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Patiala News: पैरालंपिक में गोल्ड जीत कर लौटे तीरंदाज हरविंदर सिंह का पीयू पहुंचने पर शानदार स्वागत
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सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली तीरंदाज पूजा का भी स्वागत, ओपन गाड़ी में ढोल की थाप पर नाचते खिलाड़ियों को अंदर लाया गया
हरविंदर ने कहा-हरेक को खुद में विश्वास रखना चाहिए, इससे कोई भी मंजिल जीती जा सकती है
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पेरिस में पैरालंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीत कर लौटे तीरंदाज हरविंदर सिंह का पंजाबी यूनिवर्सिटी पहुंचने पर शानदार स्वागत किया गया। तीरंदाज हरविंदर सिंह व सेमीफाइनल तक जाने वाली तीरंदाज पूजा का कैंपस में पहुंचने पर मेन गेट पर फूलों के हार पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों को एक ओपन गाड़ी में काफिले के रूप में साइंस आडिटोरियम तक ले जाया गया। ढोल की थाप पर नाचते इस काफिले में शामिल स्टूडेंट्स में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर केके यादव, की ओर से साइंस ऑडिटोरियम में चलते प्रोग्राम के दौरान फोन काल के जरिये दोनों खिलाड़ियों के साथ विशेष तौर पर बात की गई और उन्हें बधाई दी।
डीन अकादमिक प्रोफेसर नरिंदर कौर मुल्तानी ने इस मौके बोलते दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी और पैरालंपिक खेलों के इतिहास व महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि खेल सिर्फ मेडल जीतने के लिए ही नहीं होते हैं, बल्कि शख्सियत के विकास व मानसिक सेहत की तंदरूस्ती के पक्ष से भी खेलों का भरपूर योगदान होता है। उन्होंने कहा कि यह भी एक खूबसूरत इतेफाक है कि पैरालंपिक खेलों की शुरुआत तीरंदाजी के साथ ही हुई थी और भारत ने इसी खेल में गोल्ड मेडल जीता है। रजिस्टरार प्रोफेसर संजीव पुरी ने भरोसा दिलाया कि खिलाड़ियों को यूनिवर्सिटी की ओर से हर पक्ष से सहयोग किया जाएगा।
तीरंदाज हरविंदर सिंह ने कहा कि हर एक को खुद में विश्वास रखना चाहिए। ऐसा करने से दुनिया की कोई भी मंजिल को जीता जा सकता है। हरविंदर ने कहा कि आज के समय में पंजाबी यूनिवर्सिटी तीरंदाजी का गढ़ है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा हो रहे हैं। हरविंदर ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें अपने सपने पूरे करने का मौका व प्लेटफार्म दिया है। साथ ही कहा कि सभी अभिभावकों को अपने बच्चों को खेलों के साथ जरूर जोड़ना चाहिए। ऐसा करने से उनमें एक खिलाड़ी की भावना पैदा होती है। जो उनको अच्छा इंसान बनाने में भी मददगार साबित होती है। गौरतलब है कि हरविंदर सिंह पीयू पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग में पीएचडी शोधकर्ता के तौर पर अपना शोध कार्य कर रहे हैं। 33 सालों के खिलाड़ी हरविंदर सिंह हरियाणा के कैथल जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने 2020 में जापान के टोक्यो में हुईं पैरालंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। 2018 में उन्होंने जकारता में एशियन पैरा खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता था।
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हरविंदर ने कहा-हरेक को खुद में विश्वास रखना चाहिए, इससे कोई भी मंजिल जीती जा सकती है
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पेरिस में पैरालंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीत कर लौटे तीरंदाज हरविंदर सिंह का पंजाबी यूनिवर्सिटी पहुंचने पर शानदार स्वागत किया गया। तीरंदाज हरविंदर सिंह व सेमीफाइनल तक जाने वाली तीरंदाज पूजा का कैंपस में पहुंचने पर मेन गेट पर फूलों के हार पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों को एक ओपन गाड़ी में काफिले के रूप में साइंस आडिटोरियम तक ले जाया गया। ढोल की थाप पर नाचते इस काफिले में शामिल स्टूडेंट्स में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर केके यादव, की ओर से साइंस ऑडिटोरियम में चलते प्रोग्राम के दौरान फोन काल के जरिये दोनों खिलाड़ियों के साथ विशेष तौर पर बात की गई और उन्हें बधाई दी।
डीन अकादमिक प्रोफेसर नरिंदर कौर मुल्तानी ने इस मौके बोलते दोनों खिलाड़ियों को बधाई दी और पैरालंपिक खेलों के इतिहास व महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि खेल सिर्फ मेडल जीतने के लिए ही नहीं होते हैं, बल्कि शख्सियत के विकास व मानसिक सेहत की तंदरूस्ती के पक्ष से भी खेलों का भरपूर योगदान होता है। उन्होंने कहा कि यह भी एक खूबसूरत इतेफाक है कि पैरालंपिक खेलों की शुरुआत तीरंदाजी के साथ ही हुई थी और भारत ने इसी खेल में गोल्ड मेडल जीता है। रजिस्टरार प्रोफेसर संजीव पुरी ने भरोसा दिलाया कि खिलाड़ियों को यूनिवर्सिटी की ओर से हर पक्ष से सहयोग किया जाएगा।
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तीरंदाज हरविंदर सिंह ने कहा कि हर एक को खुद में विश्वास रखना चाहिए। ऐसा करने से दुनिया की कोई भी मंजिल को जीता जा सकता है। हरविंदर ने कहा कि आज के समय में पंजाबी यूनिवर्सिटी तीरंदाजी का गढ़ है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा हो रहे हैं। हरविंदर ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें अपने सपने पूरे करने का मौका व प्लेटफार्म दिया है। साथ ही कहा कि सभी अभिभावकों को अपने बच्चों को खेलों के साथ जरूर जोड़ना चाहिए। ऐसा करने से उनमें एक खिलाड़ी की भावना पैदा होती है। जो उनको अच्छा इंसान बनाने में भी मददगार साबित होती है। गौरतलब है कि हरविंदर सिंह पीयू पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग में पीएचडी शोधकर्ता के तौर पर अपना शोध कार्य कर रहे हैं। 33 सालों के खिलाड़ी हरविंदर सिंह हरियाणा के कैथल जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने 2020 में जापान के टोक्यो में हुईं पैरालंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। 2018 में उन्होंने जकारता में एशियन पैरा खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता था।
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