फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   waiting of one and a half months for ultrasound in the medical college

मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड के लिए डेढ़ महीने की चल रही है वेटिंग

Sun, 22 May 2022 02:18 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sun, 22 May 2022 02:18 AM IST
विज्ञापन
waiting of one and a half months for ultrasound in the medical college
मोहाली। फेज-6 स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राज्य आयुर्विज्ञान संस्थान में अल्ट्रासाउंड की राह आसान नहीं है। केवल गंभीर मरीजों का तो अस्पताल में तुरंत अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता है, लेकिन अन्य मरीजों को डेढ़ से पौने दो महीने तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसकी मुख्य वजह अल्ट्रासाउंड करने संबंधी स्टाफ की कमी है। इस चक्कर में जरूरतमंद लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। मजबूरी में वे चंडीगढ़ या पंचकूला के सरकारी अस्पतालों की तरफ रुख कर रहे हैं।
विज्ञापन

लोगों का कहना है कि इससे जहां उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं, कई बार तो अल्ट्रासाउंड के इंतजार में ही बीमारी गंभीर हो जाती है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से ही उम्मीद है कि जल्द स्टाफ की कमी पूरी की जाएगी।
विज्ञापन

फेज-छह स्थित मेडिकल कॉलेज पहले जिला सिविल अस्पताल था। कुछ समय पहले ही इसे मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला है। यहां पर एक अल्ट्रासाउंड मशीन 20 साल पुरानी है जिसें इमरजेंसी में आए मरीजों को देखने के लिए प्रयोग किया जाता है। वहीं दूसरी मशीन करीब आठ साल पुरानी है। इन मशीनों के लिए लेकर एक ही डॉक्टर नियुक्त है। इससे पहले यहां तैनात डॉक्टर पदोन्नत हो गए। उनके पास अस्पताल की अन्य जिम्मेदारी भी है। ऐसे में काम प्रभावित हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

किस्मत अच्छी है तो आएगा नंबर
मेडिकल कॉलेज में काफी संख्या में गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंचती हैं। जिनका पहली बार अल्ट्रासाउंड होता है, उन्हें अक्सर एक महीने बाद की तारीख दी जाती हैं। यहां एक डॉक्टर को एक मशीन के सहारे ही मरीज देखना पड़ता है। रोज सिर्फ 40 से 50 मरीजों को ही देखा जा रहा है। इस समय मरीजों को जुलाई महीने की तारीख दी जा रही है। वहीं हर रोज आने वाले हर बीस मरीजों के बाद तारीख एक दिन और आगे की कर दी जाती है। आए हुए मरीजों को डेढ़ महीने से भी अधिक समय तक का इंतजार करना पड़ता है।
रात में इमजरेंसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं
मेडिकल कॉलेज में सुबह 7 बजे से ही मरीज पर्ची काउंटर पर पहुंच जाते हैं। वहीं रेडियोलॉजी विभाग सुबह 8 बजे शुरू होता है। रेडियोलाजिस्ट डॉक्टर मीटिंग करने बाद 9.30 तक पहुंचते हैं। ऐसे में 9.30 से दोपहर 2 बजे तक डॉक्टर द्वारा 40 से 50 लोगों का ही टेस्ट हो पाता है। इसमें इमरजेंसी वाले मरीजों को अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता है। इसके अलावा पुलिस से जुड़े केस भी रहते हैं। वहीं शाम और रात के समय यहां अल्ट्रासाउंड बंद रहता है। ऐसे में रात के समय आने वो गंभीर मरीजों को सुबह तक इंतजार करना पड़ता है।
दो साल से ऐसे चल रहा है अल्ट्रासाउंड का काम
2020 की बात करें तो यहां तीन रेडियोलाजिस्ट थे। इनमे से दो का तबादला हो गया। वहीं 2021 में मेडिकल कॉलेज द्वारा कार्यभार संभालने के बाद चार रेडियोलाजिस्ट के पद निकाले गए। इनमें से दो नए डॉक्टरों ने ज्वाइन भी किया, लेकिन मरीजों की गिनती देखते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वहीं 2022 में ही एक नई डॉक्टर आई हैं जो पुलिस केस को नहीं देखती है। वहीं एक रेडियोलाजिस्ट होने के कारण ही मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। इकलौते डॉक्टर के छुट्टी पर चले जाने अल्ट्रासाउंड वार्ड को बंद रखना पड़ता है। नई डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है लेकिन डॉक्टर की कमी के चलते उन्हें अस्पताल में नियुक्त किया गया है।
पेट में दर्द अब है, अल्ट्रासाउंड जुलाई में होगा
दो साल से पेट में दर्द है। अब तक दवा से ही काम चला रही थी। डॉक्टरों ने कहा था कि दवा खाने से ही ठीक हो जाएगा। वहीं कुछ दिनों से दर्द तेज हो रहा है। इसके बाद मुझे अल्ट्रासाउंड लिखा है। मुझे 4 जुलाई की तारीख मिली है क्योंकि मैं बाहर से महंगा इलाज नहीं करवा सकती। ऐसे में 4 जुलाई का ही इंतजार करना पड़ेगा। -रानी, वासी कुंभड़ा
अस्पताल में डॉक्टर नहीं, अब बस इंतजार
मेरी पत्नी चार महीने की गर्भवती है। ऐसे मैं अपना काम छोड़कर उसका अस्पताल दिखाने आया था। जहां टेस्ट में अल्ट्रासाउंड लिखा है। वहीं यहां पहुंचने पर भी पता चला है कि डॉक्टर नहीं है। इमरजेंसी में आए मरीजों को ही देखा जा रहा है। ऐसे में हमें 5 जुलाई की तारीख दी गई है। -कमल सिंह, वासी फेज-2
टेस्ट की फीस पहले ले ली, अब दो महीने का इंतजार
मेरी बहन हरियाणा से यहां आई है। अचानक उसके पेट में पिछले दो दिनों से दर्द हो रहा था। सोचा अस्पताल दिखा लेते हैं। वहीं डॉक्टर ने उसे अल्ट्रासाउंड लिखा है। हमें 5 जुलाई की तारीख दी गई है। ऐसे में जहां उसे दर्द है तो हम डेढ़ महीने का तो इंतजार नहीं कर सकते। मैं उसे प्राइवेट में दिखाने जा रही हूं। वहीं दूसरी और हमने टेस्ट की फीस पहले से ही भर दी है। -नैना, वासी बलौंगी
कुराली से आई हूं, अब डेढ़ महीने बाद फिर आना होगा
मैं कुराली से यहां डॉक्टर को दिखाने आई हूं। मेरे साथ मेरे दो बच्चे और पति हैं। मैं तीन महीने की गर्भवती हूं। और मरीजों के साथ मुझे भी पांच जुलाई की तारीख दी गई हैं। अब जब फीस यहां जमा करवा ही दी है तो टेस्ट के लिए जुलाई का इंतजार करना ही पड़ेगा। सरकार इस चीज को गंभीरता से ले। -प्रीत कौर, कुराली

क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल में बने रेडियोलॉजी विभाग के प्रभारी होने के चलते यहां का अधिकतम काम मैं ही देखता हूं। एक साल पहले रेडियोलाजिस्ट तौर पर मैं अपनी सेवा दे रहा था, लेकिन एसएमओ बनने के बाद मेरी अस्पताल में जिम्मेदारी बढ़ गई है। गंभीर केस आ जाने पर मैं ही उन मरीजों का अल्ट्रासाउंड देखता हूं। मेडिकल कॉलेज के द्वारा तैनात डॉक्टर दोपहर 2 बजे तक होते है। हमने विभाग को काफी कई बार लिखा है कि दो रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति करें ताकि मरीजों को उचित इलाज मिल पाए। -डॉ. विजय भगत, एसएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed