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मैदान नहीं फिर भी खिलाड़ियों ने जीते पदक, सो रही सरकार, लोगों में कसक
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नयागांव। इलाके के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हॉकी से लेकर क्रिकेट तक में इलाके के युवा देश के लिए खेल चुके हैं। इसके बाद भी इलाके में अभी तक खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है। मजबूरी में युवाओं को खेलने के लिए चंडीगढ़ या पंचकूला जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, इस वजह से यह खिलाड़ी पंजाब नहीं बल्कि अन्य शहरों के लिए खेलना शुरू कर देते हैं। इलाके के लोगों का मानना है कि अभी न्यू चंडीगढ़ बस रहा है। इसके अलावा इलाके में काफी सरकारी जमीन है। सरकार को युवाओं की तरफ ध्यान देकर मैदान बनाना चाहिए।
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की तरफ से खेलो इंडिया कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत बच्चों को खेलकूद में आगे लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इलाके में कोई खेल का मैदान ही नहीं है। इस कारण बच्चे पूरी तरह चंडीगढ़ के मैदानों पर निर्भर हैं। इलाके के लोगों की मांग है कि सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुएखेल के मैदान उपलब्ध कराएं।
पिछले दो साल से कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करने के कारण बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर काफी असर पड़ा है। इलाके के बच्चों ने अपने स्तर पर मेहनत कर खेल में नाम कमाया है। इलाके की रहने वाली रीना खोखर हॉकी ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी है। इसके साथ क्रिकेट में प्रशांत चोपड़ा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर इलाके का नाम रोशन कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि अगर बच्चों को खेल के मैदान मिल जाए तो वे नाम रोशन करेंगे। ऐसी ही स्थिति खरड़ में बनी हुई है। वहां के खिलाड़ियों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
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खेल मैदान की हो व्यवस्था
जिस प्रकार बच्चों के लिए खाना-पीना जरूरी है, उसी प्रकार मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए खेलकूद भी बहुत जरूरी है। यह इलाके का दुर्भाग्य है कि यहां पर कोई खेल का मैदान नहीं है। -सुल्तान ग्रोवर, क्रिकेट कोच
खेलकूद के महत्व को समझे सरकार
बच्चों के लिए खेलकूद जरूरी है। अगर बचपन में खेलकूद की व्यवस्था न हो तो बच्चों में चिड़चिड़ापन हो जाता है। सरकार को बच्चों के लिए आउटडोर गेम के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। -महिंदर शर्मा, स्थानीय वासी
प्रतिभा की कमी नहीं, सरकार पूरी करे जिम्मेदारी
पढ़ाई के साथ स्कूल में बच्चों के लिए खेल की व्यवस्था जरूरी है। अगर खेल की व्यवस्था न हो तो बच्चों का पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है। हमारे इलाके के युुवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरा करे। -मनोज कुमार, शिक्षक
इलाके में खेल मैदान न होना दुर्भाग्य
इलाके का दुर्भाग्य है कि यहां पर कोई खेल का मैदान नहीं है। जो बच्चे नयागांव से बाहर नहीं जा पाते हैं, उनके लिए खेल में रुचि होने के बावजूद आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
गणेश शर्मा, स्थानीय वासी
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जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की तरफ से खेलो इंडिया कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत बच्चों को खेलकूद में आगे लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इलाके में कोई खेल का मैदान ही नहीं है। इस कारण बच्चे पूरी तरह चंडीगढ़ के मैदानों पर निर्भर हैं। इलाके के लोगों की मांग है कि सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुएखेल के मैदान उपलब्ध कराएं।
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पिछले दो साल से कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करने के कारण बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर काफी असर पड़ा है। इलाके के बच्चों ने अपने स्तर पर मेहनत कर खेल में नाम कमाया है। इलाके की रहने वाली रीना खोखर हॉकी ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी है। इसके साथ क्रिकेट में प्रशांत चोपड़ा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर इलाके का नाम रोशन कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि अगर बच्चों को खेल के मैदान मिल जाए तो वे नाम रोशन करेंगे। ऐसी ही स्थिति खरड़ में बनी हुई है। वहां के खिलाड़ियों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
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खेल मैदान की हो व्यवस्था
जिस प्रकार बच्चों के लिए खाना-पीना जरूरी है, उसी प्रकार मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए खेलकूद भी बहुत जरूरी है। यह इलाके का दुर्भाग्य है कि यहां पर कोई खेल का मैदान नहीं है। -सुल्तान ग्रोवर, क्रिकेट कोच
खेलकूद के महत्व को समझे सरकार
बच्चों के लिए खेलकूद जरूरी है। अगर बचपन में खेलकूद की व्यवस्था न हो तो बच्चों में चिड़चिड़ापन हो जाता है। सरकार को बच्चों के लिए आउटडोर गेम के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। -महिंदर शर्मा, स्थानीय वासी
प्रतिभा की कमी नहीं, सरकार पूरी करे जिम्मेदारी
पढ़ाई के साथ स्कूल में बच्चों के लिए खेल की व्यवस्था जरूरी है। अगर खेल की व्यवस्था न हो तो बच्चों का पढ़ाई में भी मन नहीं लगता है। हमारे इलाके के युुवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरा करे। -मनोज कुमार, शिक्षक
इलाके में खेल मैदान न होना दुर्भाग्य
इलाके का दुर्भाग्य है कि यहां पर कोई खेल का मैदान नहीं है। जो बच्चे नयागांव से बाहर नहीं जा पाते हैं, उनके लिए खेल में रुचि होने के बावजूद आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
गणेश शर्मा, स्थानीय वासी