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दीवाली पर लुधियाना सबसे अधिक प्रदूषित
Patiala
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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पटियाला। दिवाली पर पंजाब के लुधियाना में सबसे अधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण पाया गया, जबकि अमृतसर दूसरे और जालंधर तीसरे नंबर पर रहा। पंजाब के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शुमार मंडी गोबिंदगढ़ में दिवाली पर कम प्रदूषण पाया गया।
पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से दिवाली के मौके पर सभी महानगरों में प्रदूषण की जांच कराई जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर देखा जाता है कि बोर्ड की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के चलते लोगों में आतिशबाजी का चलन कम हो भी रहा है या नहीं। इस दिवाली पर बोर्ड की ओर से विभिन्न शहरों में वायु और ध्वनि प्रदूषण की जांच रिपोर्ट से साफ हुआ है कि दिवाली पर प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार दीवाली पर पंजाब का लुधियाना सबसे अधिक प्रदूषित पाया गया। लुधियाना के रिहायशी व कामर्शियल दोनों तरह के इलाकों में तय मानकों से काफी ज्यादा अधिक वायु प्रदूषण पाया गया। बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक लुधियाना में हवा में धूल के कण तय सीमा से काफी अधिक पाए गए, जो लोगों में सांस व फेफड़ों की बीमारियां पैदा करते हैं। इस मामले में अमृतसर दूसरे और जालंधर तीसरे स्थान पर रहा। पंजाब के मोस्ट पाल्यूटिड शहरों में शामिल मंडी गोबिंदगढ़ चौथे और पटियाला पांचवें स्थान पर रहा। वायु प्रदूषण की जांच में बोर्ड की ओर से हवा में सल्फर डाईआक्साइड और आक्साइड आफ नाइट्रोजन की भी जांच की जाती है, लेकिन यह प्रदूषित तत्व सभी जगह तय सीमा से नीचे ही पाए गए हैं।
ध्वनि प्रदूषण में भी लुधियाना अव्वल
ध्वनि प्रदूषण के मामले में भी रिहायशी व कामर्शियल दोनों तरह के इलाकों में लुधियाना ही सबसे अधिक पाल्यूटिड शहर पाया गया। जबकि रेजीडेंशियल में मंडी गोबिंदगड़ दूसरे, जालंधर तीसरे, पटियाला चौथे और अमृतसर पांचवें स्थान पर रहा। दूसरी तरफ कामर्शियल में जालंधर दूसरे, मंडी गोबिंदगढ़ तीसरे, अमृतसर चौथे और पटियाला पांचवें स्थान पर रहा।
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सेंसेटिव में श्री दरबार साहिब में सबसे अधिक वायु, ध्वनि प्रदूषण
पंजाब पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से दिवाली पर विभिन्न शहरों में सेंसेटिव इलाकों जैसे अस्पतालों, प्रमुख धार्मिक स्थलों के पास भी प्रदूषण की जांच की जाती है। जिसके आधार पर पूरे पंजाब में से अमृतसर स्थित श्री दरबार सिंह में सबसे अधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण पाया गया। श्री दरबार साहिब में हवा में धूल के कण (सेंस्पिड पर्टिकुलेट मैटर) तय सीमा यानी 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब के मुकाबले 390 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब पाया गया। ध्वनि प्रदूषण भी यहां पर विभिन्न शहरों की तुलना में सबसे अधिक यानी 74 डेसीबल पाया गया।
विभिन्न शहरों में बोर्ड की ओर से प्रदूषण जांच के दौरान हवा में तय मात्रा से अधिक पाए गए धूल के कणों (सस्पेंडिड पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा) को माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब में मापा जाता है। इसकी तय मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब है।
प्रदूषण जांच रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड की ओर से अपनी जागरूकता मुहिम को और मजबूत किया जाएगा, जिससे लोगों में आतिशबाजी का चलन कम हो। उन्होंने माना कि सेंसेटिव एरिया में अमृतसर के गोल्डन टैंपल में सबसे अधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण पाया गया है।
बाबू राम, सदस्य सेक्रेटरी, पीपीसीबी
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पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से दिवाली के मौके पर सभी महानगरों में प्रदूषण की जांच कराई जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर देखा जाता है कि बोर्ड की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के चलते लोगों में आतिशबाजी का चलन कम हो भी रहा है या नहीं। इस दिवाली पर बोर्ड की ओर से विभिन्न शहरों में वायु और ध्वनि प्रदूषण की जांच रिपोर्ट से साफ हुआ है कि दिवाली पर प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार दीवाली पर पंजाब का लुधियाना सबसे अधिक प्रदूषित पाया गया। लुधियाना के रिहायशी व कामर्शियल दोनों तरह के इलाकों में तय मानकों से काफी ज्यादा अधिक वायु प्रदूषण पाया गया। बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक लुधियाना में हवा में धूल के कण तय सीमा से काफी अधिक पाए गए, जो लोगों में सांस व फेफड़ों की बीमारियां पैदा करते हैं। इस मामले में अमृतसर दूसरे और जालंधर तीसरे स्थान पर रहा। पंजाब के मोस्ट पाल्यूटिड शहरों में शामिल मंडी गोबिंदगढ़ चौथे और पटियाला पांचवें स्थान पर रहा। वायु प्रदूषण की जांच में बोर्ड की ओर से हवा में सल्फर डाईआक्साइड और आक्साइड आफ नाइट्रोजन की भी जांच की जाती है, लेकिन यह प्रदूषित तत्व सभी जगह तय सीमा से नीचे ही पाए गए हैं।
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ध्वनि प्रदूषण में भी लुधियाना अव्वल
ध्वनि प्रदूषण के मामले में भी रिहायशी व कामर्शियल दोनों तरह के इलाकों में लुधियाना ही सबसे अधिक पाल्यूटिड शहर पाया गया। जबकि रेजीडेंशियल में मंडी गोबिंदगड़ दूसरे, जालंधर तीसरे, पटियाला चौथे और अमृतसर पांचवें स्थान पर रहा। दूसरी तरफ कामर्शियल में जालंधर दूसरे, मंडी गोबिंदगढ़ तीसरे, अमृतसर चौथे और पटियाला पांचवें स्थान पर रहा।
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सेंसेटिव में श्री दरबार साहिब में सबसे अधिक वायु, ध्वनि प्रदूषण
पंजाब पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से दिवाली पर विभिन्न शहरों में सेंसेटिव इलाकों जैसे अस्पतालों, प्रमुख धार्मिक स्थलों के पास भी प्रदूषण की जांच की जाती है। जिसके आधार पर पूरे पंजाब में से अमृतसर स्थित श्री दरबार सिंह में सबसे अधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण पाया गया। श्री दरबार साहिब में हवा में धूल के कण (सेंस्पिड पर्टिकुलेट मैटर) तय सीमा यानी 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब के मुकाबले 390 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब पाया गया। ध्वनि प्रदूषण भी यहां पर विभिन्न शहरों की तुलना में सबसे अधिक यानी 74 डेसीबल पाया गया।
विभिन्न शहरों में बोर्ड की ओर से प्रदूषण जांच के दौरान हवा में तय मात्रा से अधिक पाए गए धूल के कणों (सस्पेंडिड पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा) को माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब में मापा जाता है। इसकी तय मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब है।
प्रदूषण जांच रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड की ओर से अपनी जागरूकता मुहिम को और मजबूत किया जाएगा, जिससे लोगों में आतिशबाजी का चलन कम हो। उन्होंने माना कि सेंसेटिव एरिया में अमृतसर के गोल्डन टैंपल में सबसे अधिक वायु और ध्वनि प्रदूषण पाया गया है।
बाबू राम, सदस्य सेक्रेटरी, पीपीसीबी