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पीयू सेमिनार

Mon, 23 Apr 2018 10:16 PM IST
Updated Mon, 23 Apr 2018 10:16 PM IST
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पीयू सेमिनार
महाराणा प्रताप चेयर बनने से नई जानकारियां मिलेंगी: बदनौर
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पीयू में महाराणा प्रताप के जीवन, काल और विरासत पर सेमिनार आयोजित
महाराणा प्रताप ने ही समाज में सबसे पहले जाति प्रथा को समाप्त किया था: राणा केपी सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
पंजाबी यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में स्थापित की गई महाराणा प्रताप चेयर की तरफ से सोमवार को महाराणा प्रताप के जीवन, काल और विरासत पर सेमिनार का आयोजन किया गया। मुख्य मेहमान राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने कहा कि महाराणा प्रताप चेयर बनने से नई जानकारियां सामने आएंगी और विशेषज्ञों की तरफ से की जाने वाली खोज से यह भी सामने आएगा कि अकबर के कार्यकाल दौरान पंजाब और राजस्थान में किस तरह की संस्कृति थी। लोग किस तरह से एक-दूसरे के संस्कारों से प्रभावित और प्रेरित होते थे।
बदनौर ने मध्यकालीन भारत के इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि उत्तर पश्चिमी भारत से हमले होते रहे और इनका रास्ता पंजाब होता था परंतु इसके बाद यह मुगल हमलावर राजस्थान की तरफ जाते थे और फिर सारे हिंदुस्तान में कब्जा करके अपने धर्म और संस्कृति का प्रचार करते थे। इन विदेशी हमलावरों ने भारत को कई सदियों तक गुलाम भी बना कर रखा। बदनौर ने कहा कि मध्य एशिया में से चलने वाली इन ताकतों ने सभी इलाकों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर दिया।
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सेमिनार में इतिहासकारों ने बताया कि मुगल सल्तनत और हिंदुस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में फैली छोटी ताकतों के बीच कैसे संबंध रहे और उन दिनों किस तरह के हालात थे। 23 अप्रैल को महाराणा प्रताप के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित किए गए इस सेमिनार में पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह ने बताया कि भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप का कितना बड़ा योगदान रहा है।
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उन्होंने बताया कि आम तौर पर लोग महाराणा प्रताप की युद्ध नीति से ही अवगत हैं, जबकि उन्होंने समाज में सबसे पहले जाति प्रथा को समाप्त किया था और लोग उनके लिए हर तरह का बलिदान देने के लिए तैयार थे। महाराणा प्रताप ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। परंतु उस शूरवीर ने गुलामी भी बर्दाश्त न करने की शपथ भी ली। इससे पहले वाइस चंासलर डा. बीएस घुम्मन ने मेहमानों का स्वागत किया। वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी कोटा राजस्थान के पूर्व वाइस चांसलर जीएसएल देवड़ा ने अपने भाषण में इतिहासकारों के अलग-अलग पक्षों का हवाला दिया।
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