फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Patiala News ›   प्रगतिशील किसान

प्रगतिशील किसान

Wed, 23 May 2018 10:21 PM IST
Updated Wed, 23 May 2018 10:21 PM IST
विज्ञापन
प्रगतिशील किसान
सभी केंद्र
विज्ञापन


उन्नत किसान
सरकारी नौकरी छोड़ सब्जियों का काश्तकार बना अमरिंदर
आधुनिक तौर तरीकों से सब्जियां की काश्त कर औरों को भी दे रहा है प्रेरणा
रंग बिरंगी शिमला मिर्च, खीरे, करेले, मशरूम और खरबूजों की खेती से मिलता है अतिरिक्त लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पटियाला के नाभा ब्लाक के गांव साधोहेड़ी का एक नौजवान वैसे चाहे ऊंची पढ़ाई (एमएससी, जियो इंफोर्मेटिक्स) के लिए नीदरलैंड भी गया और पंजाब सरकार के रिमोट सेंसिंग सेंटर में बतौर वैज्ञानिक करीब 4 वर्ष नौकरी की। परंतु असली संतुष्टि तो उसे सब्जियों का सफल काश्तकार बनकर ही मिली। यह प्रगतिशील किसान आज रंग बिरंगी शिमला मिर्च, मशरूम, खीरे, करेले, हरी मिर्च और खरबूजों की उन्नत खेती अति आधुनिक तरीकों से करके जहां प्रति एकड़ अच्छा लाभ कमा रहा है। वहीं ही अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
2013 में नौकरी छोड़ कर अपनी 32 एकड़ पारिवारिक जमीन पर कृषि का परंपरागत पेशा अपनाने वाले इस अमरिंदर सिंह ने 4000 वर्ग मीटर के पॉली हाउस से सब्जियों के उत्पादन की शुरुआत की। बाद में 2014 में 4000 वर्ग मीटर का एक और पॉलीहाउस बनाया। यहां से मिले लाभ से वह अधिक उत्साहित किया। इस तरह अमरिंदर सिंह पंजाब सरकार के बागवानी विभाग की तरफ से मिले सहयोग, सब्सिडी और तकनीकी सहायता के बलबूते एक सफल सब्जी उत्पादक बन गए हैं।
विज्ञापन


पहले लोग हंसते थे, आज पूछने आते हैं
बागवानी विभाग ने अमरिंदर सिंह को प्रति पॉलीहाउस 16 लाख 88 हजार और काश्त वाले समान पर 2 लाख 80 हजार प्रति पॉलीहाउस अलग से सब्सिडी मुहैया करवाई। जबकि उनके मशरूम के कंपोस्ट यूनिट के लिए भी सब्सिडी की स्वीकृति मिल गई है। अमरिंदर सिंह ने बताया कि उसने जब अपनी राजपत्रित अधिकारी की सरकारी नौकरी छोड़ी थी, तो लोग उसका मजाक करते थे। लेकिन आज उसे अपने फैसले पर गर्व महसूस होता है, क्योंकि अन्य किसान भी उससे ऐसी खेती करने के बारे में अक्सर पूछताछ करते रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


खेती के अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल
अमरिंदर सिंह का कहना है कि उसके पास अति आधुनिक कृषि यंत्र हैं। इसके अतिरिक्त वह ग्रीन हाउस पॉलीनेट, ड्रिप सिंचाई, मलचिंग और लौ टनल तकनीकें अपनाने जैसे अध्ययन के लिए विभिन्न खेती केंद्रों का दौरा भी करता रहता है। ऐसा करने का यह लाभ होता है कि सब्जियों में कीड़ेमार दवाओं का प्रभाव जीरो प्रतिशत, भूमिगत जल स्तर की बचत और खेती के अवशेषों का खेतों में ही इस्तेमाल किया जाता है, जिससे धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। इस मौके पर बागबानी विभाग के पटियाला स्थित कार्यालय के डिप्टी डायरेक्टर स्वर्ण सिंह मान ने कहा कि विभाग की तरफ से इस काश्तकार सहित अन्य किसानों को समय-समय पर तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे खेती लागत घटा कर अतिरिक्त लाभ कमा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed