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Mohali News: आय से अधिक संपत्ति के आरोपी ईओ गिरीश वर्मा के बेटे विकास ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण

Wed, 24 Jul 2024 07:13 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 07:13 AM IST
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Vikas, son of EO Girish Verma, accused of disproportionate assets, surrenders in court.
चंडीगढ़। विकास वर्मा जो बर्खास्त स्थानीय निकाय विभाग पंजाब के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) गिरीश वर्मा का बेटा है, उसने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंगलवार को अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस मामले में आरोपी विकास वर्मा, बर्खास्त ईओ गिरीश वर्मा और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मोहाली कोर्ट ने आरोपी विकास वर्मा का तीन दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया है। विजिलेंस के मुताबिक मामले में गिरीश वर्मा और उसके तीन सहयोगियों, संजीव कुमार (निवासी खरड़ ), पवन कुमार शर्मा (निवासी पंचकूला जोकि एक कॉलोनाइजर है) और गौरव गुप्ता (पूर्व नगर पार्षद कुराली) को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2022 में गिरीश वर्मा और अन्य के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान पाया गया कि गिरीश वर्मा ने अपनी पत्नी संगीता वर्मा और पुत्र विकास वर्मा के नाम पर 19 प्रमुख आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियां खरीदी थीं।
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विकास वर्मा की अग्रिम जमानत पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई थी। इसके बाद मोहाली कोर्ट ने विकास वर्मा को भगोड़ा घोषित कर दिया था और विजिलेंस ब्यूरो के हाथों गिरफ्तारी के डर से आज उसने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इस मामले की आगे की जांच जारी है। आरोपी गिरीश वर्मा ने जीरकपुर, खरड़, कुराली, डेराबस्सी आदि के नगर परिषदों में ईओ के रूप में कार्य किया था और स्थानीय बिल्डरों और डेवलपरों को गलत लाभ पहुंचाया था। इसके बदले में उसने अपनी पत्नी और बेटे के नाम पर बैंक प्रविष्टियों के रूप में अवैध धन प्राप्त किया। यह धन संपत्तियां खरीदने के लिए उपयोग किया गया था।
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विकास वर्मा और संगीता वर्मा के पास इन संपत्तियों से मिलने वाले किराए के अलावा कोई वैध आय का स्रोत नहीं था। आरोपी विकास वर्मा ने वर्ष 2019-20 में रियल एस्टेट कंपनियों - बालाजी इंफ्रा बिल्डटेक और बालाजी डेवलपर्स में अपने पिता के काले धन को लांड्रिंग कर व गैर सुरक्षित ऋण के तौर पर प्राप्त बैंक प्रविष्टियों द्वारा इसको वैध पैसे में बदल देता था। विकास वर्मा के साझेदार जो अब इस मामले में सह-आरोपी हैं, संजीव कुमार, गौरव गुप्ता और आशीष शर्मा, सभी निवासी कुराली, प्लॉट्स की बिक्री व रिहायशी काॅलोनियों को गैर कानूनी ढंग से रेगुलर बनाने के लिए पुराने तारीखों वाले समझौते तैयार कर धोखाधड़ी की गतिविधियों को अंजाम देते थे।
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आरोपी गौरव गुप्ता इन फर्मों का संस्थापक था और बालाजी इंफ्रा बिल्डटेक में 80 प्रतिशत हिस्सा रखने वाला प्रमुख साझेदार था। उसने खरड़ में कृषि वाली जमीन खरीदने के लिए अन्य साझेदारों के साथ मिलकर अपने शेयरों के तौर पर करोड़ों रुपये का निवेश किए था और फिर अवैध रूप से इस भूमि पर आवासीय कॉलोनी को नियमित करवा लिया था। इसके बाद उसका 15 प्रतिशत हिस्सा गिरीश वर्मा के पुत्र विकास वर्मा को स्थानांतरित कर दिया।
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