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नौ दिन से पूरब अपार्टमेंट में विजिलेंस का डेरा, लिए 82 से अधिक सैंपल

Sat, 19 Dec 2020 02:14 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2020 02:14 AM IST
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Vigilance probe in Purab apartment for nine days, more than 82 samples taken
मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के ड्रीम प्रोजेक्ट पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट पर विजिलेंस की टीम करीब नौ दिन से जांच में जुटी है। अब तक विभिन्न चीजों के 82 से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं, जबकि 10 से 15 चीजों के और सैंपल लिए जाएंगे। उम्मीद है कि दो महीने में सैंपलों की रिपोर्ट आ जाएगी। बता दें कि जो सैंपल लिए जा रहे हैं उन्हें कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। आम आदमी तो दूर वहां अकेले विभाग के अधिकारी तक नहीं पहुंच सकते हैं। इसके अलावा गमाडा के रिकॉर्ड भी विजिलेंस द्वारा जांचे जा रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक सेक्टर-88 में गमाडा द्वारा पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट बसाया गया है। यह गमाडा की पहली बहुमंजिला अपार्टमेंट परियोजना है। इसमें वन बीएचके, टू बीएचके व थ्री बीएचके अपार्टमेंट हैं। इस दौरान 1600 फ्लैट बनाए गए थे। यहां पर जो फ्लैट बनाए गए थे वह बाजार मूल्य से भी काफी अधिक थे। उस समय गमाडा ने कई दावे किए थे। साथ ही सारी सुविधाएं अपार्टमेंट्स में देने की बात कही थी, लेकिन जब लोग बसे तो उन्होंने कई तरह की खामियां परियोजना में बताईं। इसको लेकर वह गमाडा के अधिकारियों से लेकर सीएम तक पहुंचे। यहां तक कि पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने भी आवंटियों का दर्द सुना था, लेकिन बात बीच में ही रह गई थी। इसी दौरान 2018 में आहत लोगों ने इस संबंधी विजिलेंस को शिकायत दी थी। अब जाकर करीब दो साल बाद जांच शुरू हुई है।
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लोगों ने 52 से अधिक खामियों की दी थी शिकायत
यह परियोजना तब बनी थी जब राज्य में अकाली-भाजपा की सरकार थी। काफी देर तक लोग इस मामले में गमाडा व अन्य अधिकारियों को शिकायत करते रहे थे, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हो रही थी। लोग इस मामले में सीएम से लेकर पीएम तक को शिकायत कर चुके हैं। इसी बीच जब राज्य में कांग्रेस की सरकार आई तो लोगों ने इस संबंधी विजिलेंस को शिकायत दी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस परियोजना की लागत 715 करोड़ रुपये थी, लेकिन कंपनी को 750 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस दौरान आवंटियों ने गमाडा को शिकायत में 52 ऐसे बिंदु बताए थे, जोकि परियोजना में खामियां थीं। इसके बाद अब इस दिशा में कार्रवाई शुरू हुई है।
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सरकारी रिहायश बनाए जा रहे फ्लैट
गमाडा ने प्रोजेक्ट में 1600 के करीब फ्लैट बनाए हुए हैं, लेकिन शुरू में सैकड़ों लोगों ने अपने फ्लैट सुपुर्द किए थे। इसके बाद गमाडा ने अब खाली पड़े फ्लैटों को अफसरों की सरकारी रिहायश बनाने की दिशा में काम शुरू किया है। जिन मुलाजिमों के पास घर नहीं है, इस संबंधी सर्वे भी हुआ था। इसके बाद कुछ सरकारी अफसरों को वहां पर फ्लैट आवंटित भी हुए हैं, जिनमें अफसर रह रहे हैं।
सैंपल वाले कमरे के ताले को लगाई जाती है सील
जानकारी के मुताबिक विजिलेंस द्वारा परियोजना में एक विशेष कमरे में सामान के सैंपल रखे जा रहे हैं। इन सैंपलों पर कैमरे की नजर रहती है। उक्त जगह पर लगे दरवाजे को शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में सील लगाकर विजिलेंस की टीम जाती है। सुबह आने पर उक्त सील को खोला जाता है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई चलती है।

धरना दिया तो घटों में ठीक हुईं 34 लिफ्ट
पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट के आवंटियों ने 15 दिसंबर को गमाडा के खिलाफ पुडा भवन के बाहर धरना दिया था। इसके बाद हाउसिंग डिपार्टमेंट के सचिव सरबजीत सिंह ने लोगों से बैठक की थी। साथ ही सारी समस्याओं को हल करने का भरोसा दिलाया था, जिसके बाद उसी दिन सारी बंद पड़ी 34 लिफ्ट गमाडा ने ठीक करवा दी थीं।
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