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पंजाब में खाली बस्ते स्कूल जाने को मजबूर सरकारी स्कूलों के 26 लाख विद्यार्थी
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पटियाला। आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में दिल्ली की तर्ज पर स्कूली शिक्षा में सुधार करने के दावे कर सत्ता में आई थी, लेकिन इसके हालात विपरीत हैं। पंजाब के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी खाली बस्ते स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। इसका कारण यह है कि पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड (पीएसईबी) की ओर से अब तक स्कूलों में पहली क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक की किताबें मुहैया नहीं कराई गई हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो रहा है।
छह अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। हालांकि इस संबंधी जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) हरिंदर कौर ने कहा कि किताबें अगले चार-पांच दिनों तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी। ताकि बच्चों की पढ़ाई और प्रभावित न हो।
जानकारी के मुताबिक पंजाब में 19 हजार के करीब प्राइमरी, मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, जिनमें 26 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पहली से लेकर दसवीं क्लास तक के विद्यार्थियों को हर विषय की किताबें पीएसईबी की ओर से दी जाती हैं। 11वीं व 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को केवल अनिवार्य विषय की किताबें मिलती हैं। बाकी सिलेक्टिव विषयों की किताबें उन्हें बाहर से प्राइवेट प्रकाशकों की खरीदनी पड़ती हैं। पीएसईबी की ओर से यह किताबें पहले इनके विभिन्न डिपो पर पहुंचती हैं और यहां से ब्लाक प्राइमरी एजूकेशन दफ्तरों व फिर स्कूलों तक पहुंच पाती हैं।
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इस बार छह अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है और पिछले आठ दिनों से विद्यार्थी बिना किताबों के स्कूल जा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है। इस संबंधी डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) के प्रदेश प्रधान विक्रम देव ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पहले ही कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। पीएसईबी को चाहिए था कि एडवांस में ही किताबें स्कूलों तक पहुंचा दी जातीं। पिछली सरकारों की तरह आप सरकार भी स्कूली शिक्षा में सुधार करने में फिलहाल असफल नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि पीएसईबी को किताबें देने संबंधी ग्रांट सरकार जारी करती है।
अध्यापक नेता मुकेश कुमार ने कहा कि खासतौर से आठवीं, दसवीं व 12वीं क्लासों के विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि पुराने शिक्षण सेशन से संबंधित बोर्ड परीक्षाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इस कारण इन क्लासों के विद्यार्थियों को पुरानी किताबें भी नहीं मिल पा रही हैं। बाकी क्लासों के विद्यार्थियों को किसी तरह से अध्यापक अपने स्तर पर पुरानी किताबों का प्रबंध करके पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर इस बार सिलेबस बदलकर आ गया, तो फिर परेशानी होगी।
अध्यापक नेता अतिंदरपाल सिंह घग्गा ने कहा कि कभी किताबें पहुंचने में देरी तो कभी कुछ विषयों की ही किताबों की सप्लाई होती है। इन सब दिक्कतों का अब अंत होना चाहिए। बच्चे देश का भविष्य हैं और अगर वह शिक्षित ही न हो सके, तो फिर देश कैसे तरक्की करेगा। मांग की कि 11वीं और 12वीं क्लास के अनिवार्य के साथ बाकी विषयों की किताबों को प्राइवेट प्रकाशकों के सहारे छोड़ने की बजाय पीएसईबी को अपने स्तर पर छपाई करके वितरण करना चाहिए।
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छह अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। हालांकि इस संबंधी जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) हरिंदर कौर ने कहा कि किताबें अगले चार-पांच दिनों तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी। ताकि बच्चों की पढ़ाई और प्रभावित न हो।
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जानकारी के मुताबिक पंजाब में 19 हजार के करीब प्राइमरी, मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, जिनमें 26 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पहली से लेकर दसवीं क्लास तक के विद्यार्थियों को हर विषय की किताबें पीएसईबी की ओर से दी जाती हैं। 11वीं व 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को केवल अनिवार्य विषय की किताबें मिलती हैं। बाकी सिलेक्टिव विषयों की किताबें उन्हें बाहर से प्राइवेट प्रकाशकों की खरीदनी पड़ती हैं। पीएसईबी की ओर से यह किताबें पहले इनके विभिन्न डिपो पर पहुंचती हैं और यहां से ब्लाक प्राइमरी एजूकेशन दफ्तरों व फिर स्कूलों तक पहुंच पाती हैं।
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इस बार छह अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है और पिछले आठ दिनों से विद्यार्थी बिना किताबों के स्कूल जा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है। इस संबंधी डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) के प्रदेश प्रधान विक्रम देव ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पहले ही कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। पीएसईबी को चाहिए था कि एडवांस में ही किताबें स्कूलों तक पहुंचा दी जातीं। पिछली सरकारों की तरह आप सरकार भी स्कूली शिक्षा में सुधार करने में फिलहाल असफल नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि पीएसईबी को किताबें देने संबंधी ग्रांट सरकार जारी करती है।
अध्यापक नेता मुकेश कुमार ने कहा कि खासतौर से आठवीं, दसवीं व 12वीं क्लासों के विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि पुराने शिक्षण सेशन से संबंधित बोर्ड परीक्षाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इस कारण इन क्लासों के विद्यार्थियों को पुरानी किताबें भी नहीं मिल पा रही हैं। बाकी क्लासों के विद्यार्थियों को किसी तरह से अध्यापक अपने स्तर पर पुरानी किताबों का प्रबंध करके पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर इस बार सिलेबस बदलकर आ गया, तो फिर परेशानी होगी।
अध्यापक नेता अतिंदरपाल सिंह घग्गा ने कहा कि कभी किताबें पहुंचने में देरी तो कभी कुछ विषयों की ही किताबों की सप्लाई होती है। इन सब दिक्कतों का अब अंत होना चाहिए। बच्चे देश का भविष्य हैं और अगर वह शिक्षित ही न हो सके, तो फिर देश कैसे तरक्की करेगा। मांग की कि 11वीं और 12वीं क्लास के अनिवार्य के साथ बाकी विषयों की किताबों को प्राइवेट प्रकाशकों के सहारे छोड़ने की बजाय पीएसईबी को अपने स्तर पर छपाई करके वितरण करना चाहिए।