोलिंग पार्टी पर चीनी फौजों की ओर से किए अचानक हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे। तब से इस दिन को देश भर में शहीदी यादगारी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके बाद जिले के 60 शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया गया और उनकी शिकायतों व मुश्किलों को सुनकर मौके पर ही निपटारा किया गया।