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ीयू कांट्रैक्ट अध्यापक
Updated Mon, 12 Feb 2018 10:38 PM IST
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‘कांट्रैक्ट अध्यापकों को पूरी तनख्वाह देने के आदेश’
यूजीसी के नए नियमों ने दी कांट्रैक्ट अध्यापकों को राहत
10 फीसदी से ज्यादा नहीं रखे जा सकते हैं अध्यापक कांट्रैक्ट पर
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
रेगुुलर अध्यापकों के बराबर तनख्वाह की मांग कर रहे कॉलेजों के कांट्रैक्ट अध्यापकों को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने राहत देने का फैसला लिया है। यूजीसी की ओर से फरवरी 2018 में उच्च शिक्षा से संबंधित जारी किए नए नियमों में यूजीसी ने कांट्रैक्ट अध्यापकों को भी रेगुलर अध्यापकों के बराबर तनख्वाह देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यही नहीं यूजीसी ने कांट्रैक्ट के बजाय रेगुलर भर्ती संबंधी भी निर्देश जारी किए हैं।
पंजाबी यूनिवर्सिटी कांट्रैक्ट टीचर्स एसोसिएशन ने यूजीसी की ओर से जारी नए नियमों का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पीयू भी जल्द ही इन नियमों को लागू करेगी। इससे उच्च शिक्षा में सुधार होगा और कांट्रैक्ट पर काम कर रहे अध्यापकों को रेगुलर किया जाएगा। पुकटा के प्रधान डॉ. लवदीप ने कहा कि यूजीसी की ओर से नई भर्ती के लिए और कांट्रैक्ट अध्यापकों के लिए यह नियम लाभदायक साबित होंगे। इन नियमों में कांट्रैक्ट अध्यापकों को रेगुलर अध्यापकों के बराबर तनख्वाह देने की बात की गई है। इस संबंधी सुप्रीम कोर्ट भी पहले आदेश जारी कर चुकी है कि कर्मचारी को बराबर काम बराबर तनख्वाह दी जाए।
अध्यापक नेता प्रोफेसर गुरदेव सिंह ने बताया कि यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक कोई भी संस्था अपने अध्यापन स्टाफ में 10 फीसदी से ज्यादा स्टाफ को कांट्रैक्ट पर नहीं रख सकती है। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी के सारे कंस्टीट्यूएंट कॉलेजों में 70 फीसदी अध्यापक कांट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। इसलिए नए नियमों के मुताबिक यूजीसी को यूनिवर्सिटी पर दबाव बनाना चाहिए कि वह अपने कांट्रैक्ट अध्यापकों को रेगुलर करे। इस दौरान कंस्टीट्यूएंट कॉलेजों के कांट्रैक्ट अध्यापकों की बीते तीन माह की तनख्वाह भी जारी करने की मांग की गई।
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यूजीसी के नए नियमों ने दी कांट्रैक्ट अध्यापकों को राहत
10 फीसदी से ज्यादा नहीं रखे जा सकते हैं अध्यापक कांट्रैक्ट पर
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
रेगुुलर अध्यापकों के बराबर तनख्वाह की मांग कर रहे कॉलेजों के कांट्रैक्ट अध्यापकों को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने राहत देने का फैसला लिया है। यूजीसी की ओर से फरवरी 2018 में उच्च शिक्षा से संबंधित जारी किए नए नियमों में यूजीसी ने कांट्रैक्ट अध्यापकों को भी रेगुलर अध्यापकों के बराबर तनख्वाह देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यही नहीं यूजीसी ने कांट्रैक्ट के बजाय रेगुलर भर्ती संबंधी भी निर्देश जारी किए हैं।
पंजाबी यूनिवर्सिटी कांट्रैक्ट टीचर्स एसोसिएशन ने यूजीसी की ओर से जारी नए नियमों का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पीयू भी जल्द ही इन नियमों को लागू करेगी। इससे उच्च शिक्षा में सुधार होगा और कांट्रैक्ट पर काम कर रहे अध्यापकों को रेगुलर किया जाएगा। पुकटा के प्रधान डॉ. लवदीप ने कहा कि यूजीसी की ओर से नई भर्ती के लिए और कांट्रैक्ट अध्यापकों के लिए यह नियम लाभदायक साबित होंगे। इन नियमों में कांट्रैक्ट अध्यापकों को रेगुलर अध्यापकों के बराबर तनख्वाह देने की बात की गई है। इस संबंधी सुप्रीम कोर्ट भी पहले आदेश जारी कर चुकी है कि कर्मचारी को बराबर काम बराबर तनख्वाह दी जाए।
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अध्यापक नेता प्रोफेसर गुरदेव सिंह ने बताया कि यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक कोई भी संस्था अपने अध्यापन स्टाफ में 10 फीसदी से ज्यादा स्टाफ को कांट्रैक्ट पर नहीं रख सकती है। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी के सारे कंस्टीट्यूएंट कॉलेजों में 70 फीसदी अध्यापक कांट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। इसलिए नए नियमों के मुताबिक यूजीसी को यूनिवर्सिटी पर दबाव बनाना चाहिए कि वह अपने कांट्रैक्ट अध्यापकों को रेगुलर करे। इस दौरान कंस्टीट्यूएंट कॉलेजों के कांट्रैक्ट अध्यापकों की बीते तीन माह की तनख्वाह भी जारी करने की मांग की गई।
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